Advocates with Kerala High Court  
वादकरण

केरल हाईकोर्ट ने झूठे हलफनामे के सत्यापन को लेकर वकील के खिलाफ की गई प्रतिकूल टिप्पणियां हटाईं

कोर्ट की डिवीज़न बेंच ने कहा कि भले ही सिंगल जज की टिप्पणियों का मकसद सिर्फ़ युवा वकील को सावधान करना था, लेकिन उन्हें फ़ैसले में बने रहने देने से उनके पेशेवर भविष्य पर स्थायी असर पड़ सकता है।

Bar & Bench

केरल हाई कोर्ट ने मंगलवार को एक युवा वकील के खिलाफ कोर्ट की सिंगल जज बेंच की ओर से की गई प्रतिकूल टिप्पणियों को हटा दिया। ये टिप्पणियां बैंक अकाउंट फ्रीज करने के मामले में अपने क्लाइंट को गलत बयानों वाला हलफनामा दाखिल करने देने के आरोप में की गई थीं।

जस्टिस देवन रामचंद्रन और जस्टिस बसंत बालाजी की डिवीज़न बेंच ने कहा कि हालांकि युवा वकीलों को उनके पेशेवर कर्तव्यों के बारे में सावधान करने के लिए ये सख्त टिप्पणियां की गई थीं, लेकिन ऐसी टिप्पणियां वकील के कानूनी करियर पर हमेशा के लिए असर डाल सकती हैं।

इसलिए, कोर्ट रिकॉर्ड से ऐसी टिप्पणियों को हटाने पर सहमत हो गया।

कोर्ट ने कहा, "इसमें कोई शक नहीं कि फैसले की भाषा थोड़ी सख्त थी, लेकिन हमारा मानना ​​है कि ऐसा जानबूझकर नहीं किया गया था, बल्कि वकील को सावधान करने के लिए किया गया था ताकि वे भविष्य में अधिक सतर्क रहें। इसके बावजूद, फैसले के उन हिस्सों को बिना किसी बदलाव के छोड़ना हमारे लिए उचित नहीं होगा जो वकील के खिलाफ लगते हैं, क्योंकि इसका निश्चित रूप से उनके भविष्य पर हमेशा के लिए असर पड़ेगा।"

Justice Devan Ramachandran and Justice Basant Balaji

कोर्ट ने एक वकील (अपीलकर्ता) की याचिका पर यह आदेश दिया। इस वकील ने पहले एक मुवक्किल (याचिकाकर्ता) की ओर से फेडरल बैंक में मौजूद बैंक अकाउंट को अनफ्रीज़ (चालू) कराने की याचिका में पैरवी की थी।

17 अगस्त को, जस्टिस एमए अब्दुल हकीम ने याचिकाकर्ता द्वारा जवाब वाले हलफनामे में गलत बयान देने की बात नोट करते हुए याचिका खारिज कर दी थी।

जज ने ऐसे गलत हलफनामों को प्रमाणित करने के लिए याचिकाकर्ता के वकील की भी आलोचना की और इस बात पर ज़ोर दिया कि वकीलों का यह कर्तव्य है कि वे मुवक्किलों को अपनी दलीलों में गलत बयान देने से रोकें।

अपने खिलाफ की गई टिप्पणियों से नाराज़ होकर, याचिकाकर्ता के वकील (अपीलकर्ता) ने हाईकोर्ट की डिवीज़न बेंच के सामने अपील दायर की।

अपीलकर्ता-वकील की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट जे साई दीपक ने आज कहा कि उक्त वकील ने केवल अपने मुवक्किल द्वारा दिए गए दस्तावेज़ कोर्ट के सामने रखे थे और उन्हें उन दस्तावेज़ों की सामग्री या बाद में उनकी व्याख्या कैसे की गई, इसके लिए ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

सीनियर वकील ने आगे कहा कि हालांकि अदालतें बार के युवा सदस्यों का मार्गदर्शन कर सकती हैं, लेकिन आलोचना उनके पेशेवर भविष्य की कीमत पर नहीं होनी चाहिए।

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Kerala High Court deletes its adverse remarks against advocate over false affidavit attestation