Justice RC Chavan  
वादकरण

न्यायमूर्ति आर.सी. चव्हाण ने महाराष्ट्र समान नागरिक संहिता (UCC) पैनल से इस्तीफा दिया; पैनल के कामकाज को लेकर चिंता जताई

पूर्व जज ने कहा कि बिना किसी सार्थक विचार-विमर्श के, समिति की फीडबैक प्रक्रिया को केवल 'हां या ना' वाले जवाबों तक सीमित कर दिया गया।

Bar & Bench

बॉम्बे हाई कोर्ट के पूर्व जस्टिस आर.सी. चव्हाण ने महाराष्ट्र की यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) ड्राफ्टिंग कमेटी से इस्तीफ़ा दे दिया है। उन्होंने कमेटी के कामकाज, लोगों की राय लेने के लिए सवाल-जवाब की लिस्ट को जल्दबाजी में तैयार करने और एक ऐसे व्यक्ति की सक्रिय भागीदारी पर गंभीर चिंता जताई है जिसे कमेटी में नियुक्त नहीं किया गया था और जो उसका सदस्य भी नहीं था।

सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जज जस्टिस रंजना देसाई की अध्यक्षता वाली सात सदस्यों की कमिटी ने हाल ही में अपनी दूसरी बैठक ऑनलाइन की। चेयरपर्सन, सदस्यों और प्रधान सचिव (कानून और न्याय) को भेजे गए इस्तीफ़े के एक साफ़-सुथरे ईमेल में जस्टिस चव्हाण ने बताया कि अहम फ़ैसले लेने की प्रक्रियाओं को नज़रअंदाज़ किया जा रहा था।

Justice Ranjana Prakash Desai

जस्टिस चव्हाण ने बताया कि मीटिंग के दौरान तीन सदस्यों ने अपनी राय रखने की कोशिश की, जिसमें यह सुझाव भी शामिल था कि प्रश्नावली (questionnaire) का एकेडमिक एक्सपर्ट्स से प्रोफेशनल तरीके से मूल्यांकन कराया जाए।

हालांकि, इन सुझावों का कोई मतलब नहीं रह गया क्योंकि चेयरपर्सन पहले ही डॉक्यूमेंट को फाइनल कर चुकी थीं।

जस्टिस चव्हाण ने लिखा, "माननीय चेयरपर्सन ने पहले ही अपने द्वारा फाइनल की गई प्रश्नावली सर्कुलेट कर दी थी और कहा था कि वेबसाइट तैयार होने के बाद इसे अपलोड कर दिया जाएगा।"

पूर्व जज ने लोगों की राय लेने के मामले में कमेटी के सीमित दायरे पर गहरी निराशा जताई।

जज ने कहा, "अपनी राय रखने की मेरी कोशिश... इस गलतफहमी के कारण थी कि हमारी इस कवायद का मकसद महाराष्ट्र के लोगों की राय जानना और देर से शादी, विकृतियों, बांझपन, अस्थिर शादियों, विवाद सुलझाने की लंबी प्रक्रिया आदि जैसी समस्याओं के समाधान के लिए आम सहमति बनाना था।"

उन्हें एहसास हुआ कि अब मकसद सिर्फ 'हां या ना' में जवाब इकट्ठा करना रह गया है ताकि डेटा का एनालिसिस आसान हो सके।

जस्टिस चव्हाण ने कमेटी की वेबसाइट में बदलाव को लेकर बाहरी व्यक्ति, पूर्व IAS अधिकारी शत्रुघ्न सिंह की भागीदारी और निर्देशों पर भी सवाल उठाए।

उन्होंने आशंका जताई कि क्या बाहरी व्यक्ति पर यह निर्भरता राज्य के अधिकारियों की अपनी काबिलियत को लेकर किसी डर की वजह से थी।

जज ने कहा, "इस समस्या को हल करने के लिए, मैं अभी इस्तीफा देकर कमेटी से अपनी सीट छोड़ रहा हूं, ताकि सरकार तुरंत खाली जगह भर सके। जल्द जारी होने वाला कोई आदेश मुझे उन लोगों को यह बताने में मदद करेगा जो मुझसे इस उम्मीद में मिलते हैं कि मैं उनकी राय कमेटी के सामने रखूंगा, कि उन्हें यह खुद करना चाहिए। इससे मुझे लोगों से बातचीत न करने की पाबंदी से भी राहत मिलेगी। अब एक स्वतंत्र नागरिक के तौर पर, मैं अपनी राय रखने के लिए आजाद रहूंगा।"

महाराष्ट्र सरकार ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है।

और अधिक पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें


Justice RC Chavan resigns from Maharashtra Uniform Civil Code panel; flags concerns over its functioning