Supreme Court, Firecrackers  
वादकरण

दीवाली पर 24 घंटे पटाखे जलाने की इजाज़त नही,लेकिन पूरी तरह पाबंदी भी नही: सुप्रीम कोर्ट ने संतुलित तरीका अपनाने का सुझाव दिया

कोर्ट ने कहा, "पूरी तरह से रोक लगाने से लोगों की भावनाओं पर असर पड़ेगा। और पूरे दिन इनकी इजाज़त देने से बाकी सभी जीवों पर बहुत बड़ा असर पड़ेगा।"

Bar & Bench

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को आने वाले दिवाली के मौसम में पटाखे जलाने के मामले में संतुलित रवैया अपनाने को कहा। कोर्ट ने संकेत दिया कि वह पटाखे जलाने के लिए खास समय तय कर सकता है, लेकिन सिर्फ़ उन्हीं पटाखों के लिए जिनकी इजाज़त है।

जस्टिस एमएम सुंदरेश और पीबी वराले की बेंच ने संकेत दिया कि वे पटाखों के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगाने के पक्ष में नहीं हैं, क्योंकि इससे दिवाली मनाने वाले लोगों की भावनाएं आहत हो सकती हैं।

हालांकि, कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि वह पूरे दिन पटाखे फोड़ने की इजाज़त नहीं देगा।

कोर्ट ने कहा, "हम इसे बिल्कुल साफ कर देते हैं। न तो हम पूरी तरह रोक लगाने की आपकी बात मानेंगे और न ही हम 24 घंटे पटाखे फोड़ने की इजाज़त देंगे। पूरी तरह रोक लगाने से लोगों की भावनाएं आहत होंगी। और पूरे दिन पटाखे फोड़ने की इजाज़त देने से हर जीव पर, जिसमें बुज़ुर्ग, बीमार और बच्चे भी शामिल हैं, बहुत बुरा असर पड़ेगा। हमें कोई ऐसा समाधान निकालना होगा जिससे हम एक तय समय तय कर सकें।"

इससे पहले की सुनवाई में, कोर्ट ने सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) से कहा था कि वह पटाखों पर लगी पाबंदियों में ढील देने पर विचार करे। आज कोर्ट ने कहा कि CPCB की रिपोर्ट आने के बाद वह तय करेगा कि किन पटाखों के इस्तेमाल की इजाज़त दी जाएगी।

Justice M.M. Sundresh and Justice Prasanna B. Varale

कोर्ट 2015 के एक मामले की सुनवाई कर रहा था, जिसमें वह दिल्ली और उत्तर भारत के उन राज्यों में पटाखे जलाने पर रोक लगाने के आदेश देता रहा है, जो अक्टूबर से जनवरी के बीच वायु प्रदूषण से प्रभावित होते हैं।

दिल्ली में खराब हवा की लगातार समस्या के कारण, कोर्ट ने पहले दिल्ली में पटाखे जलाने पर रोक लगा दी थी।

हालांकि, 2025 में, सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली के त्योहार के दौरान कुछ समय के लिए दिल्ली और नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) में ग्रीन पटाखे बेचने और जलाने की इजाज़त दी थी।

इस साल जुलाई और अगस्त में हुई सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने CPCB से यह भी पूछा था कि क्या कुछ खास तरह के पटाखों के मामले में थोड़ी ढील दी जा सकती है।

एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) ऐश्वर्या भाटी ने आज बेरियम-बेस्ड पटाखों के इस्तेमाल पर CPCB का जवाब रखने के लिए 15 अक्टूबर तक का समय मांगा।

उन्होंने कहा, "बेरियम-बेस्ड पटाखों की आउटडोर टेस्टिंग अभी होनी बाकी है। मैं 15 अक्टूबर तक का समय मांग रही हूं।"

उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि 'जॉइंट पटाखे' या 'लड़ी' (जिसमें कई पटाखे एक ही फ्यूज़ से जुड़े होते हैं और एक के बाद एक फूटते हैं) के निर्माण की इजाज़त कुछ शर्तों के साथ दी जा सकती है। कोर्ट ने आज कहा कि वह इस सुझाव को मानने के लिए तैयार है।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, "सुनवाई के दौरान ASG ने जॉइंट पटाखों से जुड़ी जानकारी दी। हम दिए गए सुझावों को मानने के लिए तैयार हैं।"

इस बीच, एक और वकील ने आने वाले महीनों में दिल्ली में होने वाले प्रदूषण को लेकर चिंता जताई।

वकील ने कहा, "दिवाली के दौरान फसल भी जलाई जाएगी। वे दो दिन पर्यावरण में बहुत ज़्यादा तबाही मचाते हैं।"

इसके जवाब में कोर्ट ने भरोसा दिलाया कि वह पटाखों के बेरोकटोक इस्तेमाल की इजाज़त नहीं देगा, लेकिन इस बात की जांच करेगा कि क्या त्योहार के मौसम में खास समय पर इनका इस्तेमाल किया जा सकता है।

कुछ पटाखा निर्माताओं की तरफ से पेश हुए सीनियर एडवोकेट के. परमेश्वर ने कोर्ट से गुज़ारिश की कि पटाखों के इस्तेमाल पर रोक की जांच करते समय सिर्फ़ दिल्ली को ही अलग से न देखा जाए।

कोर्ट ने CPCB को बेरियम-बेस्ड पटाखों के असर पर अपनी रिपोर्ट जमा करने के लिए समय दिया।

कोर्ट ने इस बात पर भी ध्यान दिया कि इस मामले में उठाए गए कुछ मुद्दे एक दूसरे पेंडिंग केस में उठाए गए मुद्दों से मिलते-जुलते हैं। कोर्ट इस बात से सहमत था कि बेहतर यही होगा कि दोनों मामलों की सुनवाई एक ही बेंच करे।

और अधिक पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें


No 24-hour firecracker use during Diwali but no total ban either: Supreme Court moots balanced approach