Madras High Court, TVK flag, Vijay 
वादकरण

मद्रास हाईकोर्ट में याचिका दायर कर CM विजय के अपने ज्योतिषी को OSD नियुक्त करने के फैसले को चुनौती दी गई

याचिकाकर्ता ने यह तर्क दिया है कि किसी ज्योतिषी को केवल इसलिए किसी सार्वजनिक पद पर नियुक्त करना गैर-कानूनी है, क्योंकि उसने हाल ही में हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में TVK की जीत की भविष्यवाणी की थी।

Bar & Bench

मद्रास हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई है, जिसमें ज्योतिषी रिकी राधन पंडित वेट्रिवेल को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय के 'ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी' के तौर पर की गई नियुक्ति को चुनौती दी गई है [राठी बनाम तमिलनाडु राज्य]।

इस याचिका का आज जस्टिस विक्टोरिया गौरी और जस्टिस एन. सेंथिलकुमार की वेकेशन बेंच के समक्ष तत्काल सुनवाई के लिए ज़िक्र किया गया, और उम्मीद है कि इस पर कल सुनवाई होगी।

Justices Victoria Gowri and N Senthilkumar

याचिकाकर्ता, आर राठी, जो एक वकील हैं, ने वेट्रिवेल के खिलाफ 'क्वो वारंटो' (Quo Warranto) की रिट जारी करने की मांग की है। इस रिट के ज़रिए उन्होंने वेट्रिवेल के उस अधिकार पर सवाल उठाया है, जिसके तहत वे मुख्यमंत्री के विशेष कार्य अधिकारी (राजनीतिक) के पद पर आसीन हैं।

'क्वो वारंटो' की रिट तब जारी की जाती है, जब किसी सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति से यह पूछा जाता है कि वह किस कानूनी अधिकार के तहत उस पद पर काम कर रहा है।

राठी की याचिका में बताया गया है कि वेट्रिवेल एक ज्योतिषी हैं, जिन्होंने यह भविष्यवाणी की थी कि विजय की पार्टी, 'तमिलगा वेट्री कज़गम' (TVK), एक बड़ी राजनीतिक ताकत बनकर उभरेगी; साथ ही यह भी कहा था कि विजय तमिलनाडु विधानसभा चुनाव जीतेंगे और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बनेंगे।

याचिका में आगे यह तर्क दिया गया है कि वेट्रिवेल को OSD (विशेष कार्य अधिकारी) के पद पर केवल उनकी ज्योतिषीय सेवाओं के इनाम के तौर पर नियुक्त किया गया है।

याचिका में कहा गया है, "यह नियुक्ति उनकी ज्योतिषीय सेवाओं के इनाम के तौर पर की गई है, जो कि पूरी तरह से गैर-कानूनी, कानून के अधिकार से बाहर और असंवैधानिक है।"

इसलिए, याचिकाकर्ता ने 12 मई, 2026 को तमिलनाडु सरकार के 'लोक विभाग' द्वारा जारी की गई उस कार्यवाही को चुनौती दी है, जिसके तहत वेट्रिवेल को उनके कार्यभार संभालने की तारीख से ही इस पद पर नियुक्त किया गया था।

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि यह नियुक्ति बिना किसी आवेदन आमंत्रित किए, बिना सेवा नियम बनाए, बिना कोई भर्ती अधिसूचना जारी किए और बिना किसी चयन प्रक्रिया का पालन किए की गई है।

याचिका के अनुसार, इस तरह की नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन करती है। ये अनुच्छेद कानून के समक्ष समानता और सार्वजनिक रोज़गार में समान अवसर की गारंटी देते हैं।

याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का हवाला दिया है, जो 'सेक्रेटरी, स्टेट ऑफ़ कर्नाटक बनाम उमा देवी' मामले में आया था। इस फैसले में यह स्पष्ट किया गया था कि सार्वजनिक नियुक्तियाँ संवैधानिक ढांचे के अनुरूप ही होनी चाहिए और उन्हें किसी भी 'चोर-दरवाज़े' (backdoor) के तरीके से नहीं किया जा सकता।

याचिकाकर्ता ने आगे यह भी तर्क दिया है कि नियुक्ति आदेश की प्रतियाँ 'वेतन एवं लेखा कार्यालय' (Pay and Accounts Office) और 'महालेखाकार' (Accountant General) को भी भेजी गई थीं। इससे यह साबित होता है कि यह पद एक सार्वजनिक नियुक्ति है और इसका वेतन सार्वजनिक कोष (सरकारी खजाने) से दिया जाता है।

इसी आधार पर, याचिका में यह तर्क दिया गया है कि इस पद के लिए कानूनी रूप से पद का सृजन होना, उसकी स्वीकृति मिलना, बजट में आवंटन होना, वेतनमान तय होना, पात्रता के मानदंड निर्धारित होना और भर्ती की एक निर्धारित प्रक्रिया का पालन होना अनिवार्य था।

याचिकाकर्ता ने यह आरोप भी लगाया है कि यह आदेश केवल मुख्यमंत्री कार्यालय से प्राप्त एक 'कार्यालय टिप्पणी' (office note) के आधार पर और पूरी तरह से राजनीतिक हितों को ध्यान में रखते हुए जारी किया गया था। याचिका में कहा गया है कि नियुक्ति के नियम और शर्तें आदेश में नहीं बताई गई थीं, कथित तौर पर ऐसा कानूनी पेचीदगियों और अदालत में संभावित चुनौती से बचने के लिए किया गया था।

याचिकाकर्ता ने यह घोषणा करने की मांग की है कि वेट्रिवेल की नियुक्ति असंवैधानिक, अवैध, मनमानी और शून्य है।

उन्होंने 12 मई की नियुक्ति की कार्यवाही को रद्द करने और एक अंतरिम निषेधाज्ञा जारी करने की मांग की है, जो मामले के लंबित रहने के दौरान वेट्रिवेल को मुख्यमंत्री के 'ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी' के रूप में काम जारी रखने से रोकती हो।

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Plea in Madras High Court challenges CM Vijay’s decision to appoint his astrologer as OSD