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मद्रास हाईकोर्ट ने उंगली पर स्याही के कारण फर्जी मतदान के मामले में दर्ज ऑस्ट्रेलियाई नागरिक की FIR रद्द की

ऑस्ट्रेलियाई नागरिक, जिसके पास OCI कार्ड था, को चेन्नई एयरपोर्ट पर रोक लिया गया। इमिग्रेशन अधिकारियो ने उसकी उंगली पर अमिट स्याही के निशान देखे और उन्हें शक हुआ कि उसने तमिलनाडु चुनाव में वोट डाला है।

Bar & Bench

मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में 'ओवरसीज़ सिटिज़न ऑफ़ इंडिया' (OCI) कार्ड रखने वाले एक ऑस्ट्रेलियाई नागरिक को राहत दी है। यह नागरिक एक आपराधिक मामले में फंस गया था क्योंकि उसकी तर्जनी उंगली पर स्याही के निशान देखकर शक हुआ कि उसने 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में गैर-कानूनी तरीके से वोट डाला है [चंद्रशेखर बनाम राज्य]।

जस्टिस GK इलानथिराययन ने चंद्रशेखर के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द कर दिया। कोर्ट ने पाया कि ऐसा कोई सबूत नहीं था जिससे यह साबित हो सके कि उन्होंने चेन्नई के विरुगंबक्कम विधानसभा क्षेत्र में वह वोट डाला था, जिसके लिए उन पर आरोप लगाया गया था।

कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों ने "बिना सोचे-समझे मान लिया" था कि चंद्रशेखर और इसी तरह के नाम वाले एक अन्य वोटर, दोनों एक ही व्यक्ति हैं।

कोर्ट ने कहा, "यह भी देखा गया है कि दूसरे प्रतिवादी (सहायक विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण अधिकारी) ने बिना सोचे-समझे यह मान लिया कि चंद्रसेकरन रघुपति (यानी वह व्यक्ति जिसने 22-विरुगंबक्कम विधानसभा क्षेत्र में वोट डाला था) और याचिकाकर्ता (यानी चंद्रशेखर रघुपति) का नाम एक ही है।"

Justice GK Ilanthiraiyan

याचिकाकर्ता चंद्रशेखर एक ऑस्ट्रेलियाई नागरिक हैं, जिनके पास ऑस्ट्रेलियाई पासपोर्ट और OCI कार्ड है। उनके माता-पिता भारतीय नागरिक हैं। वह इस साल 17 मार्च को भारत आए थे और 13 मई को ऑस्ट्रेलिया लौटने वाले थे।

हालांकि, जब वह ऑस्ट्रेलिया लौटने वाली फ़्लाइट में सवार होने जा रहे थे, तो चेन्नई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन अधिकारियों ने उनकी बाईं तर्जनी उंगली पर अमिट स्याही के निशान देखे।

इससे अधिकारियों को शक हुआ कि उन्होंने तमिलनाडु चुनाव में वोट दिया है। एक ऑस्ट्रेलियाई नागरिक होने के नाते, उन्हें भारत में वोट देने की इजाज़त नहीं है, भले ही उनके पास OCI कार्ड हो।

इसके बाद, उन पर भारतीय न्याय संहिता के तहत धोखाधड़ी, गलत पहचान बताकर वोट देने और जालसाजी के अपराधों के लिए, और 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम' के तहत गलत बयान देने या पेश करने के अपराध के लिए FIR दर्ज की गई।

अभियोजन पक्ष का आरोप था कि उन्होंने सालिग्रामम के अविची हायर सेकेंडरी स्कूल में वोट दिया था, जो विरुगंबक्कम विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है।

हालांकि, याचिकाकर्ता का कहना था कि 23 अप्रैल को, जिस दिन कथित तौर पर वोट दिया गया था, वह तिरुचिरापल्ली में अपनी बहन के घर पर थे और उनके पास अपने दावे के समर्थन में CCTV फुटेज भी थी।

हाई कोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष के मामले में विसंगतियां थीं। जहां चंद्रशेखर के पास इरोड निर्वाचन क्षेत्र का वोटर ID कार्ड था, वहीं उन पर विरुगंबक्कम में वोट देने का आरोप लगाया गया था।

कोर्ट ने कहा, "अगर याचिकाकर्ता के पास इरोड निर्वाचन क्षेत्र का वोटर ID कार्ड था, तो वह 22-विरुगंबक्कम विधानसभा क्षेत्र में वोट नहीं दे सकते थे।"

पुलिस ने उस चेन्नई पोलिंग स्टेशन से CCTV फुटेज मांगी थी जहां कथित तौर पर वोट डाला गया था, लेकिन वह अनुरोध लंबित ही रहा।

कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई सबूत नहीं था जो इस दावे का समर्थन करे कि याचिकाकर्ता ने किसी और की पहचान बताकर या गलत घोषणाओं के आधार पर अवैध रूप से वोट डाला था।

कोर्ट ने कहा, "इसके अलावा, केवल याचिकाकर्ता के दर्ज बयान के आधार पर दूसरे प्रतिवादी ने शिकायत दर्ज कराई... ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे यह पता चले कि उन्होंने 22-विरुगंबक्कम विधानसभा क्षेत्र में अपना वोट डाला था।"

कोर्ट ने यह मानते हुए FIR रद्द कर दी कि जांच जारी रखने से कोई फ़ायदा नहीं होगा।

याचिकाकर्ता की ओर से वकील विक्रम वीरसामी पेश हुए।

सरकार की ओर से वकील एम. दिनेश पेश हुए।

[फ़ैसला पढ़ें]

Chandirasekar_Vs_State.pdf
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Madras High Court quashes FIR against Australian booked in false voting case due to ink on finger