दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि वह चार हफ़्ते के अंदर पब्लिक प्रॉसिक्यूटर की उस याचिका पर फ़ैसला करे जिसमें आधार-आधारित बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम को चुनौती दी गई है [दिल्ली प्रॉसिक्यूटर्स वेलफ़ेयर एसोसिएशन बनाम दिल्ली सरकार और अन्य]।
जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने 17 अगस्त को दिल्ली प्रॉसिक्यूटर्स वेलफेयर एसोसिएशन की याचिका पर विचार करते हुए ये निर्देश जारी किए। इस याचिका में दिल्ली सरकार के उन सर्कुलर को रद्द करने की मांग की गई थी, जिनमें सरकारी वकीलों (पब्लिक प्रॉसिक्यूटर्स) की बायोमेट्रिक अटेंडेंस दर्ज करना ज़रूरी किया गया था।
याचिकाकर्ता-एसोसिएशन ने दो सर्कुलर को चुनौती दी, जिनमें सरकारी वकीलों के लिए आधार-आधारित बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम (AEBAS) को अनिवार्य रूप से लागू करने की बात कही गई थी।
एसोसिएशन ने कहा कि सरकारी वकील कोर्ट के अधिकारी होते हैं और उन्हें अपनी ड्यूटी के दौरान अलग-अलग कोर्ट, पुलिस स्टेशनों और दूसरी जगहों पर जाना पड़ता है।
यह तर्क दिया गया कि बायोमेट्रिक सिस्टम व्यावहारिक नहीं है और वकीलों की मौजूदगी कोर्ट के रिकॉर्ड और कार्यवाही में दर्ज होती है।
यह भी कहा गया कि इस सिस्टम को चुनौती देते हुए सरकार को पहले दी गई उनकी अर्जी पर विचार किए बिना ही बायोमेट्रिक अटेंडेंस लागू कर दी गई।
एसोसिएशन ने सरकारी वकीलों के काम और ड्यूटी की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए कोर्ट-केंद्रित अटेंडेंस सिस्टम की मांग की।
कोर्ट ने सरकारी वकीलों की याचिका को दिल्ली सरकार के संबंधित अधिकारियों के पास एक अर्जी के तौर पर भेजने का निर्देश दिया और राज्य सरकार से कहा कि वह 17 अगस्त से चार हफ़्ते के भीतर इस मामले पर फैसला ले।
कोर्ट ने निर्देश दिया, "यह कोर्ट उचित समझता है कि इस कोर्ट में दायर मौजूदा याचिका को याचिकाकर्ता की ओर से एक अर्जी माना जाए, और प्रतिवादियों को निर्देश दिया जाता है कि वे याचिकाकर्ता को व्यक्तिगत सुनवाई का मौका देने के बाद, इस तारीख से चार हफ़्ते के भीतर इस पर फैसला लें और याचिकाकर्ता को इसकी जानकारी दें।"
मामले का निपटारा करते हुए, कोर्ट ने एसोसिएशन को आगे कोई शिकायत होने पर फिर से कोर्ट आने की छूट भी दी।
एसोसिएशन की ओर से वकील कृष्ण कुमार, राजेश मिश्रा और अनुभव कुमार पेश हुए।
दिल्ली सरकार की ओर से स्टैंडिंग काउंसिल अवनीश अहलावत और वकील नितेश कुमार सिंह, अलीज़ा आलम और मोहनीश सहरावत पेश हुए।
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Delhi HC directs State to decide public prosecutors' challenge to biometric attendance system