Delhi HC and SpiceJet  
वादकरण

दिल्ली हाईकोर्ट ने ₹144 करोड़ जमा करने के लिए समय बढ़ाने की स्पाइसजेट की याचिका खारिज कर दी

एयरलाइन को कलानिधि मारन और KAL एयरवेज़ के साथ लंबे समय से चल रहे मध्यस्थता विवाद के सिलसिले में यह रकम जमा करनी है।

Bar & Bench

दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को स्पाइसजेट की उस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें कलानिधि मारन और KAL एयरवेज के साथ लंबे समय से चल रहे मध्यस्थता विवाद के सिलसिले में भुगतान करने के आदेश वाली रकम जमा करने के लिए समय बढ़ाने की मांग की गई थी।

जस्टिस विनोद कुमार ने मैनेजिंग डायरेक्टर अजय सिंह की गुड़गांव वाली प्रॉपर्टी को सिक्योरिटी के तौर पर स्वीकार करने से भी इनकार कर दिया, क्योंकि स्पाइसजेट कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के पास पहले के आदेश के मुताबिक ₹50 करोड़ जमा करने में नाकाम रही थी।

बेंच ने कहा, "अगर याचिकाकर्ता [स्पाइसजेट] ने ₹50 करोड़ जमा किए होते, तो यह कोर्ट ₹94 करोड़ की राशि की अनुमति देने के लिए सिक्योरिटी के तौर पर गुड़गांव में प्रॉपर्टी के दस्तावेज़ जमा करने की याचिका पर विचार कर सकता था। हालांकि, चूंकि याचिकाकर्ता ने अपने वादे के मुताबिक ₹50 करोड़ जमा नहीं किए हैं, इसलिए मैं प्रॉपर्टी को सिक्योरिटी के तौर पर स्वीकार करने के पक्ष में नहीं हूं। अर्जी खारिज की जाती है।"

Justice Vinod Kumar

कोर्ट के 13 जुलाई के आदेश के अनुसार, स्पाइसजेट और अजय सिंह को कुल मिलाकर ₹144 करोड़ जमा करने हैं।

कोर्ट ने ध्यान दिया कि 13 जुलाई को स्पाइसजेट ने रजिस्ट्री में 45 दिनों के भीतर ₹50 करोड़ जमा करने और बाकी बचे ₹94 करोड़ 90 दिनों के भीतर चुकाने का वादा किया था।

जस्टिस कुमार ने कहा कि अगर स्पाइसजेट ने ₹50 करोड़ जमा कर दिए होते, तो कोर्ट दूसरी किस्त के लिए नरमी बरतता।

बेंच ने कहा, "अगर याचिकाकर्ता ने रजिस्ट्रार जनरल के पास 45 दिनों में ₹50 करोड़ जमा करने के अपने वादे को पूरा किया होता, तो यह कोर्ट दूसरी किस्त की समय-सीमा के मामले में नरमी बरत सकता था। वादे के इस हिस्से को भी पूरा नहीं किया गया है।"

इस तरह, कोर्ट ने पैसे जमा करने के लिए समय बढ़ाने की स्पाइसजेट की अर्जी खारिज कर दी।

इस मामले में सुनवाई की अगली तारीख 3 नवंबर है।

यह मामला 2015 के एक विवाद से जुड़ा है, जब स्पाइसजेट गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रही थी और उसके कामकाज बंद होने का खतरा था।

कलानिधि मारन और काल एयरवेज एयरलाइन के प्रमोटर और सबसे बड़े शेयरधारक थे, जिनके पास 58.46 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। उन्होंने जनवरी 2015 में स्पाइसजेट के साथ शेयर बिक्री और खरीद समझौता (SSPA) किया था। इस SSPA के तहत, मारन और काल एयरवेज अपनी पूरी हिस्सेदारी अजय सिंह को ₹2 की मामूली कीमत पर ट्रांसफर करने के लिए सहमत हुए थे।

इस सौदे के साथ एक व्यापक वित्तीय सहायता व्यवस्था भी जुड़ी थी, जिसमें वारंट और कम्युलेटिव रिडीमेबल प्रेफरेंस शेयर (CRPS) जारी करना और लगभग ₹450 करोड़ की कुल फंडिंग का वादा शामिल था। बाद में SSPA के तहत आपसी दायित्वों को पूरा करने को लेकर विवाद पैदा हुए, जिसके कारण मामला आर्बिट्रेशन (मध्यस्थता) तक पहुंच गया।

जुलाई 2018 में, तीन सदस्यों वाले आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल ने स्पाइसजेट और अजय सिंह को मारन और KAL एयरवेज को ₹308.21 करोड़ वापस करने का निर्देश दिया, साथ ही नवंबर 2015 से 12 प्रतिशत सालाना की दर से ब्याज भी देने को कहा।

दोनों पक्षों ने आर्बिट्रेशन एंड कंसिलिएशन एक्ट, 1996 की धारा 34 के तहत चुनौती दी, जबकि साथ ही साथ इसे लागू करने की कार्यवाही भी शुरू हो गई।

इसे लागू करने की कार्यवाही के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में कई दौर की कानूनी लड़ाई हुई।

आखिरकार हाई कोर्ट ने स्पाइसजेट को अंतरिम कार्यवाही में ₹579 करोड़ जमा करने का निर्देश दिया। अपील में इसमें बदलाव किया गया और ₹329 करोड़ की बैंक गारंटी और ₹250 करोड़ नकद जमा करने की अनुमति दी गई।

2019 में, ₹250 करोड़ डिक्री होल्डर्स (जिनके पक्ष में फैसला हुआ था) को जारी किए गए, और बैंक गारंटी से ₹58.21 करोड़ का और भुगतान किया गया।

फरवरी 2023 में, सुप्रीम कोर्ट ने बैंक गारंटी को भुनाने का निर्देश दिया और स्पाइसजेट को तीन महीने के भीतर ब्याज के तौर पर ₹75 करोड़ का भुगतान करने का आदेश दिया। साथ ही चेतावनी दी कि ऐसा न करने पर फैसले को पूरी तरह से लागू किया जा सकेगा।

जुलाई 2023 में, कोर्ट ने और समय देने से इनकार कर दिया और कहा कि आदेश का पालन न होने के कारण इसे लागू किया जा सकता है।

जनवरी 2026 में, दिल्ली हाई कोर्ट ने स्पाइसजेट और अजय सिंह द्वारा फैसले पर रोक लगाने के लिए दायर आवेदनों पर सुनवाई की।

हालांकि, कोर्ट ने नोट किया कि जिन पर भुगतान की जिम्मेदारी थी (जजमेंट डेटर्स), उन्होंने पहले की कार्यवाही में खुद माना था कि ब्याज के तौर पर ₹194.51 करोड़ का भुगतान बाकी है, जिसमें से ₹50 करोड़ पहले ही जमा किए जा चुके थे।

इसके अनुसार, कोर्ट ने बाकी बचे ₹144.51 करोड़ को छह सप्ताह के भीतर जमा करने का निर्देश दिया। स्पाइसजेट ने इस आदेश को चुनौती देते हुए रिव्यू पिटीशन (पुनर्विचार याचिका) दायर की।

फरवरी में, सुप्रीम कोर्ट ने ₹144 करोड़ जमा करने के निर्देश को चुनौती देने वाली स्पाइसजेट और अजय सिंह की याचिका खारिज कर दी।

वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी और अमित सिब्बल के साथ अधिवक्ता गौतम शिवशंकर, शशिप्रभु, यशार्थ मिश्रा, दर्पण सचदेवा, मोहम्मद इलियास, पार्थ रशिक और विधात्री देवोली स्पाइसजेट और अजय सिंह की ओर से पेश हुए।

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Delhi High Court rejects SpiceJet's plea for extension of time to deposit ₹144 crore