दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को एक हाल ही में ब्लॉक किए गए व्यंग्यात्मक X (पहले Twitter) अकाउंट को बहाल करने का आदेश दिया, जिसका नाम 'डॉ. निमो यादव' है।
हालांकि, जस्टिस पुरुशेंद्र कुमार कौरव ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार द्वारा आपत्तिजनक बताए गए कुछ ट्वीट्स अभी ब्लॉक ही रहेंगे।
X अकाउंट के ऑपरेटर को एक रिव्यू कमेटी के सामने पेश होने का निर्देश दिया गया है, ताकि यह जांच की जा सके कि क्या इन ट्वीट्स को ब्लॉक रखना जारी रखना होगा।
कोर्ट ने कहा, "ब्लॉकिंग ऑर्डर में बताए गए कथित आपत्तिजनक ट्वीट्स को अस्थायी ब्लॉकिंग कैटेगरी में रखा जाए। याचिकाकर्ता का अकाउंट बहाल किया जाए। भारत सरकार को सामग्री पर नज़र रखने की पूरी आज़ादी है, और अगर आगे कोई और आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट की जाती है, तो वह कानून के अनुसार कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है।"
कोर्ट ने यह फ़ैसला प्रतीक शर्मा की एक याचिका पर दिया। प्रतीक शर्मा 'Dr Nimo Yadav' X अकाउंट के ऑपरेटर हैं। इस अकाउंट को 19 मार्च को केंद्र सरकार के आदेश पर भारत में ब्लॉक कर दिया गया था।
शर्मा ने अपने अकाउंट को ब्लॉक किए जाने को चुनौती दी और सरकार के ब्लॉकिंग आदेश को पेश करने की मांग की।
बाद में सरकार ने कोर्ट को बताया कि इस हैंडल को इसलिए ब्लॉक किया गया, क्योंकि सरकार को पता चला कि यह "प्रधानमंत्री से जुड़े झूठे नैरेटिव फैला रहा था" और "उन्हें गलत तरीके से पेश कर रहा था।"
केंद्र सरकार ने 18 मार्च को X को एक आदेश जारी कर इस अकाउंट को ब्लॉक करने को कहा था। X ने संबंधित दस्तावेज़ों के साथ यह गोपनीय आदेश कोर्ट में जमा किया।
ब्लॉकिंग आदेश में कहा गया था कि 'Dr Nimo Yadav' अकाउंट में मानहानिकारक पोस्ट हैं, जिनमें फ़ोटो, वीडियो और AI-मैनिपुलेटेड कंटेंट का इस्तेमाल करके ऐसे विवादित पोस्ट बनाए गए थे, जो सरकार पर सवाल उठाते थे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मानहानि करते थे। इसमें यह भी कहा गया था कि ऐसी झूठी जानकारी फैलाने से सार्वजनिक व्यवस्था पर असर पड़ सकता है, जिससे आंतरिक सुरक्षा को खतरा पैदा हो सकता है।
कोर्ट में जमा किए गए दस्तावेज़ों से यह भी पता चला कि केंद्र सरकार के 18 मार्च के ब्लॉकिंग आदेश के आधार पर 11 अन्य Twitter हैंडल भी ब्लॉक किए गए थे।
शर्मा ने कहा कि उनके अकाउंट के लगातार ब्लॉक रहने से उनकी आमदनी का नुकसान हुआ है और उनके पेशेवर काम-काज में रुकावट आई है, क्योंकि यह अकाउंट उनकी रोज़ी-रोटी का ज़रिया है। शर्मा के वकील ने आगे कहा कि अगर उन्हें आपत्तिजनक सामग्री के बारे में बताया जाता है, तो वे ज़रूरत पड़ने पर ज़रूरी कदम उठाएंगे।
शर्मा की तरफ़ से पेश वकील वृंदा ग्रोवर ने आज यह सवाल उठाया कि उनके क्लाइंट को 19 मार्च को अकाउंट ब्लॉक किए जाने से पहले, केंद्र सरकार का 18 मार्च का ब्लॉकिंग आदेश क्यों नहीं दिया गया।
उन्होंने बताया कि ब्लॉकिंग आदेश शर्मा के साथ तभी शेयर किया गया, जब उन्होंने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दी थी।
उन्होंने दलील दी, "कानूनी व्यवस्था ऐसी नहीं हो सकती कि आप न्यायिक समीक्षा से बचने के लिए मेरे अधिकारों का उल्लंघन करें। यह ब्लॉकिंग आदेश पूरी तरह से गैर-कानूनी और मनमाना है; 19 मार्च को जारी यह आदेश आज, यानी 6 अप्रैल को भी लागू है। मैं चाहती हूँ कि मेरा अकाउंट फिर से खोल दिया जाए। उन्होंने 10 ट्वीट को आपत्तिजनक बताया है। यह धारा 69A के दायरे में नहीं आता। अगर ये ट्वीट वाकई आपत्तिजनक हैं, तो मैं इन खास ट्वीट्स को डिलीट कर दूँगी और अपना अकाउंट फिर से चालू करवा लूँगी।"
केंद्र सरकार की तरफ़ से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कोर्ट से आग्रह किया कि सरकार के फ़ैसले को पलटने से पहले कोर्ट सावधानी बरते। "इस पर विस्तार से चर्चा होनी चाहिए। आप (X अकाउंट होल्डर) देश के प्रमुख, विदेश संबंधों वगैरह के खिलाफ कुछ अपमानजनक टिप्पणियाँ करते हैं। नुकसान तो हो चुका है। अब हर कोई इसी बात को आधार बनाकर लिखेगा," उन्होंने तर्क दिया।
X (Twitter) का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील ने तर्क दिया कि पूरे अकाउंट को डिलीट करने का निर्देश देना शायद सही न हो।
शर्मा की ओर से वकील वृंदा ग्रोवर, नकुल गांधी, अपार गुप्ता, सिद्धि साहू, गुरदीप सिंह और सौतिक बनर्जी पेश हुए।
Twitter की ओर से वकील अंकित परहार पेश हुए।
केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा और वकील अवश्रेय रूडी ने किया।
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