Vijay Mallya and Bombay High Court  
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क्या विजय माल्या की संपत्ति का इस्तेमाल करके उनका कर्ज़ चुका दिया गया है? बॉम्बे हाईकोर्ट ने ED और बैंकों से पूछा

जस्टिस मिलिंद जाधव ने यह निर्देश तब जारी किया जब माल्या के वकील ने दावा किया कि ED द्वारा ज़ब्त की गई उनकी संपत्तियों से मिले पैसे का इस्तेमाल करके कर्ज़ चुका दिए गए हैं।

Bar & Bench

बॉम्बे हाईकोर्ट ने 12 अगस्त को स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया (SBI) और एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) से यह पता लगाने और पुष्टि करने को कहा कि क्या भगोड़े बिज़नेसमैन विजय माल्या के कर्ज़ और देनदारियों को उनकी उन चल संपत्तियों (movable properties) का इस्तेमाल करके चुका दिया गया है, जिन्हें ED ने ज़ब्त किया था [विजय विट्ठल माल्या बनाम स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया और अन्य]।

जस्टिस मिलिंद जाधव ने यह निर्देश तब जारी किया जब माल्या के वकील ने दावा किया कि ED द्वारा ज़ब्त की गई उनकी संपत्तियों से मिले पैसे का इस्तेमाल करके कर्ज़ चुका दिए गए हैं।

Justice Milind Jadhav

कोर्ट, 2019 में एक स्पेशल कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए माल्या की ओर से 2020 में दायर एक क्रिमिनल याचिका पर सुनवाई कर रहा था।

माल्या पर मनी लॉन्ड्रिंग और अपनी बंद हो चुकी किंगफिशर एयरलाइंस को दिए गए कुल ₹9,000 करोड़ के बैंक लोन में से कम से कम ₹3,500 करोड़ की हेराफेरी करने का आरोप है।

ED ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत कार्रवाई शुरू की और 2016 में उसकी संपत्तियों को अस्थायी रूप से ज़ब्त कर लिया।

2019 में, एक स्पेशल कोर्ट ने SBI और लोन देने वाले दूसरे बैंकों को कर्ज की वसूली के लिए माल्या की ED द्वारा ज़ब्त की गई चल संपत्तियों का इस्तेमाल करने की इजाज़त दी। इन संपत्तियों में यूनाइटेड ब्रेवरीज होल्डिंग्स लिमिटेड (UBHL) के शेयर शामिल थे।

माल्या ने 2020 में हाईकोर्ट में इसे चुनौती दी।

हालांकि यह याचिका जनवरी 2020 में दायर की गई थी, लेकिन हाईकोर्ट ने इस पर पहली बार इस साल 12 अगस्त को सुनवाई की।

माल्या की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट अमित देसाई ने कहा कि बाद की घटनाओं के कारण 2020 की याचिका असल में बेकार हो गई है। उन्होंने तर्क दिया कि ED ने तब से लोन चुकाने के लिए उन संपत्तियों से पैसा वसूल कर लिया है।

Amit Desai

ऑर्डर में कहा गया है, "उन्होंने ज़ोर देकर कहा है कि माल्या की सिविल देनदारियों का निपटारा हो चुका है। उन्होंने बताया कि बैंकों के कंसोर्टियम ने एप्लिकेंट से लगभग ₹15,000 करोड़ वसूल किए हैं, जबकि ब्याज सहित मूल दावा ₹6,203 करोड़ के आसपास था।"

हालांकि, जस्टिस मिलिंद जाधव ने इस बात पर ज़ोर दिया कि आगे की कार्रवाई तय करने से पहले इन दावों की सीधे कानूनी प्रवर्तन अधिकारियों से पुष्टि की जानी चाहिए।

कोर्ट ने कहा, "इस समय केवल SBI (लीड बैंक) और डिप्टी डायरेक्टर, डायरेक्टरेट ऑफ़ एनफोर्समेंट को नोटिस जारी करना उचित होगा, ताकि उन्हें देसाई द्वारा दी गई जानकारी और मामले में आगे की प्रगति के बारे में बताया जा सके।"

कोर्ट ने अपना रुख़ साफ़ तौर पर स्पष्ट किया।

कोर्ट ने कहा, "रेस्पॉन्डेंट नंबर 13 की बात सुनने के बाद ही यह कोर्ट इस एप्लीकेशन पर आगे की कार्रवाई तय करेगा और अन्य रेस्पॉन्डेंट्स को नोटिस जारी करने पर विचार करेगा।"

जस्टिस जाधव ने माल्या को एक अतिरिक्त हलफ़नामा (एफ़िडेविट) दाखिल करने की भी अनुमति दी, जिसमें 2020 में पहली बार एप्लीकेशन दाखिल होने के बाद से हुई प्रगति का विवरण हो।

इस याचिका पर अगली सुनवाई 9 सितंबर को होने की संभावना है।

माल्या की ओर से वकील रश्मिन जैन के साथ देसाई पेश हुए।

राज्य की ओर से एडिशनल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर राजश्री वी न्यूटन पेश हुईं।

[ऑर्डर पढ़ें]

Vijay_Vittal_Mallya_v__State_Bank_of_India___Ors.pdf
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Have Vijay Mallya's debts been cleared using his assets? Bombay High Court asks ED, banks