केरल हाई कोर्ट ने हाल ही में 'बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण' (POCSO) अधिनियम के तहत मामलों की सुनवाई करने वाली अदालतों में अपर्याप्त सुविधाओं को लेकर चिंता जताई है [डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन और अन्य बनाम केरल राज्य और अन्य]।
चीफ़ जस्टिस सौमेन सेन और जस्टिस श्याम कुमार VM की डिवीज़न बेंच ने अदालतों का दौरा किया और पाया कि उनमें से ज़्यादातर POCSO एक्ट के तहत तय गाइडलाइंस का पालन नहीं कर रही थीं।
23 सितंबर को एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए, कोर्ट ने राज्य सरकार को ऐसी अदालतों को POCSO गाइडलाइंस के मुताबिक बनाने के लिए तुरंत कदम उठाने का निर्देश दिया।
कोर्ट ने कहा, "ज़िला अदालतों के दौरे के दौरान, हमने पाया कि ज़्यादातर POCSO अदालतें POCSO एक्ट के तहत बताई गई गाइडलाइंस का पालन नहीं करती हैं। वहाँ सुविधाएँ भी अपर्याप्त हैं।"
इसलिए, कोर्ट ने राज्य सरकार को ऐसी अदालतों को POCSO गाइडलाइंस के मुताबिक बनाने के लिए तुरंत कदम उठाने का निर्देश दिया।
बेंच ने रजिस्ट्रार (ज़िला न्यायपालिका) को एक हलफ़नामा दाखिल करने का भी निर्देश दिया, जिसमें केरल में POCSO मामलों से निपटने के लिए ज़रूरी अतिरिक्त अदालतों की संख्या बताई जाए।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, "हलफ़नामे में उन अदालतों का ज़िक्र होना चाहिए जो POCSO मामलों की सुनवाई तो कर रही हैं, लेकिन POCSO गाइडलाइंस का पालन नहीं कर रही हैं। यह पक्का करने के लिए तुरंत कदम उठाए जाने चाहिए कि वे अदालतें POCSO गाइडलाइंस का पालन करें, और अगर जगह की कोई कमी है, तो राज्य सरकार को गाइडलाइंस के मुताबिक POCSO अदालतों के कामकाज के लिए सभी ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर वाले उपयुक्त कमरे उपलब्ध कराने चाहिए।"
कोर्ट, डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन की ओर से दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें राज्य में POCSO कोर्ट के कामकाज के बारे में चिंता जताई गई थी।
सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश सीनियर वकील रंजीत थंपन ने POCSO कोर्ट के लिए खास तौर पर पब्लिक प्रॉसिक्यूटर नियुक्त करने का मुद्दा उठाया।
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का हवाला दिया जिसमें राज्यों को POCSO मामलों के लिए बनाए गए खास कोर्ट में खास पब्लिक प्रॉसिक्यूटर नियुक्त करने का निर्देश दिया गया था। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस ज़रूरत को पूरा करने में नाकाम रही है।
हाई कोर्ट ने डायरेक्टर जनरल ऑफ़ प्रॉसिक्यूशन (DGP) टी. आसफ़ अली से कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट के फैसले के पैरा 10 में दिए गए निर्देशों पर विचार करें। इन निर्देशों में ऐसे प्रॉसिक्यूटर के लिए कानून, बाल मनोविज्ञान, बच्चों के व्यवहार, स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों आदि में खास ट्रेनिंग की बात कही गई थी। साथ ही, कोर्ट ने उनसे अगली सुनवाई में इस मुद्दे पर अपनी बात रखने को कहा।
इस मामले की अगली सुनवाई 14 अक्टूबर को होगी।
[ऑर्डर पढ़ें]
और अधिक पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें
Kerala High Court flags poor facilities in POCSO courts after judges visit; asks State to act