कर्नाटक हाईकोर्ट ने सोमवार को राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह ऐसे सबूत पेश करे जिनसे यह पता चल सके कि WhatsApp के ज़रिए भेजी गई एक फ़र्ज़ी "शादी के निमंत्रण" वाली APK फ़ाइल से जुड़े साइबर धोखाधड़ी के मामले में LegalPay Technology Private Limited कैसे जुड़ी हुई थी [Legal Pay Technology Private Limited बनाम कर्नाटक राज्य]।
जस्टिस वी. श्रीशानंदा ने यह निर्देश तब दिया जब वे 'लीगलपे' (LegalPay) की उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहे थे, जिनमें हुलिमावु पुलिस द्वारा कथित साइबर धोखाधड़ी के सिलसिले में दर्ज तीन आपराधिक मामलों को रद्द करने की मांग की गई थी।
कोर्ट ने आदेश दिया, "साथ ही, इस मामले में आगे बढ़ने और इस रिट याचिका पर उचित आदेश पारित करने के लिए, जांच एजेंसी (चाहे वह हुलिमावु पुलिस स्टेशन हो या साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन) के लिए यह ज़रूरी है कि वह कथित धोखाधड़ी में याचिकाकर्ता की संलिप्तता के बारे में शुरुआती सबूत (प्राइमा फ़ेशी मटीरियल) लिखित रूप में रिकॉर्ड पर रखे।"
इस धोखाधड़ी में WhatsApp पर शादी के निमंत्रण के रूप में एक फ़ाइल भेजी गई थी। आरोप है कि फ़ाइल के लिंक पर क्लिक करने से धोखेबाज़ों को बिना अनुमति के पैसे ट्रांसफर हो गए। इस मामले में तीन शिकायतें दर्ज की गईं। शिकायतों के अनुसार, LegalPay पेमेंट गेटवे के ज़रिए लगभग ₹12.5 लाख ट्रांसफर किए गए।
मार्च और अप्रैल 2026 के दौरान, शिकायतकर्ताओं BK नागेशिया, सुभाष चंद्र जुजार्थ और वशिष्ठ नारायण झा को क्रमशः ₹7,44,989, ₹2,69,729 और ₹2,34,917 का नुकसान हुआ।
उनकी शिकायतों के आधार पर, हुलिमावु पुलिस ने इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट, 2000 की धारा 66(C) और 66(D) और BNS, 2023 की धारा 318(4) और 319(2) के तहत तीन अलग-अलग FIR दर्ज कीं।
FIR में LegalPay को आरोपी बनाया गया था। बाद में LegalPay ने FIR रद्द करने के लिए हाई कोर्ट में याचिका दायर की। कोर्ट ने पहले ही LegalPay के अधिकारियों को इस मामले में गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा दी थी।
आज, LegalPay के वकील, सीनियर एडवोकेट MS श्यामसुंदर ने तर्क दिया कि इंटरमीडियरी पेमेंट गेटवे के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू नहीं की जा सकती थी।
उन्होंने कहा कि अगर राज्य यह साबित कर देता है कि धोखाधड़ी की पूरी रकम LegalPay के खाते में जमा की गई थी, तो वे अपनी याचिकाएं वापस ले लेंगे।
कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह उस खाते की पहचान करने वाली रिपोर्ट हासिल करे जिसमें कथित तौर पर धोखाधड़ी से हासिल की गई रकम जमा है।
सीनियर वकील श्यामसुंदर से बात करते हुए कोर्ट ने आगे कहा,
"सरकार का कहना है कि धोखाधड़ी की पूरी रकम LegalPay के खाते में है। मैंने सरकार से कहा है कि वे इस बात की रिपोर्ट लें कि पैसा किसके खाते में है। अगर रकम आपके खाते में है, तो याचिकाएं खारिज कर दी जाएंगी। अगर रकम LegalPay के खाते में नहीं है, तो आपको सुरक्षा दी जाएगी।"
इस बीच, हाई कोर्ट के सरकारी वकील (HCGP) वहीद ने बताया कि आरोपों की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार मामले की जांच हुलिमावु पुलिस स्टेशन से साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में ट्रांसफर करने पर विचार कर रही है।
उन्होंने कहा कि मौखिक आदेश के बाद शिकायतें साइबर क्राइम पुलिस स्टेशनों को भेज दी गई थीं। हालांकि, जस्टिस श्रीशानंद ने औपचारिक ट्रांसफर नोटिफिकेशन की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।
जज ने टिप्पणी की "मौखिक आदेश का कोई महत्व नहीं है। इसके लिए नोटिफिकेशन होना चाहिए। आपको जांच का काम अंतिम रिपोर्ट दाखिल करने के अधिकार के साथ सौंपना चाहिए। आप बार-बार वही गड़बड़ी या गलती नहीं कर सकते"
इसलिए, कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि अगर जांच ट्रांसफर की जाती है, तो साइबर क्राइम पुलिस को मामले की जांच करने और अंतिम रिपोर्ट दाखिल करने के लिए अधिकृत करने वाला औपचारिक नोटिफिकेशन रिकॉर्ड पर रखा जाए।
कोर्ट ने चार्जशीट में जांच अधिकारी और उनके पद की पहचान करने के महत्व पर भी ज़ोर दिया।
कोर्ट ने आगे कहा कि चार्जशीट के हर कॉलम का एक खास मकसद होता है और उसे उसी के अनुसार भरा जाना चाहिए।
इस मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को होगी।
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Karnataka High Court asks State to submit material linking LegalPay to "marriage invite" cyberfraud