बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने सोमवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और उसके नेताओं—जिनमें प्रमुख मोहन भागवत भी शामिल हैं—को 'Z+' VVIP सुरक्षा कवर दिए जाने के खिलाफ दायर एक जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया [ललन किशोर सिंह बनाम भारत संघ]।
चीफ़ जस्टिस श्री चंद्रशेखर और जस्टिस अनिल एस. किलोर की डिवीज़न बेंच ने कहा कि यह एक "मंशा से प्रेरित याचिका" थी और कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग था।
लालन किशोर सिंह द्वारा दायर PIL में सुप्रीम कोर्ट के एक फ़ैसले का हवाला देते हुए यह दावा किया गया था कि किसी भी व्यक्ति को दी जाने वाली Z+ सुरक्षा कवर का आधार उस व्यक्ति को होने वाले सुरक्षा खतरे का कोई उचित कारण होना चाहिए।
सिंह के वकील ने दलील दी, "इसके अलावा, RSS जैसे संगठन को सुरक्षा कवर देने में होने वाले खर्च पर जनता का पैसा बर्बाद नहीं किया जा सकता।"
उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्रालय और अन्य अधिकारियों को यह निर्देश देने की मांग की कि मोहन भागवत से ऐसी सुरक्षा देने में हुए खर्च की वसूली की जाए।
कोर्ट ने गौर किया कि सिंह ने, खुद के भारत का नागरिक होने के अलावा, अपनी कोई भी निजी जानकारी या अपनी जानकारी का स्रोत नहीं बताया था।
कोर्ट ने यह दर्ज किया कि ऐसा लगता है कि वह सिर्फ़ अख़बार की रिपोर्टों के आधार पर ही कोर्ट आ गए थे और उन्होंने संबंधित PIL नियमों के तहत ज़रूरी रिसर्च नहीं की थी।
ऑर्डर में कहा गया, “हमें इस रिट याचिका में, जिसे PIL के तौर पर मार्क किया गया है, कोई भी जनहित शामिल नहीं दिखता। साफ़ तौर पर, यह PIL एक प्रेरित याचिका है और यह क़ानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है।”
इसलिए, कोर्ट ने PIL को ख़ारिज कर दिया।
सिंह की तरफ़ से एडवोकेट AR इंगोले पेश हुए।
केंद्र सरकार की तरफ़ से डिप्टी सॉलिसिटर जनरल कार्तिक शुकुल पेश हुए।
राज्य की तरफ़ से सरकारी वकील DV चौहान, अतिरिक्त सरकारी वकील NS राव के साथ पेश हुए।
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Bombay High Court dismisses PIL against Z+ security cover for RSS, calls it ‘motivated’