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बुल्ली बाई केस: मुंबई कोर्ट ने आरोपी विशाल झा को बरी किया; कहा कि सिर्फ़ मोबाइल ऐप का इस्तेमाल करना कोई अपराध नहीं

इस मामले में पहली बार आरोप से बरी किए जाने के दौरान, बांद्रा के मजिस्ट्रेट ने कहा कि सिर्फ़ ऐप का इस्तेमाल करना या सह-आरोपी के संपर्क में रहना कोई अपराध नहीं है।

Bar & Bench

मुंबई की एक अदालत ने 'बुल्ली बाई' ऐप मामले में विशाल सुधीरकुमार झा के खिलाफ़ केस बंद कर दिया है; इस मामले में 100 से ज़्यादा मुस्लिम महिलाओं की तस्वीरें नीलामी के लिए दिखाई गई थीं [विशाल झा बनाम महाराष्ट्र राज्य]।

बांद्रा के ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट आर.टी. इंगले ने 6 अक्टूबर को यह आदेश पारित किया।

मजिस्ट्रेट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि झा की इसमें कोई सीधी भूमिका नहीं थी और कहा कि सह-आरोपी के संपर्क में रहने मात्र से ही उनके आपराधिक कृत्यों के लिए ज़िम्मेदारी तय नहीं हो जाती।

जज ने कहा, "हो सकता है कि आवेदक ने सह-आरोपी से जान-पहचान और संपर्क के कारण 'बुल्ली बाई' ऐप को फॉलो किया हो, लेकिन पूरी चार्ज-शीट में आवेदक की ऐसी कोई भूमिका नहीं है जिससे यह पता चले कि उसने या तो उक्त ऐप बनाया था या उसे बनाने में सह-आरोपी की मदद की थी।"

जज ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक पुराने फैसले का भी हवाला दिया, जिसमें यह स्थापित किया गया था कि किसी वेबसाइट पर किसी पेज को फॉलो करना दंडनीय अपराध नहीं है।

यह मामला GitHub पर होस्ट किए गए एक ऐप से जुड़ा है, जिसमें नीलामी के मकसद से 100 से ज़्यादा मुस्लिम महिलाओं की तस्वीरें गैर-कानूनी रूप से दिखाई गई थीं।

झा और दो अन्य आरोपियों को पहले 12 अप्रैल को ज़मानत मिल गई थी, जब कोर्ट ने पाया कि पुराने सह-आरोपियों ने उनकी नादानी का फ़ायदा उठाया था।

यह फैसला इस चर्चित साइबर अपराध जांच में पहला आधिकारिक आरोप-मुक्ति का मामला है।

झा पर धारा 153(a) (विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना), 153(b) (राष्ट्रीय एकता के लिए हानिकारक आरोप लगाना), और 295(a) (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के इरादे से जानबूझकर किए गए कृत्य) के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक रूप में अश्लील सामग्री प्रकाशित या प्रसारित करने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 के तहत आरोप लगाए गए थे।

झा की वकील आरती देशमुख ने आरोप-मुक्ति के लिए दलील दी कि चार्ज-शीट में झा के खिलाफ कोई अपराध साबित नहीं हो सका, क्योंकि उनका एकमात्र कथित कृत्य ऐप को फॉलो करना था।

उन्होंने तर्क दिया कि जांच अधिकारी ऐसा कोई सबूत पेश नहीं कर सके जिससे यह साबित हो कि झा ने अपने ट्विटर अकाउंट पर ऐप को शेयर किया था, जैसा कि दावा किया गया था।

कोर्ट ने दलीलों को स्वीकार कर लिया और उन्हें सभी आरोपों से मुक्त कर दिया।

राज्य की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक कल्पना हिरे पेश हुईं।

[आदेश पढ़ें]

Vishal_Jha_v__State_of_Maharashtra.pdf
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Bulli Bai case: Mumbai Court discharges accused Vishal Jha; says merely following mobile app no offence