सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने हिंडनबर्ग रिसर्च रिपोर्ट में उठाए गए आरोपों की जांच से जुड़े मामलों में अडानी ग्रुप की पांच कंपनियों के खिलाफ चल रही कानूनी कार्यवाही को कुल मिलाकर लगभग ₹1.5 करोड़ की रकम पर निपटा लिया है।
ये कंपनियाँ हैं - अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड, अडानी टोटल गैस लिमिटेड, AWL एग्री बिजनेस लिमिटेड (पहले अडानी विल्मर लिमिटेड), अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड और अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड (पहले अडानी ट्रांसमिशन लिमिटेड)।
SEBI ने हिंडनबर्ग रिपोर्ट में बताए गए कथित 'रिलेटेड-पार्टी ट्रांज़ैक्शन' (RPTs) और कॉर्पोरेट गवर्नेंस से जुड़े मुद्दों की जाँच की। साथ ही, SEBI के 'लिस्टिंग ऑब्लिगेशन्स एंड डिस्क्लोज़र रिक्वायरमेंट्स रेगुलेशन्स' और पुराने 'इक्विटी लिस्टिंग एग्रीमेंट' के संभावित उल्लंघन की भी जाँच की गई।
इस जाँच में अडानी ग्रुप की सात कंपनियाँ शामिल थीं, जिनमें अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन लिमिटेड और अडानी पावर लिमिटेड भी शामिल हैं।
अपनी जाँच के नतीजों के आधार पर, SEBI ने डिस्क्लोज़र और फाइनेंशियल स्टेटमेंट से जुड़े कथित उल्लंघनों के लिए इन पाँचों कंपनियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई (एडजूडिकेशन) शुरू की।
अडानी एंटरप्राइजेज के मामले में, SEBI ने आरोप लगाया कि उसकी सब्सिडियरी कंपनी 'अडानी एस्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड' और 'वाकोडर इन्वेस्टमेंट लिमिटेड' (जिसे अडानी एंटरप्राइजेज की 'रिलेटेड पार्टी' बताया गया था) के बीच हुए लेन-देन की जानकारी कंपनी की 2012-13 की सालाना रिपोर्ट में लागू अकाउंटिंग स्टैंडर्ड के अनुसार नहीं दी गई थी।
SEBI ने यह भी आरोप लगाया कि अडानी एंटरप्राइजेज की कुछ ऑडिट और लिमिटेड रिव्यू रिपोर्ट पर 'धर्मेश पारिख एंड कंपनी LLP' और 'शाह धंधारिया एंड कंपनी LLP' ने तब साइन किए थे, जब इन फर्मों के पास वैलिड 'पीयर रिव्यू सर्टिफिकेट' नहीं थे।
वैलिड पीयर रिव्यू सर्टिफिकेट के बिना रिपोर्ट पर साइन करने से जुड़े ऐसे ही आरोप अडानी टोटल गैस, AWL एग्री बिजनेस, अडानी ग्रीन एनर्जी और अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस पर भी लगाए गए थे।
कानूनी कार्रवाई (एडजूडिकेशन) के दौरान, इन पाँचों कंपनियों ने SEBI के 'सेटलमेंट प्रोसीडिंग्स रेगुलेशन्स, 2018' के तहत तथ्यों और कानूनी निष्कर्षों को माने या नकारे बिना सेटलमेंट (समझौते) की माँग की।
SEBI की इंटरनल कमिटी के साथ मीटिंग के बाद, मई 2026 में सेटलमेंट की संशोधित शर्तें प्रस्तावित की गईं।
इसके बाद, हाई-पावर्ड एडवाइजरी कमिटी ने सेटलमेंट के तौर पर अडानी एंटरप्राइजेज से ₹76.05 लाख, अडानी ग्रीन एनर्जी से ₹45.50 लाख और अडानी टोटल गैस, AWL एग्री बिजनेस और अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस में से हर एक से ₹9.75 लाख के भुगतान की सिफारिश की।
इन सिफारिशों को 13 अगस्त को SEBI के 'होल-टाइम मेंबर्स' के पैनल ने मंज़ूरी दे दी। कंपनियों ने 5 सितंबर को SEBI को सूचित किया कि सेटलमेंट की रकम जमा कर दी गई है, और SEBI ने पैसे मिलने की पुष्टि की। इसके अनुसार, एडजुडिकेटिंग ऑफिसर जय सेबेस्टियन ने फरवरी 2024 के 'शो-कॉज़ नोटिस' (कारण बताओ नोटिस) से शुरू हुई कार्यवाही को सेटलमेंट की शर्तों के आधार पर निपटा दिया।
22 सितंबर को जारी आदेश में यह साफ़ किया गया है कि अगर सेटलमेंट के दौरान दी गई कोई जानकारी बाद में गलत पाई जाती है, अगर आवेदक अपने वादों या छूट (वेवर) का उल्लंघन करते हैं, या अगर सेटलमेंट की शर्तें तय करने में कोई गड़बड़ी पाई जाती है, तो SEBI कार्यवाही को फिर से शुरू कर सकता है।
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SEBI settles Hindenburg-linked disclosure cases against five Adani companies for ₹1.5 crore