केरल हाईकोर्ट ने सोमवार को एक ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि वह मलयालम एक्ट्रेस अंसीबा हसन की उस याचिका पर फिर से विचार करे, जिसमें एक्ट्रेस लक्ष्मी प्रिया और ऑनलाइन मीडिया आउटलेट 'कैन चैनल मीडिया' के दो प्रतिनिधियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की गई थी [अंसीबा हसन बनाम केरल राज्य और अन्य]।
यह मामला सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो से जुड़ा है, जिसमें लक्ष्मीप्रिया ने 'कैन चैनल' को एक इंटरव्यू दिया था। हसन का आरोप है कि इस इंटरव्यू में उनके खिलाफ़ यौन प्रकृति की टिप्पणियां की गईं, जिनका मकसद उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाना और उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना था।
उन्होंने कहा कि लक्ष्मीप्रिया की टिप्पणियां और इस तरह के कंटेंट का प्रसार संज्ञेय आपराधिक अपराधों के दायरे में आता है।
हालांकि, 27 जुलाई को एर्नाकुलम के ज्यूडिशियल फर्स्ट क्लास मजिस्ट्रेट ने इस मामले में FIR दर्ज करने का आदेश देने की उनकी याचिका खारिज कर दी थी। हसन ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
आज, जस्टिस जोबिन सेबेस्टियन ने ट्रायल कोर्ट को मामले पर फिर से विचार करने का आदेश दिया।
हाईकोर्ट ने आदेश दिया, "मामले को नए सिरे से विचार के लिए संबंधित मजिस्ट्रेट के पास भेजा जा रहा है। मजिस्ट्रेट शिकायत में लगाए गए आरोपों और रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री की स्वतंत्र रूप से जांच करेंगे और कानून के अनुसार यह तय करेंगे कि क्या आरोप प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध का मामला बनाते हैं और यदि हां, तो क्या परिस्थितियां पुलिस जांच का आदेश देने के लिए उचित हैं। मजिस्ट्रेट इस बात पर भी विचार करेंगे कि क्या सबूत जुटाने के लिए पुलिस जांच जरूरी है, जिन्हें शिकायतकर्ता खुद प्रभावी ढंग से हासिल नहीं कर सकतीं।"
यह मामला लक्ष्मी प्रिया और हसन के बीच चल रहे झगड़े के दौरान लक्ष्मी प्रिया द्वारा 'कैन चैनल मीडिया' को दिए गए एक इंटरव्यू से शुरू हुआ।
हसन ने लक्ष्मी प्रिया, 'कैन चैनल मीडिया' के मालिक सुकुमार और इंटरव्यू लेने वाले सुरेश के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि इन लोगों ने उन्हें 'अनैतिक चरित्र वाली महिला' के तौर पर पेश किया और इस तरह भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) की धारा 75 (iv) (यौन उत्पीड़न) और धारा 79 (महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाना) के तहत अपराध किए।
उन्होंने इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट, 2000 की धारा 67 (इलेक्ट्रॉनिक रूप में अश्लील सामग्री प्रकाशित/प्रसारित करना) और धारा 67A (इलेक्ट्रॉनिक रूप में यौन रूप से स्पष्ट सामग्री प्रकाशित/प्रसारित करना) और केरल पुलिस एक्ट, 2011 की धारा 119(a) (महिलाओं के खिलाफ अत्याचार के लिए सजा) के तहत भी अपराध किए जाने का आरोप लगाया।
मजिस्ट्रेट ने पुलिस से रिपोर्ट मांगी। रिपोर्ट में कहा गया कि कोई संज्ञेय अपराध (cognisable offence) नहीं पाया गया और हसन इसके बजाय मानहानि की निजी शिकायत दर्ज करा सकती हैं।
पुलिस रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए, मजिस्ट्रेट ने FIR दर्ज करने का आदेश देने से इनकार कर दिया।
इसके बाद हसन ने वकील मुहम्मद फिरदौस एवी और जेंटल सीडी के ज़रिए हाई कोर्ट में याचिका दायर कर इस फैसले को चुनौती दी।
हाईकोर्ट ने अब मामले को वापस ट्रायल कोर्ट के पास भेज दिया है।
इसी से जुड़ी एक और बात यह है कि इससे पहले एक मजिस्ट्रेट ने हसन की शिकायत पर FIR दर्ज करने का आदेश दिया था। यह शिकायत अभिनेता टिनी टॉम के खिलाफ थी, जिन्होंने 'एसोसिएशन ऑफ मलयालम मूवी आर्टिस्ट्स' (AMMA) में चर्चा के दौरान हसन के बारे में कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी की थी।
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Kerala High Court asks trial court to reconsider Ansiba Hassan's plea for FIR against Lakshmi Priya