Justice Sandeep Jain  
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इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज ने नई टैक्स व्यवस्था के तहत कानूनी भत्तों पर टैक्स छूट देने से इनकार को चुनौती दी

कोर्ट ने आज केंद्र सरकार और टैक्स अधिकारियों से जज की याचिका पर जवाब देने को कहा।

Bar & Bench

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक मौजूदा न्यायाधीश ने नई कर व्यवस्था के तहत वैधानिक भत्तों पर कर छूट से इनकार को चुनौती देते हुए अदालत के समक्ष एक याचिका दायर की है।

जस्टिस सौमित्र दयाल सिंह और जस्टिस स्वरूपमा चतुर्वेदी की बेंच ने आज केंद्र सरकार और सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ डायरेक्ट टैक्सेस (CBDT) से जस्टिस संदीप जैन की पिटीशन पर जवाब देने को कहा। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई को तय की है।

Justice Saumitra Dayal Singh and Justice Swarupama Chaturvedi

जस्टिस जैन ने इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के सितंबर 2025 में जारी एक ऑफिस मेमोरेंडम (OM) को चुनौती दी है। यह ऑफिस मेमोरेंडम उन लोगों को हाईकोर्ट जज (सैलरी और सर्विस की शर्तें) एक्ट, 1954 के सेक्शन 22D के तहत छूट का कानूनी फायदा देने से मना करता है, जो इनकम टैक्स एक्ट के तहत अगला टैक्स सिस्टम चुनते हैं।

जज ने अपनी सैलरी के हिस्से के तौर पर मिलने वाले सत्कार भत्ते और हाउस रेंट भत्ते के लिए छूट मांगी थी। हालांकि, इनकम टैक्स अधिकारियों ने ₹9 लाख से ज़्यादा के दावे को खारिज कर दिया।

कोर्ट में अपनी याचिका में, उन्होंने तर्क दिया है कि OM पहली नज़र में मनमाना, गलत और गैर-कानूनी है। इसलिए, उन्होंने OM को रद्द करने और उन्हें भत्तों के लिए छूट का दावा करने की इजाज़त देने के लिए निर्देश देने की प्रार्थना की है।

सीनियर एडवोकेट निपुण सिंह और एडवोकेट नमन अग्रवाल ने जस्टिस जैन का प्रतिनिधित्व किया।

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Allahabad High Court judge challenges denial of tax exemption on statutory allowances under new tax regime