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वादकरण

दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए और मारपीट के शिकार वकीलों के समर्थन में देशभर की बार एसोसिएशन एकजुट हुईं

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञान कुमार के ख़िलाफ़ प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले सुरक्षा के कड़े इंतज़ामों के बीच दिल्ली पुलिस ने वकीलों और अन्य प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया।

Bar & Bench

दिल्ली में प्रदर्शनकारियों को बड़ी संख्या में हिरासत में लेने और उनके साथ कथित तौर पर बदसलूकी करने की दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के बाद, देश भर के कई बार एसोसिएशन एकजुटता दिखाने के लिए कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं, पुलिस की कार्रवाई की जांच की मांग कर रहे हैं और खुद भी प्रदर्शन करने की घोषणा कर रहे हैं।

दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट में, वकीलों ने सोमवार, 12 अक्टूबर को दोपहर 1:30 बजे कोर्ट की मुख्य इमारत के बाहर लॉन में संविधान की प्रस्तावना (Preamble) को एक साथ पढ़ने का कार्यक्रम रखा है। इसके बाद ग्रुप में अनौपचारिक बातचीत होगी।

यह निमंत्रण सिर्फ़ वकीलों के लिए ही नहीं, बल्कि इंटर्न, क्लर्क, कोर्ट के कर्मचारियों, कैंटीन के कर्मचारियों, ड्राइवरों और इसमें शामिल होने के इच्छुक किसी भी व्यक्ति के लिए खुला है।

गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाई कोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन (GHCAA) सोमवार को दोपहर 1:50 बजे एक विशेष आम बैठक बुलाएगी। इस बैठक में उन वकीलों के साथ कथित मारपीट की निंदा करने वाला प्रस्ताव पारित किया जाएगा, जो सुप्रीम कोर्ट के पास शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में शामिल थे।

GHCAA के अध्यक्ष यतिन ओज़ा ने सदस्यों को भेजे एक संदेश में बैठक की घोषणा की और एसोसिएशन से इस घटना पर औपचारिक रुख अपनाने का आग्रह किया।

कर्नाटक हाईकोर्ट

बेंगलुरु में भी, वकीलों ने मंगलवार, 13 अक्टूबर को दोपहर 1 बजे कर्नाटक हाई कोर्ट के गेट नंबर 1 पर विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है। यह विरोध उन वकीलों और छात्रों की गिरफ्तारी के खिलाफ है, जिन्होंने दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था।

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने शनिवार को एक बयान जारी कर दिल्ली में वकीलों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई की कड़ी आलोचना की थी।

अध्यक्ष रोहित सूद के नेतृत्व वाली एसोसिएशन ने शांतिपूर्ण और निहत्थे वकीलों के खिलाफ बल प्रयोग को कानूनी पेशे और संवैधानिक मूल्यों की गरिमा का अपमान बताया। एसोसिएशन ने घटना की निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग की।

एसोसिएशन ने यह भी कहा कि बार की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार का सम्मान और संरक्षण किया जाना चाहिए।

10 अक्टूबर को, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नियोजित प्रदर्शन से पहले सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच दिल्ली पुलिस ने कई वकीलों और अन्य प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया था।

यह विरोध प्रदर्शन 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) और अन्य समूहों ने बुलाया था। इन समूहों ने मतदाता सूची के 'विशेष गहन संशोधन' (SIR) में कथित अनियमितताओं को लेकर कुमार के इस्तीफे की मांग की थी। दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा कारणों और आवेदन के समय को देखते हुए जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया था; आवेदन 7 अक्टूबर को दिया गया था, जबकि इसके लिए 10 दिन पहले सूचना देने का नियम है।

इसके बाद पुलिस ने राजधानी में कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया।

हिरासत में लिए गए लोगों में कई वकील भी शामिल थे जो सुप्रीम कोर्ट के पास जमा हुए थे। वकीलों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें ज़बरदस्ती घसीटा गया और उनके पास मौजूद संविधान की प्रस्तावना (Preamble) की एक प्रति फाड़ दी गई।

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत से दखल देने का अनुरोध किया, जिसके बाद हिरासत में लिए गए वकीलों को रिहा कर दिया गया।

रविवार को सुप्रीम कोर्ट ने एक विशेष सुनवाई की और विरोध प्रदर्शनों के बीच दिल्ली में लगाई गई पाबंदियों के संबंध में निर्देश जारी किए। कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे यह सुनिश्चित करें कि वकीलों, पत्रकारों और अन्य पेशेवरों को अपना काम करने से न रोका जाए। कोर्ट ने राजधानी में सार्वजनिक परिवहन, इंटरनेट सेवाओं और आवाजाही पर लगी पाबंदियों पर भी बात की।

इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (SCAORA) ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और वकीलों को कथित तौर पर गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में लेने और उनके साथ बदसलूकी करने की स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की मांग की। एसोसिएशन ने सबूतों (जैसे CCTV फुटेज और पुलिस रिकॉर्डिंग) को सुरक्षित रखने और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की भी मांग की।

इन घटनाओं के बाद कानूनी बिरादरी के सदस्यों ने वकीलों के अधिकारों की रक्षा करने और कथित पुलिस कार्रवाई के लिए जवाबदेही तय करने की मांग फिर से उठाई है।

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Bar bodies across India stand in solidarity with lawyers detained, assaulted during Delhi protests