ACP Manasvi Vashishta  
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याचिका दायर करे:वकीलो को धमकी के मामले मे ACP मनस्वी वशिष्ठ के खिलाफ स्वतः संज्ञान लेकर मामला दर्ज करने से दिल्ली HC का इनकार

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव साम्ब्रे ने वकीलों को आश्वासन दिया कि याचिका दायर होने के बाद इस मामले पर गौर किया जाएगा।

Bar & Bench

दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को दिल्ली पुलिस अधिकारी मनस्वी वशिष्ठ द्वारा वकीलों को दी गई कथित धमकियों का स्वतः संज्ञान लेने से इनकार कर दिया।

एक वीडियो में वशिष्ठ को वकीलों के खिलाफ टिप्पणी करते और "काले कोट वाले गुंडों" को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी देते हुए देखा गया।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश (ACJ) नितिन वासुदेव सांबरे और न्यायमूर्ति संजय शर्मा की खंडपीठ ने वकीलों से एक औपचारिक याचिका दायर करने को कहा और भरोसा दिलाया कि इस मामले पर गौर किया जाएगा।

वकीलों के एक समूह ने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के सामने यह मामला उठाया था।

वकीलों ने अदालत को बताया कि उनके खिलाफ AK47 के इस्तेमाल और "काले कोट वाले गुंडे" जैसी टिप्पणियां की गई हैं।

वकीलों ने आज खंडपीठ से कहा, "आप [कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश] हमारे मुखिया हैं। यदि आप स्वतः संज्ञान (suo motu cognisance) लेते हैं, तो हमें तसल्ली होगी।"

हालांकि, अदालत ने वकीलों से एक औपचारिक याचिका दायर करने को कहा और भरोसा दिलाया कि अदालत इसे सूचीबद्ध (लिस्ट) करने का निर्देश देगी और इस मामले को देखेगी।

अदालत ने वकीलों से कहा, "आप एक औपचारिक याचिका दायर करें। हम इस पर गौर करेंगे। हम इसे सूचीबद्ध करने का आदेश देंगे। इसकी एक प्रति स्टैंडिंग काउंसिल (क्रिमिनल) संजय लाओ को दे दें। मैं आपको भरोसा दिलाता हूं कि हम इस मामले को देखेंगे। आप अपना पक्ष रखें, लेकिन साथ ही एक औपचारिक याचिका भी दायर करें।"

Acting Chief Justice Nitin Wasudeo Sambre, Justice Sanjay Sharma

ACP मनस्वी वशिष्ठ और दिल्ली के वकीलों के बीच विवाद तब शुरू हुआ, जब 23 अक्टूबर को कथित मारपीट के दौरान वकील ललित बंसल के सिर में गंभीर चोट लग गई।

इसके बाद वकील शाहदरा पुलिस स्टेशन गए। उनका आरोप था कि वशिष्ठ और स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा, लेकिन बाद में उन्हें छोड़ दिया गया।

जब वकील पुलिस की इस कार्रवाई पर सवाल पूछने वापस गए, तो आरोप है कि वशिष्ठ ने अपनी रिवॉल्वर निकाली और उन्हें धमकी दी। इस घटना के बाद जिला अदालत के वकीलों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

28 अक्टूबर को वशिष्ठ और SHO अरुण कुमार का तबादला कर दिया गया, जिसके बाद वकीलों ने अपनी हड़ताल खत्म कर दी।

विवाद तब और बढ़ गया जब 2 नवंबर को ACP वशिष्ठ और दिल्ली पुलिस के कुछ कर्मियों ने तबादलों के विरोध में पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन के दौरान वकीलों के बारे में कुछ टिप्पणियां भी की गईं।

अब गृह मंत्रालय (MHA) ने वशिष्ठ को सस्पेंड कर दिया है।

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File a petition: Delhi High Court refuses suo motu case against ACP Manasvi Vashishtha for threats to lawyers