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केरल हाईकोर्ट ने पूर्व डीजीपी टोमिन थाचंकारी द्वारा आधिकारिक प्रतीक-चिह्न का निरंतर उपयोग किए जाने पर उन्हें नोटिस जारी किया

जस्टिस जी गिरीश ने राज्य को इस मामले में निर्देश लेने का भी आदेश दिया।

Bar & Bench

केरल हाईकोर्ट ने सोमवार को पूर्व डायरेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस (DGP) टॉमिन जे. थाचनकारी को एक याचिका पर नोटिस जारी किया। यह याचिका उनके रिटायर होने के बाद भी अपनी निजी गाड़ी पर आधिकारिक 'सिल्वर स्टार' DGP का निशान (insignia) इस्तेमाल करते रहने के मामले में दायर की गई थी [CT मुनीर बनाम केरल राज्य और अन्य]।

जस्टिस जी गिरीश ने राज्य को इस मामले में निर्देश लेने का भी आदेश दिया।

Justice G Girish

यह याचिका एक्टिविस्ट CT मुनीर ने दायर की थी। इसमें थामारासेरी के ज्यूडिशियल फर्स्ट क्लास मजिस्ट्रेट के 14 मई के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें उन्होंने मुनीर की प्राइवेट शिकायत पर विचार करने से इनकार कर दिया था और उसे शुरुआती चरण में ही खारिज कर दिया था।

याचिकाकर्ता के अनुसार, 31 जुलाई, 2023 को DGP पद से रिटायर हुए थाचनकारी रिटायरमेंट के बाद भी अपनी प्राइवेट गाड़ी पर सरकारी 'सिल्वर स्टार' नंबर प्लेट का इस्तेमाल कर रहे थे।

यह नंबर प्लेट मौजूदा DGP के लिए होती है।

याचिकाकर्ता ने बताया कि 22 अप्रैल को एक पत्रकार ने कथित तौर पर थाचनकारी को कोट्टायम की विजिलेंस कोर्ट में अपनी प्राइवेट गाड़ी से आते देखा। गाड़ी पर सरकारी निशान लगा था, जिससे वे खुद को मौजूदा पुलिस चीफ के तौर पर दिखा रहे थे और उस पद से जुड़े सम्मान और सुविधाओं का फायदा उठा रहे थे।

उन्होंने दावा किया कि ऐसा व्यवहार भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत किसी और व्यक्ति का रूप धरने (personation) और धोखाधड़ी (cheating) के अपराध की श्रेणी में आता है।

मुक्कम पुलिस और बाद में कोझिकोड के पुलिस सुपरिटेंडेंट से संपर्क करने के बावजूद कोई FIR दर्ज नहीं की गई, जिसके कारण याचिकाकर्ता को मजिस्ट्रेट के सामने प्राइवेट शिकायत दर्ज करानी पड़ी।

हालांकि, मजिस्ट्रेट ने शिकायत खारिज कर दी। उन्होंने कहा कि आरोपों से पहली नज़र में BNS की धारा 204 (सरकारी कर्मचारी का रूप धरना) और 319(2) (रूप धरकर धोखाधड़ी करना) के तहत अपराध नहीं बनते।

मजिस्ट्रेट ने कहा कि सिर्फ़ सरकारी DGP का निशान दिखाने से—बिना इस आरोप के कि थाचनकारी ने सरकारी शक्तियों का इस्तेमाल किया या करने की कोशिश की—BNS की धारा 204 के तहत अपराध नहीं बनता।

मजिस्ट्रेट ने आगे कहा कि BNS की धारा 319(2) के तहत भी अपराध नहीं बनता, क्योंकि शिकायत में कथित तौर पर खुद को DGP दिखाने से कोई बेईमानी से उकसाने या गलत तरीके से फायदा उठाने की बात सामने नहीं आई।

इसके बाद याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट का रुख किया। उन्होंने तर्क दिया कि मजिस्ट्रेट ने बिना ठीक से जांच किए शिकायत को यांत्रिक तरीके से खारिज कर दिया। उन्होंने यह नहीं देखा कि क्या तथ्यों से कोई संज्ञेय अपराध (cognizable offence) बनता है या क्या जांच का आदेश दिया जाना चाहिए था।

याचिकाकर्ता की ओर से वकील PV अनूप, फिजो प्रदीप फिलिप, जुनैद VS और M अभिजीत कृष्णन पेश हुए।

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Kerala High Court issues notice to ex-DGP Tomin Thachankary over continued use of official insignia