SIR in Delhi  
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दिल्ली SIR: सुप्रीम कोर्ट ने ECI द्वारा जारी यांत्रिक नोटिसो पर सवाल उठाते हुए तार्किक विसंगतियो के संबंध मे स्पष्टीकरण मांगा

कोर्ट ने यह भी सुझाव दिया कि ECI प्रभावित मतदाताओं की मदद के लिए FAQ जारी कर सकता है।

Bar & Bench

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें दिल्ली में वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' (SIR) के तरीके पर सवाल उठाए गए हैं।

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच ने आज इस मामले पर सुनवाई की। उन्होंने इस बात पर ध्यान दिया कि 'संदिग्ध' (doubtful) लिस्ट में शामिल वोटरों को भेजे गए SIR नोटिस में पर्याप्त कारण या जानकारी नहीं थी।

सुनवाई के दौरान, जस्टिस बागची ने कहा कि कुछ SIR नोटिस बिना सोचे-समझे (यांत्रिक रूप से) जारी किए गए लगते हैं।

उन्होंने कहा, "लगभग बिना सोचे-समझे नोटिस जारी किए जा रहे हैं। पूरी संभावना है कि ये मशीन से बने नोटिस हैं। इसलिए कृपया जांचें कि क्या नोटिस भेजने से पहले कुछ और फिल्टर लगाने की ज़रूरत है।"

CJI कांत ने कहा कि इस बात को स्पष्ट करने की गुंजाइश है कि SIR नोटिस में वोटरों के खिलाफ बताई गई 'लॉजिकल विसंगतियों' (logical discrepancies) के बारे में उनसे क्या जानकारी मांगी जा रही थी।

उन्होंने कहा, "उस 'लॉजिकल विसंगति' के बारे में आपको स्पष्ट करना होगा। उदाहरण के लिए, मुझे नोटिस मिल सकता है। पदोन्नति के बाद मैं मई 2019 में दिल्ली आ गया था। उससे पहले, मैं चंडीगढ़ में वोट डालता था। आपका लॉजिकल विसंगति वाला नोटिस मुझसे पूछ सकता है कि 2019 में मैं दिल्ली में वोट डाल रहा था या चंडीगढ़ में, या कहीं और। हो सकता है आपको पता न हो कि मैं चंडीगढ़ में था। आप कह सकते हैं 'दिल्ली या कहीं और, स्पष्ट करें।' इसलिए व्यक्ति को बताया जाना चाहिए कि उसे क्या स्पष्ट करना है।"

CJI Surya Kant, Justice Joymalya Bagchi, Justice V Mohana

उन्होंने प्रभावित वोटरों के फ़ायदे के लिए बूथ लेवल ऑफ़िसर्स (BLOs) को उनसे ज़्यादा बातचीत करने के लिए संवेदनशील बनाने की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया।

CJI कांत ने सुझाव दिया, "हम अब यह सुझाव दे रहे हैं कि BLO को बस उस व्यक्ति की मदद करनी चाहिए। उन्हें उनसे संपर्क करना चाहिए और बताना चाहिए कि, देखिए, आपका सर्टिफ़िकेट यहाँ है, या शायद 2002 की पुरानी वोटर लिस्ट में भी नाम का ज़िक्र है।"

कोर्ट ने आगे कहा कि भारत का चुनाव आयोग (ECI) उन आम सवालों की एक लिस्ट जारी कर सकता है जो वोटरों के मन में इस प्रक्रिया को लेकर हो सकते हैं।

CJI कांत ने सुझाव दिया, "शायद 10 से 15 सवाल या आपत्तियाँ। आप उनके लिए एक स्टैंडर्ड जवाब तैयार कर सकते हैं और हम सभी को भेज सकते हैं। जैसे FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)। इसे अख़बारों में छापें, वेबसाइट पर डालें, अपनी म्युनिसिपैलिटी से कहें, अपने BLOs से कहें। और जहाँ भी मोबाइल नंबर हों (उन अधिकारियों के जिनसे और शक होने पर संपर्क किया जा सके), वहाँ भेजें। इतनी जानकारी भी काफ़ी होगी। इससे लोगों को बहुत मदद मिलेगी।"

इसके बाद कोर्ट ने दिल्ली SIR से जुड़ी याचिका पर ECI से औपचारिक रूप से जवाब माँगने के लिए नोटिस जारी किया।

कोर्ट ने आदेश दिया, "नोटिस जारी करें। जवाब में अब तक उठाए गए तुरंत कदमों का भी ज़िक्र हो। दो हफ़्ते बाद सुनवाई के लिए लिस्ट करें।"

कोर्ट ने ECI की इस बात पर भी ध्यान दिया कि दिल्ली SIR प्रक्रिया में पाई गई किसी भी कमी को ठीक करने के लिए अभी समय है, क्योंकि राजधानी में निकट भविष्य में कोई चुनाव नहीं होने वाला है।

CJI कांत ने टिप्पणी की, "दिल्ली में निकट भविष्य में अब कोई चुनाव नहीं है।"

कोर्ट के सामने पेश याचिका में ख़ास तौर पर दिल्ली में चल रहे SIR के दौरान वोटरों को भेजे जा रहे "लॉजिकल विसंगति" (logical discrepancy) वाले नोटिसों को लेकर चिंता जताई गई।

ये नोटिस वोटर के पुराने रिकॉर्ड में पाई गई विसंगतियों की ओर इशारा करते हैं और अगर इनका कोई स्पष्टीकरण न दिया जाए, तो वोटर का नाम संशोधित वोटर लिस्ट से हटाया जा सकता है।

याचिका में कहा गया है कि जिन वोटरों को ऐसे नोटिस भेजे जा रहे हैं, उनकी जानकारी और जिन वोटरों के रिकॉर्ड में "लॉजिकल विसंगतियाँ" पाई गई हैं, उन्हें चिह्नित करने के लिए इस्तेमाल किए गए मानदंडों का खुलासा किया जाना चाहिए।

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Delhi SIR: Supreme Court flags mechanical notices by ECI; seeks clarity on logical discrepancies