10 अक्टूबर को हुए विरोध-प्रदर्शनों और उन लोगों की हिरासत के मामले में सुप्रीम कोर्ट में कम से कम 15 याचिकाएं दायर की गई हैं, जो मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञान कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे थे। यह मांग मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) और भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के कामकाज को लेकर उनके तौर-तरीकों के विरोध में की गई थी।
दिल्ली में अलग-अलग युवा संगठनों और राजनीतिक पार्टियों के बुलाए गए विरोध प्रदर्शनों के दौरान, 10 और 11 अक्टूबर को बड़े पैमाने पर लोगों को हिरासत में लिया गया और प्रदर्शनकारियों के साथ-साथ पत्रकारों और वकीलों के साथ मारपीट की गई।
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं में रिट याचिकाएं, अवमानना की कार्यवाही, बंदी प्रत्यक्षीकरण (habeas corpus) की याचिकाएं और हस्तक्षेप की अर्जियां शामिल हैं। इनमें सार्वजनिक परिवहन पर लगी पाबंदियों, कथित तौर पर गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में लेने और वकीलों, पत्रकारों व प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई को चुनौती दी गई है।
ये याचिकाएं भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच के सामने सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हैं।
ये याचिकाएं सार्वजनिक परिवहन पर पाबंदियों के बारे में सुप्रीम कोर्ट के 9 अक्टूबर के निर्देशों और 11 अक्टूबर को हुई विशेष सुनवाई के बाद दायर की गई हैं। उस विशेष सुनवाई में कोर्ट ने अवमानना के नोटिस जारी किए थे और निर्देश दिया था कि शांतिपूर्ण सार्वजनिक आवाजाही और वकीलों व पत्रकारों के पेशेवर कामकाज में गैर-कानूनी तरीके से बाधा नहीं डाली जानी चाहिए।
कोर्ट अब अपने पहले के निर्देशों के पालन से जुड़ी कार्यवाही की जांच कर रहा है, जबकि कई अन्य याचिकाओं में विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कथित ज्यादतियों और लगाई गई पाबंदियों के खिलाफ अलग से राहत की मांग की गई है।
इनमें से कुछ याचिकाओं पर मंगलवार को सुनवाई होनी है।
अब तक पहचानी गई याचिकाएं और कार्यवाही इस प्रकार हैं:
1. एमए बेबी बनाम भारत संघ
इस याचिका में विरोध प्रदर्शनों के दौरान दिल्ली मेट्रो और रेलवे सेवाओं तथा लोगों की आवाजाही पर लगाई गई पाबंदियों को चुनौती दी गई है। 9 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को नियंत्रित तो किया जा सकता है, लेकिन उन पर पूरी तरह से रोक नहीं लगाई जानी चाहिए।
2. शैलेंद्र मणि त्रिपाठी बनाम गोविंद मोहन
वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी द्वारा दायर अवमानना याचिका में आरोप लगाया गया है कि दिल्ली मेट्रो स्टेशनों को बंद करने और रेलवे सेवाओं पर पाबंदियां लगाकर 9 अक्टूबर के निर्देशों का उल्लंघन किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना का प्रथम दृष्टया मामला पाए जाने के बाद इस मामले में केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार और DMRC की चेयरपर्सन डी. थारा को नोटिस जारी किया है।
3. मेनका गुरुस्वामी बनाम भारत संघ
तृणमूल कांग्रेस की सांसद और वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण (habeas corpus) याचिका में विरोध प्रदर्शनों के दौरान पूर्व मुख्यमंत्रियों अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी, पिनाराई विजयन और माणिक सरकार सहित राजनीतिक नेताओं की हिरासत को चुनौती दी गई है। इसमें उनकी हिरासत के खिलाफ न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की गई है।
बाद में हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा कर दिया गया, हालांकि कोर्ट ऐसी कार्रवाइयों की वैधता से जुड़े व्यापक मुद्दे पर सुनवाई करेगा।
4. अमन प्रसाद बनाम अनुराग कुमार
वकील अमन प्रसाद ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों के दौरान महिलाओं और वकीलों सहित प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित तौर पर अत्यधिक बल प्रयोग करने को लेकर दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार के खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्रवाई की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। याचिका में पुलिस कार्रवाई और लोगों की आवाजाही से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के पहले के निर्देशों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है।
5. पत्रकार अमान रस्तोगी की अवमानना याचिका
'मोलिटिक्स' (Molitics) से जुड़े पत्रकार अमान रस्तोगी ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों की कवरेज के दौरान पुलिस द्वारा कथित मारपीट को लेकर केंद्रीय गृह सचिव और दिल्ली पुलिस कमिश्नर के खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्रवाई की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। यह याचिका पत्रकारों को उनके पेशेवर कर्तव्यों का पालन करने के दौरान सुरक्षा देने वाले सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के कथित उल्लंघन से संबंधित है।
6. सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन बनाम भारत संघ
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने 10 अक्टूबर को विरोध प्रदर्शनों के दौरान सुप्रीम कोर्ट के पास वकीलों को कथित तौर पर हिरासत में लेने और उनके साथ दुर्व्यवहार करने की घटना पर स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। इसमें भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत जारी निषेधाज्ञा (prohibitory orders) का खुलासा करने, CCTV फुटेज को सुरक्षित रखने और अदालतों तक बिना किसी रुकावट के पहुँच सुनिश्चित करने के उपाय करने की भी मांग की गई है।
7. सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन बनाम भारत संघ
सुप्रीम कोर्ट के वकीलों की एक और प्रमुख संस्था, SCAORA ने 10 अक्टूबर को हुए विरोध मार्च के दौरान वकीलों को कथित तौर पर हिरासत में लेने और उनके साथ बदसलूकी करने की घटना की स्वतंत्र, निष्पक्ष और समय-सीमा के भीतर जांच की मांग की है। याचिका में शामिल पुलिसकर्मियों की पहचान करने, सबूत सुरक्षित रखने और डराने-धमकाने या बदले की कार्रवाई से सुरक्षा की भी मांग की गई है।
8. BNSS के तहत निषेधाज्ञा से जुड़ी याचिका
वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन द्वारा सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश की गई एक अलग याचिका में BNSS की धारा 163 के तहत लगाई गई पाबंदियों को चुनौती दी गई है। साथ ही, इसमें धारा 172 (कानूनी पुलिस आदेशों का पालन करने का नागरिकों का कर्तव्य और आदेश न मानने पर पुलिस की कार्रवाई करने की शक्तियां) के तहत पुलिस की शक्तियों के इस्तेमाल पर सवाल उठाए गए हैं। कोर्ट को वकीलों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कथित ज्यादतियों के बारे में भी जानकारी दी गई।
9. फ्री स्पीच कलेक्टिव बनाम भारत संघ
पत्रकारों के संगठन ने पत्रकारों को कथित तौर पर हिरासत में लेने और जबरन हटाने के मामले में अदालत की अवमानना की कार्रवाई की मांग की है। यह मांग सुप्रीम कोर्ट के 11 अक्टूबर के उस निर्देश के बावजूद की गई है जिसमें कहा गया था कि पत्रकारों, वकीलों और अन्य पेशेवरों को अपना काम करने से नहीं रोका जाना चाहिए।
10. फ्री स्पीच कलेक्टिव बनाम भारत संघ, रिट याचिका
एक अलग रिट याचिका में, उसी संगठन ने पत्रकारों के खिलाफ कथित पुलिस हिंसा की स्वतंत्र जांच, सबूतों को सुरक्षित रखने, मुआवज़े और विरोध प्रदर्शनों को कवर करने वाले मीडिया कर्मियों के साथ पुलिस के व्यवहार के लिए बाध्यकारी दिशानिर्देशों की मांग की है।
11. नेटवर्क ऑफ़ विमेन इन मीडिया, इंडिया की याचिका
संगठन ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है और विरोध प्रदर्शनों व पुलिस कार्रवाई की रिपोर्टिंग के दौरान पत्रकारों, खासकर महिला पत्रकारों को कथित तौर पर मनमाने ढंग से हिरासत में लेने, डराने-धमकाने और जबरन हटाने के खिलाफ सुरक्षा की मांग की है।
12. एए रहीम बनाम भारत संघ
CPI(M) के राज्यसभा सांसद ने 11 अक्टूबर के विरोध प्रदर्शनों के दौरान डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ़ इंडिया के सदस्यों को कथित तौर पर गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में लेने और हिरासत में मारपीट करने की स्वतंत्र जांच की मांग की है। याचिका में पुलिस रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने, घायल प्रदर्शनकारियों की मेडिकल जांच और विरोध प्रदर्शन से जुड़ी हिरासत के लिए सुरक्षा उपायों की भी मांग की गई है।
13. लॉयर्स एसोसिएशन फॉर कॉन्स्टिट्यूशन (LAFC)
LAFC ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। इसमें आरोप लगाया गया है कि 10 और 11 अक्टूबर को विरोध प्रदर्शनों के दौरान दिल्ली पुलिस ने उनके चार सदस्य वकीलों को गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में लिया और उनके साथ मारपीट की। वकील प्योली के माध्यम से दायर इस याचिका में वकीलों, महिलाओं, नाबालिगों, पत्रकारों और अन्य नागरिकों के खिलाफ पुलिस की ज्यादतियों का आरोप लगाया गया है।
14. नरेंद्र कुमार गोस्वामी की याचिका
वकील नरेंद्र कुमार गोस्वामी की याचिका में 9 और 10 अक्टूबर को जनपथ-कर्तव्य पथ क्रॉसिंग के चार किलोमीटर के दायरे में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को बंद करने को चुनौती दी गई है। याचिका में इन आदेशों की न्यायिक समीक्षा की मांग की गई है।
15. छात्रों के साथ मारपीट और प्रताड़ना का आरोप लगाने वाली अपूर्वानंद झा की याचिका
प्रोफेसर अपूर्वानंद झा ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों के दौरान छात्रों के साथ मारपीट और प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। सीनियर एडवोकेट नित्या रामकृष्णन ने मंगलवार को कोर्ट को बताया कि कथित दुर्व्यवहार की जानकारी और प्रभावित छात्रों की मेडिकल रिपोर्ट सरकार को सौंप दी गई है।
उन्होंने इन आरोपों पर जवाब मांगा। कोर्ट ने संकेत दिया कि मुख्य मामलों में अपना जवाब दाखिल करने के बाद सरकार खास आरोपों पर अतिरिक्त हलफनामे दाखिल कर सकती है।
16. INDIA ब्लॉक के नेताओं के सुप्रीम कोर्ट परिसर में आने को लेकर वकीलों की याचिका
चार वकीलों की ओर से दायर और सीनियर एडवोकेट गौरव भाटिया द्वारा पेश की गई एक याचिका, 12 अक्टूबर को राहुल गांधी और INDIA ब्लॉक के अन्य नेताओं के सुप्रीम कोर्ट परिसर में आने से जुड़ी है। याचिका में कोर्ट परिसर के अंदर राजनीतिक प्रदर्शनों पर रोक लगाने और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के खिलाफ टिप्पणी करने के लिए कांग्रेस पार्टी की केरल इकाई के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई करने की मांग की गई है।
17. स्वाति सिंह मलिक: महिला वकील ने मारपीट और ज़बरदस्ती हिरासत में रखने का आरोप लगाया
वकील स्वाति सिंह मलिक ने 10 अक्टूबर के विरोध प्रदर्शनों के दौरान वकीलों को हिरासत में लिए जाने से जुड़ी अवमानना की कार्यवाही में दखल देने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि चार महिला पुलिसकर्मियों ने उन्हें ज़बरदस्ती हिरासत में लिया और उनके साथ मारपीट की, जिससे उन्हें चोटें आईं।
मलिक ने यह भी दावा किया है कि उन्हें ज़बरदस्ती एक ऐसी पुलिस बस में बिठाया गया जहाँ हवा आने-जाने की ठीक से व्यवस्था नहीं थी और पुलिसकर्मियों ने संविधान की प्रस्तावना वाला वह पोस्टर फाड़ दिया जो उनके पास था। अर्ज़ी में संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 21 और 22 के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है।
18. पत्रकारों पर हमले को लेकर KUWJ की याचिका
केरल यूनियन ऑफ़ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (KUWJ) की दिल्ली यूनिट ने उन पत्रकारों पर हमले और उन्हें हिरासत में लिए जाने के मामले में कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है जो 10 और 11 अक्टूबर को दिल्ली में हो रहे विरोध प्रदर्शनों की कवरेज कर रहे थे।
राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के नेताओं द्वारा दायर याचिका, हालांकि विरोध प्रदर्शनों और हिरासत की कार्रवाई के दौरान दायर की गई थी, लेकिन यह काफ़ी अलग है क्योंकि इसमें SIR प्रक्रिया और वोटर लिस्ट से नाम हटाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं।
गांधी और विपक्षी दलों के अन्य नेताओं ने बड़े पैमाने पर वोटर लिस्ट से नाम हटाने और SIR प्रक्रिया में गड़बड़ियों के आरोपों को चुनौती दी है। याचिका में चुनाव आयोग के रिकॉर्ड पेश करने, वोटर लिस्ट से नाम हटाने की प्रक्रिया का स्वतंत्र ऑडिट करने और इस प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की गई है। आज सुनवाई के लिए यह याचिका लिस्ट नहीं की गई है।
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Delhi protests, assaults and detentions: The 18 petitions filed before Supreme Court