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दिल्ली हाईकोर्ट ने ईसाइयो के लिए दफ़नाने की जगह की कमी के मुद्दे पर दायर जनहित याचिका पर राज्य सरकार और MCD से जवाब मांगा

कोर्ट ने कहा कि दिल्ली म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन एक्ट के तहत, MCD के कामों में से एक काम मृतकों के अंतिम संस्कार के लिए बनी जगहों को रेगुलेट और उनकी देखभाल करना है।

Bar & Bench

दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को दिल्ली सरकार, म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ऑफ़ दिल्ली (MCD) और दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी (DDA) को एक याचिका पर नोटिस जारी किया। इस याचिका में ईसाइयों के लिए कब्रिस्तान और दफ़नाने की जगहों की कमी का मुद्दा उठाया गया था।

चीफ़ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की डिवीज़न बेंच ने कहा कि दिल्ली म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन एक्ट के तहत, MCD के कामों में से एक काम मरे हुए लोगों के अंतिम संस्कार के लिए बनी जगहों को रेगुलेट करना और उनकी देखभाल करना है।

कोर्ट ने कहा, "इसलिए, ऐसा लगता है कि MCD के मुख्य कामों में से एक काम ऐसी जगहों का इंतज़ाम करना है जहाँ शहर के लोग अंतिम संस्कार कर सकें, जैसे कि दफ़नाने की जगहें और कब्रिस्तान।"

इसलिए, कोर्ट ने MCD को आदेश दिया कि वह अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले ईसाई कब्रिस्तानों/दफ़नाने की जगहों और इस काम के लिए उपलब्ध जगह की जानकारी दे।

इस मामले की अगली सुनवाई 4 नवंबर को होगी।

Chief Justice Devendra Kumar Upadhyaya and Justice Tejas Karia

कोर्ट ने 'लीगल क्रिश्चियंस एक्शन कमेटी' (याचिकाकर्ता) की ओर से दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।

याचिकाकर्ता ने अधिकारियों से मांग की कि वे राष्ट्रीय राजधानी में दफनाने की जगहों (कब्रिस्तानों) की भारी कमी को देखते हुए, दिल्ली में ईसाई कब्रिस्तान के लिए उपयुक्त ज़मीन की पहचान करें और उसे आवंटित करें।

याचिका के अनुसार, बुराड़ी, पटेल चेस्ट, पहाड़गंज, मंगोलपुरी और पृथ्वीराज रोड पर मौजूद ईसाई कब्रिस्तान पुराने हो चुके हैं और उनकी क्षमता पूरी भर चुकी है। नतीजतन, परिवारों को कथित तौर पर अपने मृत रिश्तेदारों के शवों को दफनाने के लिए पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों में ले जाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

याचिकाकर्ता ने कहा कि वे जून 2025 से दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) और दिल्ली नगर निगम (MCD) से संपर्क कर रहे हैं, जिसमें लिखित अनुरोध और RTI आवेदन भी शामिल हैं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

इसके अलावा, याचिका में कहा गया है कि DDA ने खजूरी खास, राजीव गांधी अस्पताल के पास और सुंदर नगरी में तीन संभावित जगहों की पहचान की थी। बाद में इनमें से दो जगहों को खारिज कर दिया गया, जबकि खजूरी खास वाली जगह पर प्रक्रिया शुरू की गई। हालांकि, बाद में याचिकाकर्ता को बताया गया कि खजूरी खास की ज़मीन आवंटन के लिए उपलब्ध नहीं है।

हाईकोर्ट में यह जनहित याचिका वकील नागमणि कुमार और अभिनव कुमार के माध्यम से दायर की गई थी।

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Delhi High Court seeks response from State, MCD on PIL flagging lack of burial spaces for Christians