दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि अदालतें किसी पार्टी की तरफ से पेश होने वाले वकीलों को उनके क्लाइंट की तरफ से फाइल किए गए डॉक्यूमेंट्स के सोर्स का खुलासा करने के लिए मजबूर नहीं कर सकतीं।
जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने कहा कि ऐसा निर्देश देना इंडियन एविडेंस एक्ट, 1872 (IEA) की धारा 126 का उल्लंघन होगा, जो वकील-मुवक्किल के बीच गोपनीयता स्थापित करती है।
कोर्ट ने समझाया कि अदालतों में दाखिल किए गए दस्तावेजों की मुख्य ज़िम्मेदारी पार्टी की होती है और जब कोई क्लाइंट कानूनी बचाव के लिए अपने वकील को कोई दस्तावेज़ सौंपता है, तो सौंपने का काम और दस्तावेज़ के स्रोत के बारे में जानकारी प्रोफेशनल गोपनीयता का हिस्सा होती है।
कोर्ट ने कहा, "किसी वकील को यह बताने के लिए मजबूर करना कि 'क्लाइंट X ने मुझे यह दस्तावेज़ दिया', इंडियन एविडेंस एक्ट की धारा 126 द्वारा संरक्षित दस्तावेजों के 'स्रोत' का खुलासा करने के लिए मजबूर करना है। वकील द्वारा दाखिल किए गए ऐसे दस्तावेज़ क्लाइंट के कहने पर और उसकी ओर से होते हैं।"
कोर्ट ने कहा कि हालांकि कोर्ट सच्चाई पूछ सकता है, लेकिन वह किसी वकील को वह खुलासा करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता जिसे कानून स्पष्ट रूप से बचाता है। जस्टिस कृष्णा ने आगे कहा कि धारा 126 IEA के प्रावधान को लागू करने के लिए, यह सुझाव देने के लिए प्रथम दृष्टया सबूत होने चाहिए कि संचार ही किसी अवैध उद्देश्य के लिए था।
हाईकोर्ट ने ये फ़ैसले सुनाते हुए सेशंस कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें फ़ास्ट-फ़ूड कंपनी मैकडॉनल्ड्स का प्रतिनिधित्व कर रहे वकीलों को यह बताने का निर्देश दिया गया था कि कुछ दस्तावेज़ उनके पास कैसे आए।
सेशंस कोर्ट ने वकीलों से 2011 के उन आवेदनों की तारीख, समय और स्रोत बताते हुए हलफ़नामे दाखिल करने को कहा था, जिन पर रिवीजन की कार्यवाही के दौरान भरोसा किया गया था। यह निर्देश शिकायतकर्ता के उन आरोपों के बाद दिया गया था कि दस्तावेज़ अवैध रूप से हासिल किए गए थे या चुपके से रिकॉर्ड में रखे गए थे।
मामले पर विचार करने के बाद, हाई कोर्ट ने आदेश को रद्द कर दिया।
सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ अग्रवाल और वकील स्तुति गुजराल, विश्वजीत सिंह भाटी, तस्नीमुल हसन, प्रीति वर्मा और विपिन कुमार मैकडॉनल्ड्स की ओर से पेश हुए।
राज्य की ओर से वकील अमोल सिन्हा, क्षितिज गर्ग, अश्विनी कुमार, नीतीश धवन, छवि लाजरस, मनन वधवा और लव महाजन पेश हुए।
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