बॉम्बे हाईकोर्ट ने 6 अगस्त को 2013 के यौन उत्पीड़न मामले में तहलका के पूर्व एडिटर तरुण तेजपाल के बरी होने के फैसले को पलट दिया और उन्हें दोषी करार दिया। [गोवा राज्य बनाम तरुनजीत तेजपाल और अन्य]।
जस्टिस नीला गोखले और अमित जमसांडेकर की डिवीज़न बेंच ने 2022 में गोवा सरकार की ओर से दायर अपील पर फैसला सुनाया।
बेंच ने कहा, "हमने फैसले और आदेश को रद्द कर दिया है और तेजपाल को दोषी ठहराया है। हमने उन्हें IPC की धाराओं 376(2)(f) और (k), 354A, 354B के तहत दोषी ठहराया है।"
धारा 376(2)(f) के तहत किसी रिश्तेदार, अभिभावक, शिक्षक या भरोसे या अधिकार की स्थिति में मौजूद व्यक्ति द्वारा महिला के साथ बलात्कार करना अपराध माना जाता है।
धारा 354A के तहत यौन उत्पीड़न अपराध है, जिसमें शारीरिक संपर्क और ऐसी हरकतें शामिल हो सकती हैं जिनमें बिना सहमति के स्पष्ट यौन संकेत या यौन संबंध बनाने की मांग या अनुरोध शामिल हो।
धारा 354B के तहत किसी महिला के कपड़े उतारने के इरादे से उस पर हमला करना या आपराधिक बल का प्रयोग करना अपराध है।
कोर्ट आज बाद में तेजपाल को सजा सुनाने के मामले पर सुनवाई करेगी।
सुनवाई के दौरान, राज्य सरकार ने आरोप लगाया कि ट्रायल कोर्ट का फ़ैसला गलत और पक्षपातपूर्ण था। तेजपाल का कहना था कि उन्हें बरी करने का फ़ैसला रिकॉर्ड को ध्यान से पढ़ने के बाद लिया गया था, जिसमें CCTV फ़ुटेज, मैसेज और एक्सपर्ट के सबूत शामिल थे।
यह मामला 2013 का है, जब तेजपाल पर गोवा के एक आलीशान होटल की लिफ़्ट में अपनी एक जूनियर सहयोगी के साथ यौन उत्पीड़न करने का आरोप लगा था।
इसके बाद गोवा पुलिस ने तेजपाल के ख़िलाफ़ रेप समेत कई अपराधों के लिए FIR दर्ज की।
उन्हें नवंबर 2013 में गिरफ़्तार किया गया और बाद में जुलाई 2014 में ज़मानत पर रिहा कर दिया गया।
तेजपाल के ख़िलाफ़ मुक़दमा 2017 में शुरू हुआ। एडिशनल सेशंस जज क्षमा जोशी ने मई 2021 में फ़ैसला सुनाते हुए तेजपाल को बरी कर दिया।
जज ने अपने फ़ैसले में कहा कि रेप केस की जांच करने वाले अफ़सर ने कई कमियां छोड़ी थीं और अभियोजन पक्ष CCTV फ़ुटेज समेत अहम सबूत पेश करने में नाकाम रहा।
इसके बाद राज्य सरकार ने बरी किए जाने के फ़ैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी।
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Bombay High Court overturns Tarun Tejpal acquittal in sexual assault case; convicts him for rape