समाजवादी पार्टी (सपा) नेता मो. आजम खान ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने एक अन्य मामले में जेल से रिहा होने के तुरंत बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा की गई अपनी गिरफ्तारी को चुनौती दी है।
यह मामला वकील निज़ाम पाशा द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के समक्ष रखा गया।
CJI इस सप्ताह मामले की सुनवाई करने के लिए सहमत हो गए।
29 अक्टूबर को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दो पैन कार्ड (dual PAN card) मामले में खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को जमानत दे दी।
हाई कोर्ट ने दो पैन कार्ड मामले में खान को सुनाई गई 10 साल की सजा पर तो रोक लगा दी, लेकिन उनकी दोषसिद्धि (conviction) पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।
31 अक्टूबर को खान और उनके बेटे को रामपुर जेल से रिहा किया गया, लेकिन जेल के बाहर इंतजार कर रही ED की टीम ने खान को हिरासत में ले लिया। ED की यह कार्रवाई मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं के एक अलग मनी लॉन्ड्रिंग मामले के संबंध में थी।
गाजियाबाद की एक विशेष PMLA (प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) अदालत ने रविवार, 1 नवंबर को खान को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
ED का यह मामला उन आरोपों से जुड़ा है, जिनमें कहा गया है कि मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के लिए किसानों की कृषि भूमि पर जबरन कब्जा कर लिया गया था।
ED ने उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा 2019 में दर्ज की गई लगभग 26 FIR के आधार पर खान और अन्य लोगों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला शुरू किया।
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Azam Khan moves Supreme Court against arrest by ED after release from jail