J&K High Court, Reserved seats for women  Ai
समाचार

बसों में महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों पर मोटे अक्षरों में ‘महिलाओं के लिए आरक्षित’ लिखा होना चाहिए: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

कोर्ट ने ट्रांसपोर्ट कमिश्नर को सुनिश्चित करने का आदेश दिया कि हर पब्लिक ट्रांसपोर्ट गाड़ी मे महिलाओ के लिए सीटें आरक्षित हो और उन सीटो पर साफ़ तौर पर मोटे अक्षरों में "महिलाओ के लिए आरक्षित" लिखा हो।

Bar & Bench

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने 10 अगस्त को ट्रांसपोर्ट कमिश्नर को आदेश दिया कि वे पब्लिक ट्रांसपोर्ट बसों में महिलाओं के लिए अनिवार्य सीट रिज़र्वेशन और सुरक्षा के अन्य उपायों को लागू करना सुनिश्चित करें [मोनिशा मंज़ूर मीर बनाम जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश]।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव कुमार और न्यायाधीश मोहम्मद यूसुफ वानी की बेंच ने ट्रांसपोर्ट कमिश्नर को यह पक्का करने का आदेश दिया कि हर पब्लिक ट्रांसपोर्ट गाड़ी में महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित हों और उन सीटों पर साफ़ तौर पर मोटे अक्षरों में 'महिलाओं के लिए आरक्षित' (Reserved for Ladies) लिखा हो।

हाईकोर्ट ने आदेश दिया, "ट्रांसपोर्ट कमिश्नर यह पक्का करेंगे कि सर्कुलर नंबर 3 TC/2025 के अनुसार, बड़ी बसों में 1 से 12 और मिनी बसों में 1 से 9 नंबर की सीटें महिलाओं के लिए ठीक से चिह्नित और आरक्षित हों। साथ ही, यह भी पक्का किया जाए कि हर पब्लिक ट्रांसपोर्ट गाड़ी में इन सीटों पर मोटे अक्षरों में 'महिलाओं के लिए आरक्षित' लिखा हो।"

हाईकोर्ट ने J&K लीगल सर्विस अथॉरिटी को जागरूकता कार्यक्रम चलाने का भी निर्देश दिया, जिसमें खास तौर पर पब्लिक ट्रांसपोर्ट के ड्राइवर और हेल्पर शामिल हों, ताकि उन्हें इस बात के प्रति संवेदनशील बनाया जा सके कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट में महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित करने में उनकी क्या भूमिका है।

Chief Justice (Acting) Sanjeev Kumar and Justice Mohammad Yousuf Wani

कोर्ट ने वकील मोनिसा मंज़ूर मीर की जनहित याचिका (PIL) पर ये निर्देश जारी किए। इस याचिका में पब्लिक ट्रांसपोर्ट में महिलाओं के लिए ज़रूरी सीट रिज़र्वेशन और सुरक्षा के दूसरे उपायों को लागू न किए जाने पर चिंता जताई गई थी।

यह PIL पूरे जम्मू-कश्मीर में पब्लिक ट्रांसपोर्ट में महिलाओं की सुरक्षा और सीट रिज़र्वेशन से जुड़े मौजूदा नियमों और प्रशासनिक निर्देशों को लागू करवाने के लिए दायर की गई थी।

हाईकोर्ट ने शुरू में 20 फरवरी को केंद्र शासित प्रदेश को नोटिस जारी किया था और याचिका में उठाए गए मुद्दों पर जवाब मांगा था।

10 अगस्त को सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने महिला यात्रियों से जुड़े मुद्दों पर ध्यान दिया और संबंधित अधिकारियों को विस्तृत निर्देश जारी किए।

कोर्ट ने ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट और ट्रैफिक पुलिस को मिलकर एक असरदार सिस्टम बनाने का भी निर्देश दिया, जिसके ज़रिए महिला यात्री शिकायतें दर्ज करा सकें और अपनी समस्याओं का समाधान पा सकें।

कोर्ट ने निर्देश दिया कि उसके आदेशों की जानकारी संबंधित अधिकारियों को तुरंत पालन के लिए दी जाए और सुनवाई की अगली तारीख पर पालन रिपोर्ट (compliance report) जमा करने का आदेश दिया।

इस मामले की अगली सुनवाई 6 अक्टूबर को होगी।

याचिकाकर्ता मोनिसा मंज़ूर खुद पेश हुईं।

सीनियर एडिशनल एडवोकेट जनरल (AAG) मोहसिन एस कादरी और उनके साथ असिस्टेंट काउंसिल महा मजीद प्रतिवादियों की ओर से पेश हुए।

[आदेश पढ़ें]

Monisa_Manzoor_vs__Union_Territory_of_J_K.pdf
Preview

और अधिक पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें


Bus seats reserved for women should have 'Reserved for Ladies' sign in bold: J&K High Court