Supreme Court, Manipur Violence  
वादकरण

कुकी महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाने के आरोपी ने धीमी सुनवाई का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट से जमानत मांगी

"मुकदमा आगे नहीं बढ़ रहा है। यही चुनौती है," आरोपी की ओर से पेश वकील युमलेम्बम जिबन सिंह ने आज अदालत को बताया।

Bar & Bench

2023 में मणिपुर हिंसा के दौरान तीन कुकी-ज़ो महिलाओं को निर्वस्त्र घुमाए जाने के मामले में आरोपी व्यक्तियों में से एक, युमलेम्बम जिबन सिंह ने आज सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया कि मुकदमे की धीमी गति को देखते हुए उसे ज़मानत देने पर विचार किया जाए।

सिंह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शादान फ़रासत पेश हुए। उन्होंने बताया कि कार्यवाही में तेज़ी लाने के बार-बार दिए गए निर्देशों के बावजूद, मुक़दमे की प्रक्रिया बहुत धीमी गति से चल रही है।

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के 5 अक्टूबर के उस आदेश का भी ज़िक्र किया, जिसमें तीनों पीड़ितों की गवाही (साक्ष्य) पूरी करने का निर्देश दिया गया था।

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की पीठ - जिसमें जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल थे - को बताया गया कि अब तक तीनों पीड़ितों में से केवल एक से ही पूरी तरह पूछताछ (परीक्षण) हो पाई है।

फ़रासत ने बताया कि तीसरी पीड़िता का मुख्य परीक्षण (एग्जामिनेशन-इन-चीफ) तो पूरा हो गया है, लेकिन उससे जिरह (क्रॉस-एग्जामिनेशन) होना अभी बाकी है।

उन्होंने कहा, "हालात यह हैं कि जुलाई से अब तक दो-तीन आदेश दिए जा चुके हैं, लेकिन आज तक केवल डेढ़ गवाहों से ही पूछताछ हो पाई है। ज़मीनी हक़ीक़त यही है।"

Chief Justice of India Surya Kant and Justices Joymalya Bagchi and V Mohana

अभियोजन पक्ष की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल राहा ठाकरे ने बताया कि ट्रायल कोर्ट ने सबूत दर्ज करने के लिए 13, 16, 18 और 19 अक्टूबर की तारीखें तय की हैं।

उन्होंने कहा कि तीसरे पीड़ित का मुख्य परीक्षण (एग्जामिनेशन-इन-चीफ) पूरा हो चुका है और बाकी की जिरह (क्रॉस-एग्जामिनेशन) तय तारीखों पर की जाएगी।

हालांकि, फरासत ने बताया कि पहले तय की गई सुनवाइयों में भी कई दिक्कतों की वजह से कोई प्रगति नहीं हो पाई थी; इनमें से एक दिक्कत यह थी कि अनुवादक को डेंगू हो गया था।

उन्होंने कहा, "ट्रायल आगे नहीं बढ़ रहा है। यही सबसे बड़ी चुनौती है।"

Senior Advocate Shadan Farasat

अभियोजन पक्ष की ओर से पेश हुए वकील डीपी सिंह ने बताया कि इस बार लगातार तारीखें दी गई हैं, ताकि गवाहों से पूछताछ (एग्जामिनेशन) पूरी की जा सके।

इसके बाद, सीजेआई कांत ने इस बात को रिकॉर्ड पर लिया कि पीड़ितों में से केवल एक से पूरी तरह पूछताछ हो पाई है, जबकि दूसरी पीड़िता से जिरह (क्रॉस-एग्जामिनेशन) अभी भी चल रही है।

फिर कोर्ट ने अभियोजन पक्ष को निर्देश दिया कि वे तय तारीखों पर तीसरी पीड़िता को ट्रायल कोर्ट के सामने पेश करें, ताकि उसके बयान दर्ज किए जा सकें।

इसके बाद सिंह की जमानत याचिका को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया गया।

यह मामला 4 मई 2023 की एक घटना से जुड़ा है, जो मणिपुर में जातीय हिंसा के दौरान हुई थी। आरोप है कि थौबल जिले में एक भीड़ ने कुकी-ज़ो समुदाय की तीन महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाया था। इनमें से दो महिलाओं के साथ कथित तौर पर सामूहिक बलात्कार किया गया। इस घटना के दौरान एक पीड़िता के पिता और भाई की भी कथित तौर पर हत्या कर दी गई थी।

जुलाई 2023 में सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया, जिसमें दो महिलाओं को निर्वस्त्र घुमाया जा रहा था। इस वीडियो के सामने आने के बाद पूरे देश में भारी आक्रोश फैल गया।

सुप्रीम कोर्ट ने इस घटना का स्वतः संज्ञान (suo motu cognisance) लिया और जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी। बाद में इस मामले का ट्रायल गुवाहाटी स्थानांतरित कर दिया गया।

सिंह पर आरोप है कि उसने महिलाओं को निर्वस्त्र घुमाए जाने का वीडियो रिकॉर्ड किया और उसे अन्य आरोपियों के साथ साझा किया, जिसके बाद यह वीडियो वायरल हो गया। उसे 20 जुलाई 2023 को गिरफ्तार किया गया था।

जनवरी 2026 में गुवाहाटी की एक विशेष सीबीआई अदालत ने सिंह सहित छह आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए। इन आरोपों में हत्या, बलात्कार, सामूहिक बलात्कार और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत अपराध शामिल हैं।

इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने अभियोजन पक्ष को निर्देश दिया था कि वे बिना किसी और देरी के तीनों पीड़ितों से पूछताछ (एग्जामिनेशन) पूरी करना सुनिश्चित करें।

और अधिक पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें


Man accused of parading Kuki women naked flags slow trial, asks Supreme Court to grant bail