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वादकरण

CBSE OSM विवाद:सुप्रीम कोर्ट ने कक्षा 12 की उत्तर पुस्तिकाओ के पुनर्मूल्यांकन पोर्टल को दोबारा खोलने का निर्देश से इनकार किया

CBSE ने कहा कि तय समय-सीमा के दौरान 1.68 लाख छात्रों ने सफलतापूर्वक आवेदन किया था। कोर्ट ने कहा कि री-इवैल्यूएशन पोर्टल को फिर से खोलने से लाखों नए दावे सामने आ सकते हैं।

Bar & Bench

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उन छात्रों के लिए CBSE 12वीं कक्षा की परीक्षा के वेरिफिकेशन और री-इवैल्यूएशन पोर्टल को फिर से खोलने का निर्देश देने से इनकार कर दिया, जिन्हें 'ऑन-स्क्रीन मार्किंग' (OSM) सिस्टम से अपनी आंसर शीट के मूल्यांकन को लेकर शिकायतें थीं।

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच ने कहा कि सभी उम्मीदवारों के लिए पोर्टल पहले ही एक तय समय के लिए खोला जा चुका था और इसे दोबारा खोलने से लाखों नए दावे सामने आ सकते हैं।

CJI कांत ने कहा, "अगर आप बस का इस्तेमाल नहीं करते, तो आप बस चूक जाते हैं।"

Chief Justice of India Surya Kant and Justices Joymalya Bagchi and V Mohana

कोर्ट उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिसमें CBSE के आंसर शीट की जांच के लिए OSM सिस्टम लाने के तरीके को चुनौती दी गई थी। याचिका में कहा गया था कि OSM को पहली बार 2026 में लागू किया गया था और इसे लागू करने से पहले शिक्षकों को कोई औपचारिक ट्रेनिंग नहीं दी गई थी।

याचिका में आरोप लगाया गया कि डिजिटल स्कैनिंग शुरू करने से कई गड़बड़ियां हुईं, जैसे आंसर शीट के कुछ पन्नों का स्कैन न होना, स्कैन का साफ न होना और जवाब या पन्नों की जांच न होना।

याचिकाकर्ता का दावा था कि इन गलतियों की वजह से मनमाने ढंग से जांच हुई और कुछ मामलों में तो आंसर शीट की जांच ही नहीं हुई।

14 अगस्त को कोर्ट ने सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) से कहा था कि वे उन छात्रों के हितों की रक्षा के लिए तरीके खोजें जिन्हें कम स्कोर की वजह से एंट्रेंस-आधारित एडमिशन में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

आज, याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि वे री-इवैल्यूएशन (दोबारा जांच) के लिए आवेदन करने की समय-सीमा को सिर्फ़ एक हफ़्ते और बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।

वकील ने कहा, "वेबसाइट क्रैश हो गई थी और कई छात्र ऑन-स्क्रीन वेरिफिकेशन के लिए आवेदन नहीं कर पाए।"

हालांकि, CJI कांत ने कहा कि छात्रों को री-इवैल्यूएशन की समय-सीमा का फ़ायदा तब उठाना चाहिए था जब वह खुली हुई थी।

कोर्ट ने कहा, "हम उन्हें आपके लिए यह समय-सीमा दोबारा खोलने का निर्देश क्यों दें? अगर आप बस का इस्तेमाल नहीं करते, तो आपकी बस छूट जाती है। यह समय-सीमा एक तय समय के लिए सभी के लिए खुली थी।"

याचिकाकर्ता के वकील ने जवाब दिया कि कुछ उम्मीदवारों को तकनीकी खराबी का सामना करना पड़ा था। हालांकि, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि तय समय-सीमा के दौरान 1.68 लाख छात्रों ने सफलतापूर्वक आवेदन किया था।

मेहता ने कहा, "दिल्ली हाईकोर्ट पहले ही इसी तरह की चुनौती को खारिज कर चुका है।"

इन दलीलों पर विचार करते हुए कोर्ट ने कहा कि इस मामले में दखल देने की कोई वजह नहीं है।

बेंच ने कहा, "आज आप हमसे इसे दोबारा खोलने के लिए कह रहे हैं। कल हज़ारों, या लाखों लोग अपने दावे फिर से शुरू कर देंगे। मुश्किल यह है कि एडमिशन पहले ही पूरे हो चुके हैं।"

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