Madurai bench of Madras High Court  
वादकरण

मुख्यमंत्री कार्यालय को पत्र या PIL आपराधिक शिकायत का विकल्प नहीं हो सकते: मद्रास हाईकोर्ट

अदालत ने डिंडिगुल के एक मंदिर से दो मूर्तियों के कथित तौर पर गायब होने की CBI जांच की मांग वाली PIL को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की।

Bar & Bench

मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा है कि सिर्फ़ मुख्यमंत्री कार्यालय को पत्र भेजना और उसके बाद जनहित याचिका (PIL) दायर करना, आपराधिक शिकायत पर आगे बढ़ने के लिए कानून में बताई गई प्रक्रिया का विकल्प नहीं हो सकता [राजा एसएम बनाम राज्य]।

जस्टिस सीवी कार्तिकेयन और आर शक्तिवेल की डिवीज़न बेंच ने डिंडीगुल के अरुलमिघु कलाथीश्वरर अभिरामी मंदिर (जिसे अभिरामी अम्मन मंदिर भी कहा जाता है) से दो मूर्तियों के कथित तौर पर गायब होने के मामले में CBI जांच की मांग करने वाली PIL को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की।

कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता इस मामले में सही तरीके से आपराधिक शिकायत दर्ज कराने के लिए स्वतंत्र है। कोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि अपराध का आरोप लगाने वाले व्यक्ति को सबसे पहले संबंधित जांच एजेंसी के पास उचित शिकायत दर्ज करानी चाहिए। अगर कोई कार्रवाई नहीं होती है, तो शिकायतकर्ता इसके बाद भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) के तहत आगे की राहत के लिए अधिकार क्षेत्र वाले मजिस्ट्रेट या सक्षम अदालत का दरवाज़ा खटखटा सकता है।

कोर्ट ने कहा कि मुख्यमंत्री को लिखा गया पत्र या PIL इस प्रक्रिया का विकल्प नहीं हो सकते।

कोर्ट के 8 सितंबर के आदेश में कहा गया, "कानून में बताई गई प्रक्रिया का पालन याचिकाकर्ता और बाकी सभी लोगों को करना होगा... सिर्फ़ मुख्यमंत्री कार्यालय को पत्र भेजना और फिर जनहित याचिका (PIL) दायर करने से याचिकाकर्ता का मकसद पूरा नहीं होगा।"

Justices Karthikeyan and Sakthivel of Madras HC

याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट में यह आरोप लगाते हुए याचिका दायर की थी कि मंदिर के खंभों से जुड़ी दो मूर्तियां - करुडलवार मूर्ति और बाला दुर्गाई अम्मन मूर्ति - गायब हो गई हैं। कोर्ट के सामने मूर्तियों की तस्वीरें भी पेश की गईं।

याचिकाकर्ता ने 'मूर्ति तस्करी रोकथाम विभाग' (Idol Smuggling Prevention Division) के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADGP) द्वारा 22 जनवरी, 2026 को जारी किए गए एक आदेश/पत्र को रद्द करने की मांग की।

उन्होंने इस मामले में ADGP को भेजे गए अपने आवेदन/शिकायत को आगे बढ़ाने (ट्रांसफर करने) की भी मांग की। उन्होंने कहा कि इस शिकायत को उचित जांच के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को भेजा जाना चाहिए।

हालांकि, कोर्ट ने गौर किया कि याचिकाकर्ता ने सबसे पहले यह आवेदन मुख्यमंत्री कार्यालय (Chief Minister’s Cell) को भेजा था, जिसे बाद में 'मूर्ति तस्करी रोकथाम विभाग' के ADGP को भेज दिया गया था। कोर्ट ने सुझाव दिया कि याचिकाकर्ता संबंधित अधिकारी के पास उचित आपराधिक शिकायत दर्ज कराए।

सुनवाई के दौरान, राज्य सरकार ने कोर्ट को यह भी बताया कि वे दोनों मूर्तियां असल में अभी भी मंदिर में मौजूद हैं, लेकिन उनकी पूजा नहीं की जा रही है क्योंकि वे क्षतिग्रस्त (टूटी-फूटी) हो गई हैं।

बेंच ने याचिका खारिज करते हुए इस जानकारी को रिकॉर्ड पर लिया। साथ ही, कोर्ट ने याचिकाकर्ता को कानून द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने की छूट दी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसकी टिप्पणियों का असर जांच एजेंसी या भविष्य में शिकायत पर विचार करने वाली किसी भी अदालत पर नहीं पड़ना चाहिए।

याचिकाकर्ता की ओर से वकील के. गोकुल पेश हुए।

सरकारी वकील डी. वेंकटेश की ओर से सरकारी वकील एम. पी. सेंथिल ने पहले प्रतिवादी (first respondent) का पक्ष रखा। CBI की ओर से वकील एन. मोहिदीन बाशा पेश हुए।

[फैसला पढ़ें]

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Letter to Chief Minister’s Cell, PIL cannot be substitute for criminal complaint: Madras High Court