Calcutta High Court  
वादकरण

कलकत्ता हाईकोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूर्व मंत्री सुजीत बोस को जमानत देने से इनकार किया

ED के अनुसार, बोस और अन्य "राजनीतिक रूप से प्रभावशाली व्यक्तियों" की सिफारिशों पर नगर पालिका में कई गैर-कानूनी भर्तियां की गईं।

Bar & Bench

कलकत्ता हाईकोर्ट ने साउथ दम दम म्युनिसिपैलिटी में भर्ती से जुड़े कथित घोटाले से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री सुजीत बोस की ज़मानत अर्ज़ी खारिज कर दी है [सुजीत बोस बनाम प्रवर्तन निदेशालय]।

जस्टिस तीर्थंकर घोष ने कहा कि बोस 'प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' (PMLA) की धारा 45 के तहत ज़मानत के लिए ज़रूरी शर्तों को पूरा करने में नाकाम रहे।

कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसा मानने का कोई ठोस आधार नहीं है कि बोस बेगुनाह हैं और ज़मानत पर रहने के दौरान कोई और अपराध नहीं करेंगे।

कोर्ट ने आगे कहा कि उन्हें सिर्फ़ इसलिए रिहा नहीं किया जा सकता कि प्रॉसिक्यूशन की शिकायत दर्ज हो चुकी है और ट्रायल कोर्ट ने मामले का संज्ञान ले लिया है।

13 अक्टूबर को जारी एक आदेश में कोर्ट ने कहा, "एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट से जानकारी मिलने के बाद, स्पेशल कोर्ट को सूचित करके सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) ने भी आगे की जांच शुरू कर दी है। जांच का एक अहम चरण चल रहा है।"

ED के अनुसार, बोस और अन्य "राजनीतिक रूप से प्रभावशाली लोगों" की सिफ़ारिशों पर नगर पालिका में कई गैर-कानूनी भर्तियां की गईं।

बोस की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि जब भी ED ने उन्हें बुलाया, उन्होंने हमेशा सहयोग किया और 'एनफोर्समेंट केस इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट' (ECIR) दर्ज होने के तीन साल बाद ही उन्हें गिरफ़्तार किया गया।

उन्होंने आगे तर्क दिया कि गिरफ़्तारी में हुई देरी ही कस्टोडियल पूछताछ, भागने के जोखिम या सबूतों के साथ छेड़छाड़ की किसी भी वास्तविक ज़रूरत को खारिज करती है।

ED की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल SV राजू ने आरोप लगाया कि बोस ने अपने और अपने परिवार के सदस्यों के खातों सहित कई खातों के ज़रिए लगभग ₹20.40 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग की।

यह भी कहा गया कि ज़ब्त किए गए डिजिटल रिकॉर्ड, भर्ती डेटा, प्रॉपर्टी के लेन-देन, कैश जमा, शेयरहोल्डिंग व्यवस्था और स्ट्रक्चर्ड पेमेंट से यह साबित होता है कि आरोपी ने अपराध से हुई कमाई को हासिल किया और उसकी मनी लॉन्ड्रिंग की।

आरोपी की ओर से सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी और सब्यसाची बनर्जी के साथ एडवोकेट कुलदीप राय, धनंजय कुमार, मिहिर जोशी, आदित्य सिंह चौहान, नाहिद अहमद, प्रज्ञा बनर्जी और ऐश्वर्या मिश्रा पेश हुए।

ED का प्रतिनिधित्व एडिशनल सॉलिसिटर जनरल SV राजू, ASG धीरज त्रिवेदी, सीनियर एडवोकेट ज़ोहेब हुसैन और एडवोकेट आदिल राशिद, सम्राट गोस्वामी, स्निग्धा घोष, अपर्णा सरकार, आर्यन बंसल और शिवम सिंह ने किया।

[आदेश पढ़ें]

Sujit_Bose_Bail_Rejection_Order.pdf
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Calcutta High Court denies bail to ex-minister Sujit Bose in money laundering case