बॉम्बे हाई कोर्ट ने मंगलवार को निर्देश दिया कि फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस (FRRO) के 14 अक्टूबर के उस नोटिस को 2 नवंबर तक रोक कर रखा जाए, जिसमें अभिनेता इमरान खान को 28 अक्टूबर (कल) तक भारत छोड़ने के लिए कहा गया था [इमरान खान पाल बनाम भारत संघ और अन्य]।
मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की खंडपीठ ने आज इस मामले पर संक्षिप्त सुनवाई की। इस दौरान केंद्र सरकार के वकील ने अदालत से आग्रह किया कि मामले की सुनवाई सोमवार, 2 नवंबर तक के लिए टाल दी जाए।
केंद्र की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) ने अदालत को यह भरोसा भी दिलाया कि तब तक खान के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जाएगी।
ASG ने कहा, "न्यायमूर्ति जी, इसे सोमवार के लिए रख लें।"
खान की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता वेंकटेश धोंड ने जवाब दिया, "लेकिन मुझे कल ही जाना है (FRRO के निर्देश के अनुसार)।"
ASG ने आगे कहा, "इसे सोमवार के लिए रख लें। कुछ नहीं होगा। यह एक मौखिक आश्वासन है।"
अदालत ने मामले की सुनवाई टालने पर सहमति जताई और कहा कि तब तक FRRO के आदेश को रोक कर रखा जाए।
अदालत ने कहा, "ASG ने समय मांगा है। मामला अब 2 नवंबर को दोपहर 3 बजे के लिए टाल दिया गया है। जिस आदेश को चुनौती दी गई है, उसे अगली तारीख तक रोक कर रखा जाएगा।"
खान ने 17 अक्टूबर को कोर्ट में एक याचिका दायर कर FRRO द्वारा 14 अक्टूबर को जारी किए गए 'लीव इंडिया नोटिस' (भारत छोड़ने के नोटिस) को रद्द करने की मांग की है। उन्होंने देश से निकाले जाने (डिपोर्टेशन), लुकआउट नोटिस, और उनके 'ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया' (OCI) स्टेटस में किसी भी तरह के दखल पर अंतरिम रोक लगाने की भी अपील की है।
14 अक्टूबर का यह आदेश, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञान कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के बाद खान को कुछ समय के लिए पुलिस हिरासत में लिए जाने और BJP नेता किरीट सोमैया द्वारा सार्वजनिक व्यवस्था के कथित उल्लंघन को लेकर दर्ज कराई गई शिकायत के बाद आया है।
खान का तर्क है कि उन्हें FRRO का यह नोटिस केवल विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की कोशिश करने की वजह से मिला है।
अपनी याचिका में खान ने कहा है कि कार्यकारी अधिकारियों ने बिना कोई सुनवाई किए बहुत जल्दबाजी में यह कदम उठाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने स्वतंत्र रूप से सोचने के बजाय राजनीतिक सोशल मीडिया अभियानों के दबाव में आकर उनके कानूनी अधिकारों को दरकिनार कर दिया है।
उन्होंने दावा किया कि FRRO ने नागरिकता अधिनियम की धारा 7D का उल्लंघन किया है। इस धारा के तहत, OCI स्टेटस रद्द करने से पहले एक औपचारिक 'शो-कॉज नोटिस' (कारण बताओ नोटिस) देना और अपना पक्ष रखने का उचित मौका देना अनिवार्य है।
इस बीच, 17 अक्टूबर को FRRO ने OCI स्टेटस रद्द करने के संबंध में धारा 7D के तहत एक 'शो-कॉज नोटिस' भी जारी कर दिया। हालांकि, खान की मौजूदा याचिका में इस नोटिस को चुनौती नहीं दी गई है।
खान ने इस फैसले से जुड़े सभी आंतरिक रिकॉर्ड कोर्ट के सामने पेश करने की भी मांग की है।
खान की ओर से MZM लीगल के वकील ज़ुल्फ़िकार मेमन, परवेज़ मेमन और चिराग नाइक ने पैरवी की।
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Bombay High Court grants relief to actor Imran Khan in challenge to FRRO's leave India notice