Lakhimpur Kheri, Supreme Court  
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लखीमपुर खीरी हिंसा: सुप्रीम कोर्ट ने आशीष मिश्रा को दिवाली के लिए घर जाने की अनुमति दी

यह राहत उन सख्त शर्तों के अधीन दी गई, जो पहले अदालत के मार्च 2025 के ज़मानत आदेश में तय की गई थीं।

Bar & Bench

सुप्रीम कोर्ट ने 2021 के लखीमपुर खीरी हिंसा मामले के मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा को अपने परिवार के साथ दिवाली मनाने के लिए लखनऊ जिले में अपने गृहनगर जाने की अनुमति दे दी है। यह अनुमति मार्च 2025 के आदेश में लगाई गई शर्तों के अधीन है [आशीष मिश्रा उर्फ ​​मोनू बनाम उत्तर प्रदेश राज्य]।

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत, और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने चल रहे मुकदमे की प्रगति की समीक्षा की। पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि अभियोजन पक्ष को मामले के समय पर निपटारे और निष्पक्ष प्रक्रिया के बीच संतुलन बनाए रखना चाहिए।

CJI ने कहा, "यह सुनिश्चित करना आपका कर्तव्य है कि आपके गवाह मौजूद रहें। मुकदमे को समय पर पूरा होने दें। हम ऐसी जल्दबाजी नहीं चाहते जिससे गवाह, जिरह (क्रॉस-एग्जामिनेशन) या महत्वपूर्ण साक्ष्य छूट जाएं। साथ ही, हम यह भी नहीं चाहते कि मामले में बहुत अधिक देरी हो। अभियोजन पक्ष को यह संतुलन बनाए रखना होगा।"

सुनवाई के दौरान, उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त महाधिवक्ता (एडिशनल एडवोकेट जनरल) ने पीठ को बताया कि मुकदमे के संचालन के लिए एक विशेष लोक अभियोजक (स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर) नियुक्त किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि अभियोजन पक्ष के 131 गवाहों में से 90 से पूछताछ पूरी हो चुकी है, और अब लगभग 41 गवाह बचे हैं।

पीड़ितों की ओर से पेश हुए वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि वे इन घटनाक्रमों से संतुष्ट हैं।

Chief Justice of India Surya Kant and Justices Joymalya Bagchi and V Mohana

यह घटनाक्रम ट्रायल की गति और उसके संचालन को लेकर हुई कड़ी जांच-पड़ताल के बाद सामने आया है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने आशीष मिश्रा को पारिवारिक कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए उनकी जमानत की शर्तों में ढील देने से इनकार कर दिया था, और उनकी आवाजाही पर सख्त पाबंदियां लगाई थीं।

इसके बाद, भूषण ने गवाहों को जल्दबाजी में हटाने, ट्रायल के रिकॉर्ड गायब होने और पीठासीन अधिकारी (जज) के आचरण को लेकर गंभीर चिंताएं जताई थीं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट से कहा कि वह ट्रायल जज के खिलाफ लगे आरोपों की जांच करे और एक अनुभवी सरकारी वकील (पब्लिक प्रॉसिक्यूटर) की नियुक्ति का आदेश दे।

मिश्रा पर हत्या के आरोप हैं। यह मामला 3 अक्टूबर 2021 की उस घटना से जुड़ा है, जिसमें प्रदर्शनकारियों के ऊपर SUV गाड़ियों का काफिला चढ़ जाने से आठ लोगों की मौत हो गई थी। मरने वालों में चार प्रदर्शनकारी किसान और एक पत्रकार शामिल थे।

मिश्रा की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे ने स्पष्ट किया कि पिछले ट्रायल जज का तबादला कोई सजा नहीं थी, बल्कि यह एक सामान्य प्रक्रिया थी। उन्होंने बताया कि न्यायिक अधिकारी से जुड़ी जांच रिपोर्ट, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार आगे की कार्रवाई के लिए हाई कोर्ट की प्रशासनिक समिति के सामने रखी गई है।

इसके बाद दवे ने मिश्रा के लिए एक हफ्ते की छूट मांगी, ताकि वे दिवाली मनाने के लिए लखनऊ जा सकें। उन्होंने तर्क दिया कि पिछले साल भी उन्हें ऐसी ही राहत दी गई थी।

बेंच ने इस मांग को स्वीकार कर लिया:

"याचिकाकर्ता को अपने परिवार के सदस्यों और करीबी रिश्तेदारों के साथ आने वाला दिवाली का त्योहार मनाने के लिए लखनऊ जिले में अपने गृहनगर जाने की अनुमति दी जाती है। यह अनुमति 24 मार्च 2025 के हमारे आदेश के पैराग्राफ 9 में लगाई गई शर्तों के अधीन होगी।"

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Lakhimpur Kheri violence: Supreme Court allows Ashish Mishra to go home for Diwali