पत्रकार सुधीर चौधरी ने मंगलवार को दिल्ली हाई कोर्ट को बताया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से उनकी वे सभी पोस्ट हटा दी गई हैं, जिनमें एक्टिविस्ट विजय शेरावत को गलत तरीके से वह व्यक्ति बताया गया था जिसने 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के विरोध-प्रदर्शन के दौरान संसद को "बर्बाद करने" और भारत में "नेपाल जैसे हालात" पैदा करने के नारे लगाए थे।
सीनियर एडवोकेट दयान कृष्णन ने जस्टिस तुषार राव गेडेला के सामने चौधरी और उनकी प्रोडक्शन कंपनी, एस्प्रिट प्रोडक्शंस की ओर से यह बयान दिया।
कृष्णन ने कहा, "मैंने इसे खुद ही हटा दिया है। हमने सोच-समझकर इसे हटाने का फ़ैसला किया है... हमने सोशल मीडिया इंटरमीडियरीज़ को भी लिखा है कि अगर आपकी साइट पर किसी तीसरे पक्ष (थर्ड पार्टी) की हमारी कोई पोस्ट है, तो कृपया उसे भी हटा दें।"
उन्होंने आगे कहा कि अगर सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स को कंटेंट हटाने के लिए कोई निर्देश जारी किए जाते हैं, तो उन्हें इससे कोई आपत्ति नहीं है।
शेरावत ने चौधरी और DD न्यूज़ पर 27 अगस्त को पब्लिक ब्रॉडकास्टर पर दिखाए गए एक शो को लेकर केस किया है। इस शो में चौधरी ने आरोप लगाया था कि CJP प्रोटेस्ट के दौरान, शेरावत संसद को खत्म करने और भारत में नेपाल जैसे हालात पैदा करने की बात कर रहे थे।
इस केस में ₹5 करोड़ के मुआवज़े की मांग की गई है।
मानहानि के केस के मुताबिक, चौधरी के होस्ट किए गए प्रोग्राम 'डिकोड' (DECODE) के एक एपिसोड में शेरावत की पहचान की गई और उनकी तस्वीर दिखाई गई। उन्हें उस व्यक्ति के तौर पर दिखाया गया जिसने नारे लगाए थे - "संसद भवन उखाड़ दिया जाएगा... नेपाल बना दिया जाएगा।"
शेरावत का दावा है कि उन्होंने ऐसा कोई बयान नहीं दिया था; यह बयान किसी और अनजान व्यक्ति ने किसी दूसरे इवेंट में दिया था।
केस में यह भी आरोप लगाया गया है कि चौधरी और अन्य लोगों ने टेलीकास्ट से पहले कोई जांच-पड़ताल नहीं की, शेरावत को जवाब देने का कोई मौका नहीं दिया और उपलब्ध फुटेज के खराब क्वालिटी वाले वर्शन का इस्तेमाल किया ताकि दोनों लोगों के बीच फ़र्क न किया जा सके।
शिकायत के अनुसार, ब्रॉडकास्ट के कुछ ही घंटों के भीतर, क्लिप को X और Instagram पर दोबारा शेयर किया गया। शिकायतकर्ता को जान से मारने की खुली धमकियां मिलीं, जिनमें गोली मारने, सिर काटने और हाथ-पैर तोड़ने की धमकियां शामिल थीं। एक यूज़र ने तो हमला करने के लिए उनका घर का पता भी मांगा।
केस में कहा गया है कि शेरावत ने 31 जुलाई को अपने Instagram अकाउंट पर सफाई दी थी, लेकिन उनके लगभग 4,224 फ़ॉलोअर्स वाले अकाउंट की पहुंच उस नेशनल ब्रॉडकास्ट के मुकाबले बहुत कम थी, जिसके 1.4 अरब डिजिटल व्यूज़ का दावा किया जाता है।
यह केस वकील पुष्प शर्मा, आदित्य नारायण शुक्ला, जय अल्लाघ और प्रसून शेखर के ज़रिए दायर किया गया है।
जब आज मामले पर सुनवाई हुई, तो कृष्णन ने कोर्ट को पोस्ट हटाए जाने के बारे में जानकारी दी।
बेंच ने उनके बयान पर ध्यान दिया, लेकिन शेरावत से कोर्ट फीस जमा न करने के बारे में भी सवाल किया। बेंच ने देखा कि जहाँ कोर्ट फीस के तौर पर लगभग ₹4.90 लाख जमा किए जाने थे, वहीं शेरावत ने सिर्फ़ ₹100 जमा किए थे।
शेरावत के वकील ने फीस जमा करने के लिए कुछ और समय माँगा और दलील दी कि वह एक छात्र हैं। हालाँकि कोर्ट ने शुरू में शेरावत से फीस जमा न करने पर सवाल किया, लेकिन आखिर में पैसे जमा करने के लिए समय बढ़ाने की उनकी अर्ज़ी मंज़ूर कर ली।
इस बीच, कृष्णन ने कहा कि चूँकि पोस्ट हटा दिए गए हैं, इसलिए मामले में अब कुछ नहीं बचा है। हालाँकि, शेरावत ने कहा कि वे मामले को आगे बढ़ाना चाहते हैं।
कोर्ट ने कहा कि मामले की अगली सुनवाई जनवरी में होगी।
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Sudhir Chaudhary tells Delhi High Court he has removed posts misidentifying CJP protest activist