दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को कई अहम कानूनी सवाल तय किए। इन सवालों पर कोर्ट उस मुकदमे में विचार करेगा जो एक्टर अमिताभ बच्चन की पोती आराध्या बच्चन ने इंटरनेट पर अपने बारे में गलत जानकारी फैलाए जाने के खिलाफ दायर किया है।
अन्य सवालों के अलावा, जस्टिस अनूप जयराम भंभानी ने यह सवाल उठाया है कि किसी मशहूर पारिवारिक नाम से जुड़ी प्रतिष्ठा पीढ़ियों तक किस हद तक बनी रह सकती है।
जज ने कहा, "ट्रेडमार्क और उससे जुड़ी प्रतिष्ठा की अहमियत इस बात से बनती है कि कोई प्रोडक्ट या सर्विस दी गई है। लेकिन, जब बात किसी व्यक्ति की हो, तो यह मामला कुछ अलग होता है। किसी खास सरनेम (उपनाम) की प्रतिष्ठा उस व्यक्ति की उपलब्धियों या किसी खास क्षेत्र में उनकी कामयाबी वगैरह की वजह से होती है। तो क्या वह प्रतिष्ठा - जिसे आप असल में एक ट्रेडमार्क की तरह पेश कर रहे हैं - क्या वह पीढ़ियों तक आगे बढ़ती है? और अगर ऐसा है, तो किस हद तक?"
कोर्ट ने बच्चन के केस में विचार करने के लिए कानून से जुड़े ये सवाल तय किए:
- अगर किसी परिवार के नाम की वैसी ही प्रतिष्ठा (reputation) है जैसी किसी ट्रेडमार्क की होती है, तो परिवार के नाम की यह प्रतिष्ठा कितनी पीढ़ियों तक बनी रहती है?
- क्या फेक न्यूज़ (गलत खबर), भले ही वह बहुत ही घिनौनी हो, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) अधिकारों का उल्लंघन मानी जा सकती है? अगर हाँ, तो किस तरह के IP अधिकार का उल्लंघन होता है?
- क्या मानहानि (slander और libel) या प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाने वाले किसी अन्य रूप को इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी अधिकारों की मान्यता प्राप्त अवधारणा के साथ मिलाया जा सकता है?
कोर्ट ने कहा, "ये मेरे मन में उठने वाले सामान्य सवाल हैं। यह पूरी सूची नहीं है।"
आराध्या बच्चन ने अपने पिता अभिषेक बच्चन के ज़रिए 2023 में हाई कोर्ट में केस दायर किया था। इसका मकसद अलग-अलग YouTube चैनलों और 'जॉन डो' प्रतिवादियों (अज्ञात लोगों) को ऐसा कंटेंट पब्लिश करने से रोकना था जो बच्चन परिवार के नाम को खराब करता हो, उनकी निजी ज़िंदगी के बारे में जानकारी देता हो या मानहानि करने वाला हो।
इस केस में खास तौर पर YouTube के कई वीडियो का ज़िक्र किया गया था, जिनमें दावा किया गया था कि आराध्या बहुत बीमार हैं और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। एक वीडियो में तो यह भी दावा किया गया था कि उनकी मौत हो गई है। वीडियो में यह भी आरोप लगाया गया था कि बच्चन परिवार ने बच्ची को तुरंत मेडिकल मदद दिलाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया।
अप्रैल 2023 में, कोर्ट ने आराध्या बच्चन के पक्ष में अंतरिम आदेश (interim injunction) जारी किया और प्रतिवादियों को उनकी सेहत के बारे में कोई भी जानकारी पोस्ट करने से रोक दिया।
जस्टिस सी. हरि शंकर ने उस समय कहा था, "हर बच्चे को सम्मान और इज़्ज़त के साथ व्यवहार पाने का अधिकार है, चाहे वह किसी सेलिब्रिटी का बच्चा हो या आम आदमी का। किसी बच्चे के बारे में गलत जानकारी फैलाना, खासकर उसकी शारीरिक या मानसिक सेहत के बारे में, कानून की नज़र में बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।"
आज जस्टिस भंभानी के सामने इस मामले की सुनवाई के दौरान 'पर्सनैलिटी राइट्स' (व्यक्तित्व अधिकार) के दायरे पर चर्चा हुई।
कोर्ट ने टिप्पणी की, "पर्सनैलिटी राइट्स की अवधारणा का दायरा बहुत तेज़ी से और अनियंत्रित रूप से बढ़ रहा है। हर चीज़ पर्सनैलिटी राइट्स बन गई है। लेकिन किसके पर्सनैलिटी राइट्स?"
बच्चन की ओर से पेश होते हुए वकील प्रवीण आनंद ने तर्क दिया कि इस मामले में पूरे बच्चन परिवार के नाम और प्रतिष्ठा का सवाल है। कोर्ट के इस सवाल पर कि क्या किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए ट्रेडमार्क जैसे अधिकारों का इस्तेमाल किया जा सकता है, उन्होंने कहा,
"प्रतिष्ठा सिर्फ़ ट्रेडमार्क में नहीं होती। 'पासिंग ऑफ़' कानून ट्रेडमार्क की तुलना में कहीं ज़्यादा व्यापक सुरक्षा देता है। पूरे परिवार की तस्वीरें और शब्दों का इस्तेमाल करके यह आभास दिया जाता है कि इस युवा लड़की की मौत हो गई है और उसे कैंसर था। ये दोनों बातें झूठी हैं और इनसे बहुत नुकसान हो रहा है। इसमें बच्चन नाम और परिवार की तस्वीरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। अभिषेक बच्चन भी इस मामले में एक पक्ष हैं।"
इस मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी।
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How far does reputation of a famous family name extend? Delhi HC asks in Aaradhya Bachchan case