जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने हाल ही में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेशों में 2009-10 से एनरोल हुए सभी वकीलों के लिए वकालत करने के योग्य होने के लिए 'ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन' (AIBE) पास करना अनिवार्य कर दिया है।
हालांकि बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया (BCI) ने 2009-10 से लॉ ग्रेजुएट के लिए AIBE को ज़रूरी कर दिया था, लेकिन जम्मू-कश्मीर और लद्दाख बार काउंसिल में एनरोल हुए वकीलों के लिए इसे औपचारिक रूप से लागू नहीं किया गया था।
अब जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट ने इसे लागू करने का निर्देश दिया है।
हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल MK शर्मा ने 10 अक्टूबर, 2026 को इस बारे में एक नोटिफिकेशन जारी किया।
नोटिफिकेशन में कहा गया है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख बार काउंसिल में वकील के तौर पर एनरोल हुए लॉ ग्रेजुएट, जिन्होंने 2009-2010 या उसके बाद के एकेडमिक ईयर में ग्रेजुएशन किया है, उन्हें AIBE पास करना होगा, अगर उन्होंने पहले ही यह परीक्षा पास नहीं की है।
नए लॉ ग्रेजुएट और प्रोविज़नल तौर पर एनरोल हुए वकीलों को AIBE पास करने और दो साल के अंदर बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया द्वारा जारी 'सर्टिफिकेट ऑफ़ प्रैक्टिस' (COP) दिखाने के बाद ही एनरोलमेंट का पक्का सर्टिफिकेट दिया जाएगा।
1 जुलाई, 2010 के बाद जम्मू-कश्मीर और लद्दाख बार काउंसिल में एनरोल हुए वकील, जिन्होंने पहले ही AIBE पास कर लिया है, उन्हें एक महीने के अंदर हाई कोर्ट रजिस्ट्री में अपने 'सर्टिफिकेट ऑफ़ प्रैक्टिस' की कॉपी जमा करने का निर्देश दिया गया है।
यह फ़ैसला फ़ुल कोर्ट के 8 अक्टूबर के उस फ़ैसले के बाद लिया गया है जिसमें नियमों की एक कमेटी की 19 अगस्त की सिफ़ारिश को मंज़ूरी दी गई थी। इस सिफ़ारिश में AIBE से जुड़े बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया के नियमों के चैप्टर III, पार्ट VI के नियम 9, 10 और 11 को लागू करने की बात कही गई थी।
BCI के नियम 9 के अनुसार, वकीलों को 'एडवोकेट्स एक्ट, 1961' के चैप्टर IV के तहत प्रैक्टिस करने के लिए AIBE पास करना ज़रूरी है। नियम 11 में सफल उम्मीदवारों को 'सर्टिफिकेट ऑफ़ प्रैक्टिस' जारी करने का प्रावधान है।
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Jammu and Kashmir High Court makes AIBE mandatory for advocates enrolled since 2009-10