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एमराल्ड हाइट्स इंटरनेशनल स्कूल ने बच्चों के सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया

याचिका में केंद्र सरकार से एक ऐसा रेगुलेटरी फ़्रेमवर्क बनाने या एक तय उम्र से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक लगाने का निर्देश देने की मांग की गई है, जिसे लागू किया जा सके।

Bar & Bench

एमराल्ड हाइट्स इंटरनेशनल स्कूल और उसके डायरेक्टर सिद्धार्थ सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर बच्चों के सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर रोक लगाने और उन्हें ऑनलाइन खतरों से बचाने के लिए एक लागू करने योग्य रेगुलेटरी फ्रेमवर्क बनाने की मांग की है।

याचिका में कहा गया है कि बच्चों को उनके स्वास्थ्य, सम्मान और विकास के लिए नुकसानदेह माहौल से बचाना राज्य की संवैधानिक ज़िम्मेदारी है, और इसे सिर्फ़ माता-पिता की देखरेख या कंपनियों की मर्ज़ी पर नहीं छोड़ा जा सकता।

इसमें केंद्र सरकार से सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा के लिए एक खास, व्यापक और लागू करने योग्य रेगुलेटरी फ़्रेमवर्क बनाने, नोटिफ़ाई करने और लागू करने का निर्देश देने की मांग की गई है।

इसके अलावा, याचिका में एक तय उम्र से कम उम्र के बच्चों द्वारा सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर रोक लगाने और उससे ज़्यादा उम्र वालों के लिए इसके इस्तेमाल को रेगुलेट करने, या खास प्लेटफ़ॉर्म पर बच्चों के अकाउंट पर उम्र के आधार पर लागू होने वाली पाबंदियां लगाने की मांग की गई है।

याचिका में संविधान के अनुच्छेद 39(f) का ज़िक्र किया गया है, जो राज्य को यह सुनिश्चित करने का निर्देश देता है कि बच्चों का विकास स्वस्थ तरीके से और आज़ादी व सम्मान के माहौल में हो।

याचिका में अनुच्छेद 39(e) का भी हवाला दिया गया है, जो बच्चों की कम उम्र का फ़ायदा उठाकर उनके शोषण से सुरक्षा से संबंधित है।

यह अनुच्छेद 21, अनुच्छेद 47 के तहत राज्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी ज़िम्मेदारियों और बच्चों के अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन पर भी आधारित है।

याचिका में सोशल मीडिया के इस्तेमाल से जुड़े कई तरह के नुकसानों की ओर इशारा किया गया है, जिनमें डिप्रेशन, एंग्जायटी, लत (compulsive use), दूसरों से तुलना, अपनी शारीरिक बनावट से असंतुष्टि, खाने-पीने की गलत आदतें, नींद में खलल और साइबर बुलिंग शामिल हैं। इसमें ग्रूमिंग, यौन शोषण, अंतरंग तस्वीरों के ज़रिए दबाव बनाना, हिंसक, यौन रूप से स्पष्ट, खुद को नुकसान पहुंचाने और आत्महत्या से जुड़े कंटेंट के संपर्क में आना, साथ ही व्यवहार की प्रोफ़ाइलिंग और लत लगाने वाले डिज़ाइन जैसे मुद्दों की ओर भी इशारा किया गया है।

याचिकाकर्ताओं के अनुसार, ऐसे नुकसान तब तक बिना ध्यान में आए पनप सकते हैं जब तक कि गंभीर नुकसान न हो जाए, और सिर्फ़ भरोसा दिलाने वाले बयानों, प्लेटफ़ॉर्म के स्वैच्छिक उपायों या माता-पिता के कंट्रोल से इनका ठीक से समाधान नहीं किया जा सकता।

याचिका में यह घोषणा करने की मांग की गई है कि इन पहले से पता चल सकने वाले जोखिमों से बच्चों को बचाने में लगातार नाकामी मनमानी है और यह समानता के अधिकार और जीवन के अधिकार सहित मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।

यह याचिका वकील वैभव चौधरी के ज़रिए दायर की गई थी।

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Emerald Heights International School moves Supreme Court seeking curbs on children's social media use