अलीपुर की एक अदालत ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा को पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल के खिलाफ कोई भी मानहानिकारक पोस्ट करने से रोक दिया है। यह मामला मतदाता सूची के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) के दौरान मतदाताओं के नाम हटाए जाने से जुड़ा है।
अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि अग्रवाल द्वारा मानहानिकारक बताई गई पोस्ट को 24 घंटे के भीतर हटा दिया जाए। विशेष रूप से, अदालत ने मोइत्रा को अग्रवाल के खिलाफ 'वोट चोर' जैसे शब्दों का इस्तेमाल करने से रोक दिया है।
अदालत ने निर्देश दिया, "प्रतिवादी (मोइत्रा), उनके एजेंट, कर्मचारी और उनकी ओर से काम करने वाले सभी लोगों को वादी (अग्रवाल) के खिलाफ किसी भी तरह का मानहानिकारक बयान प्रकाशित करने, पोस्ट करने, रीपोस्ट करने, साझा करने या दोहराने से रोका जाता है। इसमें 03.10.2026 की पहली पोस्ट और 06.10.2026 की दूसरी पोस्ट से जुड़े बयान भी शामिल हैं। साथ ही, ऐसे किसी भी बयान पर रोक है जिसमें कहा गया हो कि वादी 'वोट चोर' है, उसने 'हर तरह की गैर-कानूनी हरकत' की है, मतदाताओं को अवैध रूप से मताधिकार से वंचित करने के लिए वह 'अकेले जिम्मेदार' है, या उसने किसी 'मालिक' के इशारे पर काम किया है। हालांकि, इस आदेश का मतलब यह नहीं है कि SIR (विशेष पुनरीक्षण) या किसी आधिकारिक फैसले की उचित आलोचना नहीं की जा सकती।"
अदालत ने मोइत्रा को यह छूट दी है कि वे अग्रवाल द्वारा दायर मामले में अपनी लिखित आपत्ति दर्ज करा सकती हैं, या इस आदेश को हटाने, बदलने या रद्द करने के लिए उचित आवेदन दे सकती हैं।
यह विवाद मोइत्रा की सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर अग्रवाल को 'वोट चोर' कहा था। आरोप है कि SIR (विशेष पुनरीक्षण) के दौरान अग्रवाल ने लाखों मतदाताओं को अवैध रूप से उनके मताधिकार से वंचित कर दिया था। अग्रवाल पहले पश्चिम बंगाल में मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) रह चुके हैं।
अग्रवाल ने 9 अक्टूबर को इन पोस्ट को लेकर सांसद को एक कानूनी नोटिस भेजा था, जिसमें बिना शर्त माफी मांगने और मानहानि के लिए 10 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की गई थी। इसके बाद वे अदालत पहुंचे।
अदालत ने अग्रवाल को यह छूट दी है कि अगर मोइत्रा 24 घंटे के भीतर पोस्ट नहीं हटाती हैं, तो वे 'सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021' के नियम 3(1)(d) और 'सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000' की धारा 79(3)(b) के तहत, इन पोस्ट को हटाने के लिए 'X' को अदालत के इस अंतरिम आदेश की जानकारी दे सकते हैं। यह मामला आगे की सुनवाई के लिए 5 जनवरी, 2027 को सूचीबद्ध है।
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Alipore court restrains TMC MP Mahua Moitra from calling West Bengal Chief Secretary 'vote chor'