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NEET प्रश्नपत्र और उत्तरों का खुलासा परीक्षा की निष्पक्षता को कैसे प्रभावित करेगा? सुप्रीम कोर्ट ने NBEM से पूछा

NBEM ने आज तर्क दिया कि अगर साल-दर-साल प्रश्न-पत्र उजागर होते रहे, तो समय के साथ ऐसे और भी डॉक्टर परीक्षा पास कर लेंगे जिन्होंने केवल रटकर उत्तर याद किए हैं।

Bar & Bench

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) से स्पष्टीकरण मांगा कि वह 'नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट पोस्ट ग्रेजुएट' (NEET PG) परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों के प्रश्नों और उनके द्वारा दिए गए उत्तरों का केवल सीमित खुलासा करने पर क्यों जोर दे रहा है।

न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने इस पर लिखित जवाब मांगा है कि उम्मीदवारों को प्रश्न पत्र की एक प्रति अपने पास रखने की अनुमति देने से परीक्षा की शुचिता (integrity) कैसे प्रभावित हो सकती है।

अदालत ने NBEM के वकील से कहा, "लिखित दलीलें पेश करें और बताएं कि प्रश्नों का खुलासा होने से NEET PG परीक्षा की शुचिता पर क्या असर पड़ सकता है।"

Justice PS Narasimha and Justice Alok Aradhe

अदालत NEET-PG परीक्षाओं से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। इनमें एक याचिका ऐसी भी थी, जिसमें NEET-PG 2026 में अधिक पारदर्शिता की मांग की गई है। इसके तहत प्रश्न पत्र, उत्तर कुंजी (आंसर की) और उम्मीदवारों द्वारा दिए गए जवाबों को सार्वजनिक करने की अपील की गई है।

यह याचिका डॉक्टरों और NEET-PG के उम्मीदवारों ने NBEMS द्वारा जारी एक नोटिस के खिलाफ दायर की थी। इस नोटिस में कहा गया था कि वे परीक्षा के दौरान उम्मीदवारों द्वारा हल किए गए वास्तविक प्रश्नों को दिखाने के बजाय, केवल 'प्रश्न ID नंबर' के जरिए उत्तर कुंजी और उम्मीदवारों के जवाब दिखाएंगे।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इस तरीके से जानकारी देने पर उम्मीदवार यह नहीं देख पाते कि उन्होंने असल में कौन-से प्रश्न हल किए थे। ऐसा इसलिए है क्योंकि अलग-अलग उम्मीदवारों को प्रश्न पत्रों के अलग-अलग सेट दिए जाते हैं।

चूंकि परीक्षा में प्रश्न और उनके विकल्प आगे-पीछे (shuffled) करके दिए जाते हैं, इसलिए उम्मीदवार अपने दिए गए जवाबों को सही प्रश्नों के साथ ठीक से मिला नहीं पाते। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि जानकारी देने का यह मौजूदा तरीका परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य को ही खत्म कर देता है।

याचिका के अनुसार, केवल 'प्रश्न ID' दिखाने से पारदर्शिता का दावा बेमानी हो जाता है और इसे सत्यापित (verify) भी नहीं किया जा सकता।

याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि यह तरीका JEE, CLAT और AIIMS INI-CET जैसी अन्य राष्ट्रीय परीक्षाओं के नियमों के खिलाफ है। उन परीक्षाओं में, उम्मीदवार के अनुसार उनकी 'रिस्पॉन्स शीट' (जवाबों की सूची) जारी की जाती है, जिसमें वे प्रश्न उसी क्रम में दिखते हैं जिस क्रम में उम्मीदवार ने उन्हें हल किया था।

इसलिए, याचिकाकर्ताओं ने अदालत से निर्देश देने की मांग की है कि उम्मीदवारों को उनके द्वारा हल किए गए प्रश्न, उनके दिए गए जवाब, सही उत्तर और मिले हुए अंक - सब कुछ स्पष्ट रूप से दिखाया जाए।

NBEMS की वकील, नीमा ने आज मौजूदा सिस्टम का बचाव करते हुए तर्क दिया कि अगर सभी प्रश्न सार्वजनिक कर दिए गए, तो भविष्य में NEET उम्मीदवारों की योग्यता (merit) को परखने के तरीके पर बुरा असर पड़ सकता है।

उन्होंने कहा, "NEET-PG के लिए यह एक 'क्वेश्चन बैंक' (प्रश्नों का भंडार) है। यह गणित नहीं है। ये विज्ञान के विषय हैं, जहाँ एक निश्चित प्रश्न का एक निश्चित उत्तर होता है। प्रश्नों की संख्या बहुत सीमित है। अगर हम हर साल इन्हें सार्वजनिक करते रहे, तो अगले 5-6 सालों में हमारे सभी प्रश्न कोटा के कोचिंग संस्थानों तक पहुँच जाएंगे। ऐसे में हमें ऐसे डॉक्टर मिलेंगे जिन्होंने केवल रटकर जवाब याद किए हैं। यह एक कठिन परीक्षा है। हम उनकी समझ और योग्यता को परखना चाहते हैं, क्योंकि आगे चलकर वे जनस्वास्थ्य (public health) से जुड़े मामलों को संभालेंगे।"

हालांकि, अदालत ने कहा कि वह इस दलील से सहमत नहीं है और उसने विस्तृत लिखित जवाब मांगा है।

मामले की सुनवाई स्थगित करने से पहले, जस्टिस नरसिम्हा ने NBEM के वकील से कहा, "पारदर्शिता का क्या होगा?... आप जो कर रहे हैं, उसके बारे में आपको और अधिक स्पष्टीकरण देना होगा। हम पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। आपको हमें यह समझाना होगा कि आपकी स्थिति अन्य परीक्षाओं से किस तरह अलग है।"

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील शिखिल सूरी पेश हुए।

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How will disclosure of NEET question paper and answers compromise exam's integrity? Supreme Court asks NBEM