सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पैगंबर मोहम्मद के बारे में कथित अपमानजनक टिप्पणी करने के लिए बीजेपी माइनॉरिटी मोर्चा की नेता और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर नाज़िया इलाही खान के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग करने वाली मौखिक याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया।
जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस शील नागू की बेंच ने मामले का ज़िक्र करने वाले वकील से कहा कि वे इस बारे में एक औपचारिक याचिका दायर करें।
जस्टिस अमानुल्लाह ने कहा, "हमारे सिस्टम पर भरोसा रखें। आप याचिका दायर करके उसे आगे क्यों नहीं बढ़ाते? यही समस्या है। देश की हर संस्था को हिलाया जा रहा है और लोग शॉर्टकट तरीके अपनाते हैं।"
जस्टिस अमानुल्लाह ने आगे कहा कि संवेदनशील मामलों को सनसनीखेज नहीं बनाया जाना चाहिए और पहले स्थानीय अधिकारियों से संपर्क किया जाना चाहिए।
जस्टिस अमानुल्लाह ने कहा, "संवेदनशील मामलों में आपको उनके नतीजों को समझना चाहिए। अगर किसी व्यक्ति ने कुछ गैर-कानूनी किया है, तो मामले को स्थानीय स्तर पर ही रखें और उस व्यक्ति पर कार्रवाई करें। लेकिन इसे सनसनीखेज न बनाएं। अगर फिर भी बात न बने, तो हमारे पास आएं। हम मानते हैं कि मामला गंभीर है, लेकिन कानूनी रास्ता अपनाएं, शॉर्टकट नहीं।"
इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) की पुलिस ने पिछले महीने पैगंबर मुहम्मद के बारे में कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी करने के लिए खान के खिलाफ दो FIR दर्ज की थीं।
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