Delhi High Court 
वादकरण

न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में रखी गई सावधि जमा (FD) पर बैंक एकतरफा रूप से ब्याज दर कम नहीं कर सकते: दिल्ली हाईकोर्ट

कोर्ट ने ₹5.89 करोड़ की फिक्स्ड डिपॉज़िट पर ब्याज दर को लगभग 8 प्रतिशत से घटाकर 3.5 प्रतिशत करने के नैटवेस्ट (NatWest) के फ़ैसले को सही ठहराने की कोशिश को खारिज कर दिया।

Bar & Bench

दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा है कि बैंक बिना किसी ठोस वजह के, कोर्ट के आदेशों के तहत रखी गई फिक्स्ड डिपॉज़िट पर मिलने वाले ब्याज को एकतरफा तौर पर कम नहीं कर सकते [नैटवेस्ट बनाम हीरो एक्सपोर्ट्स]।

जस्टिस अवनीश झिंगन और जस्टिस शैल जैन की बेंच ने नैटवेस्ट मार्केट्स PLC की अपील खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया। यह अपील उस आदेश के खिलाफ थी जिसमें कंपनी को ₹5.89 करोड़ की फिक्स्ड डिपॉजिट पर ज़्यादा ब्याज देने के लिए कहा गया था; यह डिपॉजिट आर्बिट्रेशन विवाद के दौरान बनाए रखी गई थी।

Justice Avneesh Jhingan

यह विवाद हीरो एक्सपोर्ट्स और टिफिन्स बैराइट्स, एस्बेस्टस एंड पेंट्स लिमिटेड के बीच हुआ था। आर्बिट्रेशन (मध्यस्थता) की कार्यवाही शुरू होने से पहले, हीरो एक्सपोर्ट्स ने आर्बिट्रेशन एंड कंसिलिएशन एक्ट की धारा 9 के तहत हाई कोर्ट में अंतरिम सुरक्षा की मांग की।

जुलाई 2008 में, हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि टिफिन्स बैराइट्स के बैंक खातों में मौजूद ₹8.5 करोड़ को सुरक्षित किया जाए। इसमें से ₹5.89 करोड़ ABN एमरो बैंक के पास थे, जो बाद में रॉयल बैंक ऑफ़ स्कॉटलैंड बन गया और अब नेटवेस्ट मार्केट्स PLC है।

इसके बाद कोर्ट ने निर्देश दिया कि ₹5.89 करोड़ को ऐसी फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में रखा जाए जिस पर सबसे ज़्यादा ब्याज दर मिले।

इस डिपॉजिट पर 30 जनवरी 2018 तक 7.75 प्रतिशत, 8.25 प्रतिशत और 7.75 प्रतिशत की दर से ब्याज मिला। इसके बाद, बैंक ने ब्याज दर घटाकर 3.5 प्रतिशत कर दी।

मई 2019 में, हाई कोर्ट के एक सिंगल जज ने ब्याज दर में कटौती पर आपत्ति जताई और बैंक को निर्देश दिया कि वह पूरी रकम हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के पास जमा करे। जज ने यह भी आदेश दिया कि 30 जनवरी 2018 से ब्याज की गणना पिछले तीन वर्षों की दरों के औसत के आधार पर की जानी चाहिए।

नेटवेस्ट ने हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच के सामने इस आदेश को चुनौती दी। उन्होंने RBI के एक सर्कुलर का हवाला दिया, जो कमर्शियल बैंकों को घरेलू टर्म डिपॉजिट पर अपनी ब्याज दरें तय करने की इजाज़त देता है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि जब कोई फिक्स्ड डिपॉजिट बिना रिन्यूअल के मैच्योर (परिपक्व) हो जाती है, तो उस रकम पर सेविंग्स बैंक अकाउंट वाली ब्याज दर लागू हो सकती है।

डिवीजन बेंच ने इस दलील को खारिज कर दिया।

बेंच ने कहा कि हालांकि RBI सर्कुलर के तहत बैंक टर्म डिपॉजिट पर दरें तय करने के लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन यह अधिकार इस शर्त के अधीन है कि एक जैसी डिपॉजिट के बीच कोई भेदभाव नहीं किया जा सकता।

नेटवेस्ट ऐसा कोई सबूत पेश नहीं कर पाया जिससे यह साबित हो सके कि एक जैसी सभी फिक्स्ड डिपॉजिट पर ब्याज दर घटाकर 3.5 प्रतिशत कर दी गई थी।

कोर्ट ने कहा, "अपीलकर्ता ने न तो सिंगल जज के सामने और न ही इस अपील में इस बात को साबित किया है कि एक जैसी सभी FDR पर ब्याज दर (ROI) घटाकर 3.5% कर दी गई थी।"

कोर्ट को ऐसा कोई सबूत नहीं मिला जिससे पता चले कि हीरो एक्सपोर्ट्स या टिफिन्स बैराइट्स को यह बताया गया था कि फिक्स्ड डिपॉज़िट की अवधि पूरी हो गई है और उसे रिन्यू करने की ज़रूरत है।

इसके अलावा, हालांकि नैटवेस्ट ने 2017 में आर्बिट्रेटर से रकम को दूसरे बैंक में ट्रांसफर करने की इजाज़त मांगी थी क्योंकि वह अपना कामकाज बंद कर रहा था, लेकिन उस अर्ज़ी में यह नहीं बताया गया था कि ब्याज दर कम कर दी जाएगी।

इसलिए, कोर्ट ने माना कि सिंगल-जज के निर्देशों में कोई तथ्यात्मक या कानूनी गलती नहीं थी, और अपील खारिज कर दी।

नैटवेस्ट की ओर से वकील संजीव पाठक पेश हुए।

हीरो एक्सपोर्ट्स की ओर से वकील शुभम सेठ और निखिलेश रामचंद्रन पेश हुए।

टिफिन्स बैराइट्स की ओर से वकील एमए वेंकटा सुब्रमण्यन पेश हुए।

[फैसला पढ़ें]

Natwest_Vs_Hero.pdf
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Banks can't unilaterally reduce interest on fixed deposits maintained pursuant to court orders: Delhi High Court