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वादकरण

दिल्ली हाईकोर्ट ने मेटा के कॉपीराइट नियमों के गलत इस्तेमाल के आरोप वाली PIL पर केंद्र और मेटा से जवाब मांगा

वसूली करने वाले लोग असल कंटेंट बनाने वालों के नए कंटेंट का इस्तेमाल करके अपनी पुरानी पोस्ट को एडिट करते हैं और फिर उन एडिट की गई पुरानी पोस्ट को फ़्लैग करके कॉपीराइट उल्लंघन का आरोप लगाते हैं।

Bar & Bench

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और मेटा प्लेटफ़ॉर्म से एक जनहित याचिका (PIL) पर जवाब मांगा। इस याचिका में आरोप लगाया गया था कि संगठित साइबर अपराधी इंस्टाग्राम पर मेटा के कॉपीराइट लागू करने वाले सिस्टम का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं।

जस्टिस वी. कामेश्वर राव और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की डिवीज़न बेंच ने याचिकाकर्ता को यह भी निर्देश दिया कि वह एक हफ़्ते के अंदर अपनी शिकायत मेटा (Meta) को इलेक्ट्रॉनिक रूप से सौंपे। कोर्ट ने कंपनी से कहा कि वह शिकायत पर विचार करे और उचित आदेश जारी करे।

सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने कहा कि याचिका में उठाए गए मुद्दे केवल कॉपीराइट से जुड़े व्यक्तिगत विवादों से कहीं आगे के हैं।

कोर्ट ने कहा, "यह एक बड़ा मुद्दा है। उन्होंने (याचिकाकर्ता ने) साइबर क्राइम और डिजिटल जबरन वसूली से जुड़ा मुद्दा उठाया है।"

Justice V Kameswar Rao and Justice Manmeet Pritam Singh Arora

यह PIL डिजिटल कंटेंट क्रिएटर नितिन जोशी ने दायर की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि संगठित साइबर-एक्सटॉर्शन रैकेट (धमकाकर पैसे वसूलने वाले गिरोह) इंस्टाग्राम पर मेटा के कॉपीराइट लागू करने वाले सिस्टम का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। वे क्रिएटर्स के ओरिजिनल कंटेंट के खिलाफ झूठी कॉपीराइट शिकायतें दर्ज करते हैं।

वसूली करने वाले लोग अपने पुराने पोस्ट को ओरिजिनल कंटेंट क्रिएटर्स के नए कंटेंट से एडिट करते हैं और फिर एडिट किए गए पुराने पोस्ट को फ्लैग करके कॉपीराइट उल्लंघन का आरोप लगाते हैं।

याचिका के अनुसार, इसके कारण मिलने वाले कॉपीराइट स्ट्राइक से अक्सर अकाउंट सस्पेंड हो जाते हैं। इसके बाद, आरोपी शिकायतें वापस लेने के लिए लाखों रुपयों की मांग करते हैं।

PIL में कई मांगों के अलावा, इस कथित रैकेट की जांच के लिए एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाने, बिना इंसानी समीक्षा के सस्पेंड किए गए अकाउंट्स को बहाल करने, कॉपीराइट शिकायतों पर स्थायी कार्रवाई से पहले अनिवार्य इंसानी समीक्षा, शिकायत करने वालों की पहचान का खुलासा करने और जबरन वसूली या धोखाधड़ी से जुड़े मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक शिकायत निवारण सिस्टम की मांग की गई।

इसमें इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस एंड डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) रूल्स, 2021 के कुछ प्रावधानों को भी चुनौती दी गई, यह तर्क देते हुए कि वे बिना पूर्व सूचना के अकाउंट्स को डिसेबल करने की अनुमति देते हैं।

आज, मेटा की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट अरविंद दातार ने PIL की स्वीकार्यता पर सवाल उठाया। उन्होंने तर्क दिया कि इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी रूल्स में पहले से ही एक कानूनी शिकायत निवारण सिस्टम मौजूद है।

दातार ने कहा, "वे कह रहे हैं कि आपका (मेटा का) प्लेटफॉर्म खराब है और कोई इसका इस्तेमाल कॉपीराइट की समस्याएं पैदा करने के लिए कर रहा है। ये तथ्यों पर आधारित सवाल हैं। यह PIL नहीं हो सकती। मेरा कहना है कि शिकायत अधिकारी के पास आवेदन करें।"

जब कोर्ट ने पूछा कि क्या याचिकाकर्ता द्वारा उठाए गए मुद्दों का समाधान शिकायत अधिकारी द्वारा किया जा सकता है, तो दातार ने हामी भरी। हालांकि, कोर्ट ने देखा कि याचिका में किसी व्यक्तिगत कॉपीराइट विवाद की तुलना में व्यापक चिंताएं उठाई गई हैं।

दातार ने कहा कि याचिकाकर्ता की शिकायत मेटा के कॉपीराइट लागू करने वाले सिस्टम में किसी खराबी के बजाय तीसरे पक्ष द्वारा प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग से संबंधित थी। उन्होंने कहा कि गलत इरादे वाले लोग किसी भी सिस्टम का गलत फायदा उठा सकते हैं और मेटा के पास ऐसी शिकायतों से निपटने के लिए पहले से ही प्रक्रियाएं मौजूद हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि अगर कानूनी उपाय आज़माने के बाद भी याचिकाकर्ता संतुष्ट नहीं होता है, तो वह हाईकोर्ट के रिट अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल कर सकता है।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील तेजबीर सिंह ने तर्क दिया कि याचिका मेटा के कॉपीराइट लागू करने वाले सिस्टम के ख़िलाफ़ नहीं थी, बल्कि साइबर उगाही के लिए उसके कथित गलत इस्तेमाल के ख़िलाफ़ थी।

जोशी ने बताया कि अपना ओरिजिनल कंटेंट अपलोड करने के बाद याचिकाकर्ता को झूठे कॉपीराइट स्ट्राइक का सामना करना पड़ा, जिसके बाद उन्हें स्ट्राइक हटाने के बदले पैसे की मांग करने वाले ईमेल मिलने लगे।

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि ये मांगें अनजान ईमेल एड्रेस से आ रही थीं और शिकायत करने वालों की पहचान की कोई ठोस जांच-पड़ताल नहीं की गई थी।

मेटा की ओर से पेश वकील वरुण पाठक ने कहा कि हालांकि प्लेटफ़ॉर्म कॉपीराइट शिकायतों पर कार्रवाई के लिए ऑटोमेटेड टूल्स का इस्तेमाल करता है, लेकिन कोई भी ऑटोमेटेड सिस्टम पूरी तरह से गलती-मुक्त नहीं होता है।

तर्कों पर विचार करने के बाद, कोर्ट ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, गृह मंत्रालय और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया।

हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भले ही याचिकाकर्ता ने इसी तरह की स्थिति वाले लगभग 40 कंटेंट क्रिएटर्स का ज़िक्र किया था, लेकिन उन लोगों को अपने मामले के लिए अलग से कानूनी उपाय करने होंगे।

कोर्ट ने कहा, "आप दूसरे 40 अकाउंट्स और डिजिटल क्रिएटर्स का ज़िक्र कर रहे हैं, लेकिन उनकी शिकायत वैसी नहीं है। हमारे आदेश के आधार पर ऐसा नहीं होना चाहिए, वे अलग-अलग याचिका दायर कर सकते हैं।"

इस मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर को होगी।

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Delhi High Court seeks response from Centre, Meta on PIL alleging misuse of Meta's copyright rules