कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने बेंगलुरु सिटी सिविल और सेशंस कोर्ट में मानहानि का मुकदमा दायर किया है। इसमें उन्होंने 42 मीडिया संगठनों, डिजिटल प्लेटफॉर्म और अन्य प्रतिवादियों को ऐसे वीडियो प्रकाशित या प्रसारित करने से रोकने की मांग की है, जिनमें उन्हें कथित तौर पर हनी-ट्रैप विवाद से जोड़ा गया है।
एडिशनल सिटी सिविल और सेशंस जज बी. पुष्पांजलि ने सोमवार को आपत्तिजनक वीडियो हटाने और उनके आगे प्रकाशन पर रोक लगाने के लिए अंतरिम निर्देश मांगने वाली अर्जी पर आदेश सुरक्षित रख लिया। कोर्ट 13 अक्टूबर को अपना आदेश सुनाएगी।
सिद्धारमैया ने प्रतिवादियों को दो वीडियो और उनसे जुड़े क्लिप, स्क्रीनशॉट, ट्रांसक्रिप्ट या रिपोर्ट—जिनमें उन वीडियो में लगाए गए आरोप दोहराए गए हों—को ब्रॉडकास्ट, पब्लिश या शेयर करने से रोकने के लिए स्थायी निषेधाज्ञा की मांग की है।
उन्होंने इन वीडियो को हटाने और संबंधित डिजिटल प्लेटफॉर्म से इस कंटेंट तक पहुंच को बंद करने का निर्देश देने की भी मांग की है।
इस मुकदमे में 42 प्रतिवादियों को शामिल किया गया है, जिनमें फ्रीडम टीवी कन्नड़, यूट्यूब चैनल 'कर्नाटक हनी ट्रैप', कई कन्नड़ और अंग्रेजी अखबार और टीवी समाचार चैनल, व्हाट्सएप, यूट्यूब एलएलसी, गूगल इंडिया, याहू इंडिया और फेसबुक इंडिया शामिल हैं।
याचिका के अनुसार, इस मामले में पहला वीडियो 'कर्नाटक हनी ट्रैप' ने 27 सितंबर को "कर्नाटक हनी ट्रैप नेक्सस पार्ट 1" टाइटल से अपलोड किया था।
सिद्धारमैया का आरोप है कि वीडियो और उसके साथ दिए गए कैप्शन का मकसद उन्हें ब्लैकमेलिंग के आरोपों, कथित हनी-ट्रैप नेटवर्क और मुख्यमंत्री के तौर पर उनके कार्यकाल के दौरान हुई राजनीतिक घटनाओं से जोड़ना था।
कैप्शन में कथित तौर पर सवाल उठाए गए थे कि क्या सिद्धारमैया को ब्लैकमेल किया गया था और क्या इस साल की शुरुआत में मुख्यमंत्री पद से उनके इस्तीफे में किसी आपत्तिजनक सामग्री की भूमिका थी।
पूर्व मुख्यमंत्री ने इन आरोपों को साफ तौर पर खारिज करते हुए इन्हें झूठा, बेबुनियाद और उनकी प्रतिष्ठा और राजनीतिक कद को नुकसान पहुंचाने की कोशिश बताया है।
दूसरा पब्लिकेशन एक घंटे का प्रोग्राम है जिसे 'फ्रीडम टीवी कन्नड़' ने 2 अक्टूबर, 2026 को "LIVE: कर्नाटक की राजनीति में सबसे बड़ा CD धमाका?" टाइटल से स्ट्रीम या अपलोड किया था।
याचिका के मुताबिक, प्रोग्राम में एक कथित CD का बार-बार ज़िक्र करके और आरोपों की पुष्टि करने वाली स्वतंत्र रूप से वेरिफ़ाई की गई सामग्री दिखाए बिना एक प्रमुख राजनीतिक नेता की संलिप्तता का संकेत देकर विवाद को सनसनीखेज बनाया गया।
मुकदमे में एक कथित रिकॉर्डिंग का भी ज़िक्र है जिसमें एक महिला कथित तौर पर दावा करती है कि 2011 के आसपास नाबालिग होने पर उसका यौन शोषण किया गया था और वह सिद्धारमैया की पहचान उस व्यक्ति के तौर पर करती है जो कथित तौर पर इसमें शामिल था।
शिकायत के अनुसार, यह रिकॉर्डिंग कथित घटना के लगभग 15 साल बाद, इस साल सितंबर में ही सार्वजनिक हुई।
सिद्धारमैया का तर्क है कि सामग्री में आरोपों की पुष्टि करने वाली कोई समकालीन शिकायत, स्वतंत्र गवाह का बयान या अन्य स्वतंत्र रूप से वेरिफ़ाई किया जा सकने वाला सबूत नहीं है। उन्होंने बातचीत को रिकॉर्ड और पेश करने के तरीके पर भी सवाल उठाए हैं और आरोप लगाया है कि सवाल इस तरह से तैयार किए गए थे कि एक खास नैरेटिव सामने आए।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि साथ में दी गई राजनीतिक कमेंट्री और पब्लिकेशन का समय उन्हें सार्वजनिक रूप से बदनाम करने की कोशिश थी।
यह तर्क दिया गया कि वीडियो के लगातार उपलब्ध रहने से क्लिप, एडिट किए गए वर्शन, स्क्रीनशॉट और सोशल मीडिया पोस्ट के ज़रिए इनके और फैलने का खतरा बना रहता है और इससे उनकी प्रतिष्ठा को अपूरणीय क्षति होती है।
पूर्व मुख्यमंत्री की ओर से सीनियर एडवोकेट विक्रम हुइलगोल पेश हुए। यह याचिका वकील शताभिष शिवन्ना और प्रवीण कामथ ने दायर की थी।
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Ex-CM Siddaramaiah sues media organisations over honey-trap allegations