PM Narendra Modi and Allahabad High Court  
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इलाहाबाद HC ने PM के पाकिस्तान से माफी मांगते हुए सोशल मीडिया पोस्ट को साझा के आरोप मे दर्ज मामले मे व्यक्ति को जमानत दी

आरोपी अशरफ खान एक साल तक जेल में रहा, क्योंकि उसने कथित तौर पर एक पोस्ट शेयर की थी जिसमें ऑपरेशन सिंदूर के तुरंत बाद PM मोदी पाकिस्तान से माफी मांग रहे थे।

Bar & Bench

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में एक ऐसे आदमी को ज़मानत दी है, जो एक साल से ज़्यादा समय से जेल में है। उसने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर करने का आरोप लगाया था, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पाकिस्तान से माफ़ी मांगते हुए और “पाकिस्तान ज़िंदाबाद” का नारा लगाते हुए दिख रहे थे। [अशरफ़ खान बनाम UP राज्य]

जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल ने 14 जुलाई को यह आदेश दिया, जिसमें उन्होंने कहा कि मामले में महीनों पहले आरोप तय होने के बावजूद, ट्रायल आगे नहीं बढ़ा था और सरकारी वकील के एक भी गवाह से पूछताछ नहीं हुई थी।

कोर्ट ने कहा, “तेजी से ट्रायल आरोपी का बुनियादी अधिकार है।”

इसलिए, उसने आरोपी को जमानत दे दी, लेकिन रिहाई के बाद उसके सोशल मीडिया इस्तेमाल करने पर शर्तें लगाईं।

Justice Arun Kumar Singh Deshwal

यह मामला अशरफ खान नाम के एक व्यक्ति के खिलाफ दर्ज FIR से सामने आया।

प्रॉसिक्यूशन ने आरोप लगाया कि खान ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर किया था जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पाकिस्तान से माफी मांगते हुए दिखाया गया था, साथ ही “पाकिस्तान जिंदाबाद” का नारा भी था।

इसने तर्क दिया कि इस पोस्ट ने भारतीय सेना, प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री का अपमान किया, यह राष्ट्रीय एकता के लिए नुकसानदायक था और अलगाववादी गतिविधियों को बढ़ावा देता था।

खान को 13 मई, 2025 को गिरफ्तार किया गया था और जुलाई 2025 में हाई कोर्ट ने उसकी पहली ज़मानत याचिका खारिज कर दी थी।

उसने फिर से हाईकोर्ट का रुख किया, यह तर्क देते हुए कि ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे पता चले कि उसने कथित आपत्तिजनक पोस्ट को फॉरवर्ड किया था।

उसने यह भी बताया कि हालांकि 14 फरवरी, 2025 को आरोप तय कर दिए गए थे, लेकिन प्रॉसिक्यूशन के एक भी गवाह से पूछताछ नहीं की गई, जिसके कारण उसे लंबे समय तक जेल में रहना पड़ा और तेजी से ट्रायल के उसके मौलिक अधिकार का उल्लंघन हुआ। उसने आगे इस बात पर भरोसा किया कि एक सह-आरोपी को पहले ही ज़मानत मिल चुकी थी।

हाईकोर्ट ने उसकी दलीलों को मान लिया। कोर्ट ने कहा कि खान 13 मई, 2025 से कस्टडी में है और चार्ज पहले ही तय हो जाने के बावजूद ट्रायल में कोई प्रोग्रेस नहीं हुई है।

कोर्ट ने इस बात पर भी ध्यान दिया कि को-एक्जीक्यूटिव को पहले ही बेल मिल चुकी है, ट्रायल चल रहा है और कस्टडी में पूछताछ की अब ज़रूरत नहीं है।

कोर्ट ने बेल देने से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के फैसलों, जेलों में भीड़ और ट्रायल कोर्ट में क्रिमिनल केस के बहुत ज़्यादा पेंडिंग होने का भी ज़िक्र किया।

बेल देते समय, कोर्ट ने खान को सोशल मीडिया पर ऐसा कोई भी मटीरियल पोस्ट न करने का निर्देश दिया जिससे अलगाववादी एक्टिविटीज़ को बढ़ावा मिले या देश के हित या किसी कम्युनिटी को नुकसान हो।

कोर्ट ने उन्हें ट्रायल में कोऑपरेट करने का भी निर्देश दिया और चेतावनी दी कि शर्तों का कोई भी उल्लंघन बेल कैंसल करने का आधार होगा।

[ऑर्डर पढ़ें]

Ashraf_Khan_v_State_of_UP.pdf
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Allahabad HC grants bail to man booked for sharing social media post showing PM apologising to Pakistan