Akira Nandan, Delhi HC  
वादकरण

दिल्ली हाईकोर्ट ने पवन कल्याण के बेटे अकीरा नंदन की पहचान का बिना इजाज़त इस्तेमाल करने पर AI फिल्म पर रोक लगा दी

कोर्ट ने संभवामी स्टूडियोज़ LLP और दूसरे अनजान उल्लंघनकर्ताओं को अकीरा नंदन की पहचान का इस्तेमाल करके AI-जेनरेटेड या डीपफेक कंटेंट बनाने, पब्लिश करने या शेयर करने से रोक दिया।

Bar & Bench

दिल्ली हाईकोर्ट ने एकतरफ़ा अंतरिम रोक लगाते हुए एक AI-जनरेटेड फ़िल्म के ब्रॉडकास्ट पर रोक लगा दी है, जिसमें आंध्र प्रदेश के उप मुख्यमंत्री और एक्टर पवन कल्याण के बेटे अकीरा नंदन के नाम, इमेज, शक्ल, आवाज़ और पर्सनैलिटी का इस्तेमाल उनकी मर्ज़ी के बिना किया गया था [अकीरा नंदन बनाम संबावामी स्टूडियोज़]।

जस्टिस तुषार राव गेडेला ने 23 जनवरी को यह आदेश दिया।

यह आदेश संभवामी स्टूडियोज LLP और अन्य अज्ञात उल्लंघनकर्ताओं को अकीरा नंदन की पहचान का इस्तेमाल करके AI-जेनरेटेड या डीपफेक कंटेंट बनाने, पब्लिश करने या शेयर करने से रोकता है, जिसमें "AI लव स्टोरी" नाम की एक फिल्म भी शामिल है, जो YouTube और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होस्ट की गई है।

Justice Tushar Rao Gedela

21 साल के अकीरा नंदन ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करके बनाई गई एक पूरी फिल्म के ज़रिए उनके व्यक्तित्व, पब्लिसिटी और प्राइवेसी के अधिकारों का बड़े पैमाने पर उल्लंघन किया गया है, जिसमें उन्हें मुख्य किरदार के तौर पर दिखाया गया है।

कोर्ट को बताया गया कि फिल्म में नंदन के चेहरे की विशेषताओं, आवाज़ और पर्सनैलिटी को बहुत सटीकता से कॉपी करने के लिए एडवांस्ड AI मॉर्फिंग और डीपफेक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया, जिससे गलत तरीके से उनकी भागीदारी और सहमति दिखाई गई।

कोर्ट ने रिकॉर्ड किया कि "AI लव स्टोरी" नाम की AI-जेनरेटेड फिल्म को YouTube पर कई वर्शन में अपलोड किया गया था, जिसमें तेलुगु-भाषा वाले वर्शन को 22 जनवरी, 2026 तक 1,109,255 व्यूज़ मिले और इंग्लिश-भाषा वाले वर्शन को 24,354 व्यूज़ मिले, जो कथित तौर पर उल्लंघन करने वाले कंटेंट के तेज़ी से और बड़े पैमाने पर ऑनलाइन फैलने का संकेत देता है।

AI फिल्म के अलावा, मुकदमे में YouTube, Instagram, Facebook और X पर बड़ी संख्या में नकली अकाउंट, फेक प्रोफाइल और पैसे कमाने वाले सोशल-मीडिया पेज का भी ज़िक्र किया गया था, जो कथित तौर पर अकीरा नंदन के नाम, तस्वीरों और शक्ल का इस्तेमाल करके व्यूज़, फॉलोअर्स और पैसे का फायदा उठा रहे थे।

नंदन ने आरोप लगाया कि इनमें से कुछ अकाउंट उनके नाम पर डोनेशन मांग रहे थे, जिससे धोखे और जनता के पैसे के गलत इस्तेमाल की चिंताएं बढ़ रही थीं।

कोर्ट ने शिकायत के साथ अटैच किए गए कई AI-जेनरेटेड विज़ुअल्स की जांच की और पाया कि यह सामग्री दिखाती है कि कैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करके पहचाने जाने वाले व्यक्तियों से जुड़ी रियलिस्टिक लेकिन झूठी कहानियाँ गढ़ी जा सकती हैं।

DM एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड बनाम बेबी गिफ्ट हाउस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट के अहम फैसले पर भरोसा करते हुए, कोर्ट ने दोहराया कि भारतीय कानून पब्लिसिटी के अधिकार को किसी व्यक्ति की पर्सनैलिटी के कमर्शियल इस्तेमाल पर उसके अधिकार की रक्षा के रूप में मान्यता देता है। कोर्ट ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को बिना इजाज़त के किसी दूसरे व्यक्ति के नाम, छवि या शक्ल का इस्तेमाल कमर्शियल फायदे के लिए करने का अधिकार नहीं है।

अंतरिम चरण में, कोर्ट ने यह निष्कर्ष निकाला कि सुविधा का संतुलन नंदन के पक्ष में था, और यदि अंतरिम राहत नहीं दी जाती है, तो व्यक्तित्व और प्रतिष्ठा को होने वाली किसी भी चोट की न तो मौद्रिक रूप से पर्याप्त भरपाई की जा सकती है और न ही इसे आसानी से ठीक किया जा सकता है।

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Delhi High Court halts AI film over unauthorised use of Pawan Kalyan’s son Akira Nandan’s identity