केरल उच्च न्यायालय ने गुरुवार को एक अतिरिक्त जिला न्यायाधीश को गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की। न्यायाधीश के बेटे का हाल ही में एक कार दुर्घटना में हाथ था, जिसमें एक स्कूटर सवार की मौत हो गई थी।
न्यायमूर्ति कौसर एडप्पागाथ ने जज द्वारा दायर अग्रिम जमानत याचिका पर यह आदेश पारित किया।
अदालत ने आदेश दिया, "अगले आदेश तक पुलिस आवेदक को गिरफ्तार नहीं करेगी। हालांकि, उसे आज दोपहर 1:00 बजे जांच अधिकारी के सामने पेश होना होगा और जरूरत पड़ने पर, बुलाए जाने पर फिर से आना होगा। आवेदक से पूछताछ सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए गए दिशानिर्देशों के अनुसार की जाएगी।"
आरोपी जज की ओर से पेश हुए सीनियर वकील पी. विजया भानु ने कोर्ट को बताया कि वह कल पुलिस के सामने पेश हुए थे और उनसे 4 घंटे से ज़्यादा समय तक पूछताछ की गई।
भानु ने आगे बताया कि इसके बाद उन्हें पुलिस के सामने फिर से पेश होने के लिए एक और नोटिस जारी किया गया है।
बेंच ने सवाल किया कि कस्टोडियल पूछताछ (हिरासत में पूछताछ) की क्या ज़रूरत है, और कहा कि चूंकि आरोपी खुद एक जज हैं, इसलिए वह जांच में सहयोग करेंगे।
कोर्ट ने टिप्पणी की, "उन्हें 4 घंटे तक पूछताछ करने और अब फिर से पूछताछ करने की क्या ज़रूरत थी? उनकी गिरफ़्तारी क्यों ज़रूरी है? वह एक न्यायिक अधिकारी हैं। वह जांच में सहयोग करेंगे।"
उनकी गिरफ़्तारी क्यों ज़रूरी है? वह एक न्यायिक अधिकारी हैं। वह जांच में सहयोग करेंगे।केरल हाई कोर्ट
हादसे के शिकार व्यक्ति के कानूनी वारिसों की ओर से पेश वकील ने इस याचिका का विरोध किया।
उन्होंने कहा कि हादसे के बारे में पता चलने के बाद आरोपी जज ने सबूतों के साथ छेड़छाड़ की थी।
हालांकि, कोर्ट ने कहा कि उसे पूरी तरह से कानून के अनुसार चलना होगा, और आरोपी को गिरफ़्तारी से सुरक्षा दे दी।
कोर्ट ने सरकारी वकील से यह भी कहा कि वह इस याचिका पर राज्य सरकार का जवाब या निर्देश पेश करें।
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Kerala High Court halts arrest of MACT judge booked after his minor son causes fatal car crash