दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास की ओर से दायर एक मुकदमे पर दक्षिणपंथी कमेंटेटर अभिजीत अय्यर-मित्रा, मीडिया प्लेटफॉर्म 'द पैम्फलेट', कानूनी समाचार प्लेटफॉर्म 'लॉ बीट' और सोशल मीडिया अकाउंट्स 'द जयपुर डायलॉग्स' व 'द संडे गार्डियन' (प्रतिवादियों) को समन जारी किया। यह मुकदमा उनके घर का पता और निजी जानकारी सार्वजनिक करने के खिलाफ दायर किया गया था।
जस्टिस सचिन दत्ता ने अंतरिम रोक (इन्टरिम इंजंक्शन) की अर्ज़ी पर प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया और मामले को दो हफ़्ते बाद आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।
सुनवाई के दौरान, कोर्ट को बताया गया कि X (पहले ट्विटर) पर दास का पता बताने वाले ट्वीट हटा दिए गए हैं।
बेंच ने पूछा, "X की ओर से कौन पेश हो रहा है? क्या ये लिंक हटा दिए गए हैं? क्या ये लिंक अब एक्टिव नहीं हैं?"
X के वकील ने इसकी पुष्टि की।
इसके बाद कोर्ट ने इसे अपने आदेश में दर्ज किया।
मामले की अगली सुनवाई 14 सितंबर को होगी।
दास ने अपनी प्राइवेसी के उल्लंघन के लिए ₹2 करोड़ से ज़्यादा के हर्जाने की मांग की है।
उन्होंने अय्यर-मित्रा, द पैम्फलेट, लॉ बीट, द जयपुर डायलॉग्स और द संडे गार्डियन को उनके घर का पता पब्लिश करने, फैलाने या बताने से रोकने के लिए स्थायी रोक (परमानेंट इंजंक्शन) की मांग की है। साथ ही, उन्होंने इन संस्थाओं को उन वीडियो और पोस्ट को हटाने और उन तक लोगों की पहुँच बंद करने का निर्देश देने की भी मांग की है जिनमें ये जानकारी दी गई थी।
X कॉर्प और गूगल को भी यह जानकारी देने वाले कंटेंट को हटाने और कंटेंट को और फैलने से रोकने के निर्देश देने की मांग की गई है।
दास की अर्ज़ी में कहा गया है कि वह 2025 की शुरुआत से ग्रेटर कैलाश-I की एक प्रॉपर्टी के ग्राउंड फ़्लोर पर किराए के कमरे में रह रहे हैं और 'द पैम्फलेट' के प्रतिनिधियों ने उस साझा रिहायशी परिसर में घुसपैठ की, अंदर के हिस्से की रिकॉर्डिंग की और 5 अगस्त को सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X पर फ़ुटेज पब्लिश किया।
बताया गया कि जिस वीडियो में कथित तौर पर उनके घर का पता बताया गया था, उसे 21 लाख से ज़्यादा बार देखा गया और 10 अगस्त को उसे दोबारा पब्लिश किया गया।
दास के मुक़दमे के अनुसार, अय्यर-मित्रा ने 'लॉ बीट' के एक प्रोग्राम में दास के पड़ोसी का नाम लेकर और किराए को गलत तरीके से ₹7 लाख प्रति माह बताकर दास का पता उजागर किया।
उन्होंने बताया कि इसके बाद अय्यर-मित्रा ने कई पोस्ट पब्लिश किए जिनमें यह जानकारी थी। दास ने कहा कि उन्होंने 5 अगस्त को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और प्रतिवादियों को सुरक्षा जोखिमों के बारे में सूचित किया, लेकिन कथित तौर पर जानकारी उजागर करने का सिलसिला जारी रहा।
मुक़दमे में कहा गया, "इसके बावजूद, प्रतिवादियों द्वारा वादी के घर की जानकारी पब्लिश और री-सर्कुलेट की जाती रही। बार-बार जानकारी उजागर करने और वादी को पहले मिली हिंसक धमकियों को एक साथ देखने पर, दुश्मन लोगों द्वारा उनके घर का पता लगाने की संभावना काफ़ी बढ़ जाती है और इससे वादी, उनके परिवार के सदस्यों और परिसर में रहने वाले अन्य लोगों को डराने-धमकाने, परेशान करने और शारीरिक हिंसा का सामना करना पड़ सकता है।"
दास की तरफ़ से पेश हुए सीनियर एडवोकेट अखिल सिबल ने दलील दी कि 'द पैम्फलेट' के लोग उनकी प्रॉपर्टी पर आए और एक वीडियो पोस्ट किया, जिसे बाद में अभिजीत अय्यर-मित्रा ने भी रीपोस्ट किया।
सिबल ने यह भी कहा कि X ने वीडियो हटा दिए हैं, लेकिन उन्हें हटाए ही रखना चाहिए।
उन्होंने कहा, "इन्हें ट्विटर की अपनी पॉलिसी के तहत हटाया गया है और इन्हें हटाए ही रखना चाहिए।"
बेंच ने पूछा, "आपने यह किस आधार पर दायर किया है? निजता के अधिकार (राइट टू प्राइवेसी) के आधार पर?"
सिबल ने कहा, "अब कानून स्पष्ट है और प्रेस काउंसिल ऑफ़ इंडिया के नियम भी हैं, जिनके अनुसार किसी सार्वजनिक व्यक्ति के निवास स्थान, उनकी निजी आर्थिक स्थिति और माता-पिता की जानकारी... इस तरह के मामलों का विषय नहीं होतीं।"
बेंच ने जवाब दिया, "आप जिन तीन चीज़ों का ज़िक्र कर रहे हैं, वे अलग-अलग श्रेणियों में आती हैं।"
अभिजीत अय्यर-मित्रा की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट पर्सिवल बिलिमोरिया ने कहा, "पुट्टास्वामी (फ़ैसले) में कहा गया है कि घर का पता, जन्म तिथि जैसी जानकारी के मामले में निजता का अधिकार लागू नहीं होता।"
इस पर जस्टिस दत्ता ने कहा कि R राजगोपाल बनाम तमिलनाडु राज्य मामले में सुप्रीम कोर्ट के 1994 के फ़ैसले में इस पहलू पर एक खास पैराग्राफ़ है।
आख़िरकार कोर्ट ने प्रतिवादियों को समन जारी किया और मामले की अगली सुनवाई के लिए 14 सितंबर की तारीख़ तय की।
प्रतिवादियों से 10 दिनों के भीतर अपना जवाब दाखिल करने को कहा गया।
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