दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को एक सेशंस कोर्ट को बताया कि महिला पहलवानों की ओर से दर्ज कराए गए यौन उत्पीड़न के मामले में पूर्व BJP सांसद और रेसलिंग फेडरेशन ऑफ़ इंडिया (WFI) के पूर्व प्रमुख बृजभूषण के बरी होने के फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील दायर करने का फ़ैसला अभी "प्रक्रियाधीन" है।
हालांकि पहलवान पहले ही 3 अगस्त के ट्रायल कोर्ट के बरी करने के फैसले को चुनौती दे चुके हैं, लेकिन राज्य सरकार ने अभी तक अपनी अपील दायर नहीं की है।अभियोजन पक्ष की ओर से आज वकील मनीष रावत पेश हुए और कहा कि फैसले पर अभी विचार चल रहा है। उन्होंने अभियोजन पक्ष के फैसले के बारे में कोर्ट को जानकारी देने के लिए 15 दिन का समय मांगा।
स्पेशल जज दिग विनय सिंह ने यह अनुरोध स्वीकार कर लिया।
कोर्ट ने बृजभूषण को भी पहलवानों की अपील पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए 28 अक्टूबर तक का समय दिया।
खास बात यह है कि कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले की सुनवाई 'इन-कैमरा' (बंद कमरे में) होगी, जिसका मतलब है कि अब आम जनता और मीडिया को सुनवाई में शामिल होने की अनुमति नहीं होगी।
यह मामला छह महिला पहलवानों द्वारा सिंह पर लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों से जुड़ा है। उनकी शिकायतों के आधार पर, पुलिस ने सांसद के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की थी।
15 जून 2023 को, पुलिस ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं 354 (महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाना), 354A (यौन प्रकृति की टिप्पणी), 354D (पीछा करना) और 506(1) (आपराधिक धमकी) के तहत अपराधों के लिए सिंह के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।
ट्रायल कोर्ट ने 10 मई 2024 को पांच महिला पहलवानों के उत्पीड़न के मामले में सिंह पर यौन उत्पीड़न और महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने के आरोप तय किए।
हालांकि, 3 अगस्त 2026 को ट्रायल कोर्ट ने सिंह और तोमर दोनों को इस मामले में बरी कर दिया।
ट्रायल कोर्ट ने कहा कि मामला "झूठा और मनगढ़ंत" था और ऐसा लगता है कि यह "राजनीतिक" कारणों से प्रेरित था। कोर्ट ने पाया कि सिंह के खिलाफ आरोप पहले से तैयार किए गए, अच्छी तरह से अभ्यास किए गए और प्रायोजित (प्लांटेड) लगते हैं, खासकर तब जब शिकायतें काफी समय बाद दर्ज की गई थीं।
कोर्ट ने माना कि 2023 में पहलवानों के धरने पर बैठने से पहले, PW 5 (महिला पहलवानों में से एक) द्वारा सिंह के खिलाफ यौन उत्पीड़न का कोई आरोप नहीं लगाया गया था और "किसी भी ऐसी महिला पहलवान का नाम नहीं लिया गया था जिसने कथित यौन उत्पीड़न का सामना किया हो"।
ट्रायल कोर्ट ने कहा, "इसके बाद चुनी गई महिला पहलवान सामने आईं और उन्हीं आरोपों को बहुत सजा-धजाकर और खास तौर पर तैयार की गई औपचारिक शिकायतों में शामिल किया गया; फिर 21 अप्रैल 2023 को पुलिस के सामने ये शिकायतें दर्ज कराई गईं।"
कोर्ट ने यह भी गौर किया कि सिंह पर लगाए गए आरोप कई साल पुराने हैं और पीड़ित महिलाएं इतने सालों तक चुप रहीं।
कोर्ट ने कहा कि कथित घटनाओं के बाद भी पीड़ित महिलाओं ने सिंह के साथ अच्छे संबंध बनाए रखे और उन्हें पारिवारिक कार्यक्रमों व शादी-ब्याह में बुलाया।
पहलवानों ने इस फैसले को सेशंस कोर्ट में चुनौती दी है।
उनकी अपील के मुताबिक, ट्रायल कोर्ट का आदेश "अटकलों और अनुमानों" पर आधारित है और इसका तर्क यौन उत्पीड़न और छेड़छाड़ की शिकार महिलाओं के "अपेक्षित" व्यवहार के बारे में "पुरानी और रूढ़िवादी धारणाओं" पर टिका है।
याचिका के अनुसार, ट्रायल कोर्ट ने छोटी-मोटी और गैर-जरूरी गलतियों पर ही ध्यान दिया और गवाहों के समर्थन वाली पूरी तस्वीर को देखने के बजाय उन्हीं गलतियों के आधार पर सिंह के खिलाफ मामला पूरी तरह खारिज कर दिया।
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