दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को लाल किला आतंकी मामले के आरोपी जासिर बिलाल वानी उर्फ़ दानिश को डिफ़ॉल्ट ज़मानत देने से इनकार कर दिया।
जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और विकास महाजन की डिवीज़न बेंच ने ट्रायल कोर्ट के आदेश के ख़िलाफ़ वानी की अपील को ख़ारिज कर दिया।
विस्तृत आदेश का इंतज़ार है।
डिफ़ॉल्ट बेल हिरासत से रिहा होने का एक अधिकार है, जो तब मिलता है जब पुलिस या जांच एजेंसी तय कानूनी समय-सीमा के भीतर अपनी जांच पूरी करने और चार्जशीट दाखिल करने में नाकाम रहती है।
वानी जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग का रहने वाला 20 साल का युवक है। नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने उस पर 10 नवंबर, 2025 को लाल किले के इलाके में हुए कार बम धमाके में सक्रिय रूप से साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया है।
कहा जाता है कि उसने डॉ. उमर-उन-नबी के साथ मिलकर काम किया था, जिसने हमले में इस्तेमाल की गई विस्फोटक से भरी कार चलाई थी। एजेंसी का आरोप है कि वानी ने टेरर मॉड्यूल को तकनीकी मदद दी थी, जिसमें ड्रोन में बदलाव करना और रॉकेट बनाने की कोशिश करना शामिल है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, NIA की मई 2026 की चार्जशीट में वानी को मॉड्यूल का "इन-हाउस इंजीनियर" बताया गया है और आरोप लगाया गया है कि उसने इसके सदस्यों को तकनीकी सहायता दी थी।
जांचकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि साजिश के सिलसिले में वह 2024-25 के दौरान फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी में रुका था।
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2025 Red Fort terror attack: Delhi High Court denies bail to accused Jasir Bilal Wani