सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को राजपाल यादव के उस प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी, जिसमें उन्होंने 2012 की एक फ़िल्म के लिए लिए गए लोन से जुड़े चेक बाउंस मामले में बकाया रकम चुकाने के लिए अपनी पुश्तैनी संपत्ति बेचने की बात कही थी।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने इस बात पर भी ध्यान दिया कि यादव ने ₹2 करोड़ का तुरंत भुगतान करने के लिए डिमांड ड्राफ्ट का इंतज़ाम किया है।
इसके तहत, यादव ने ₹1.15 करोड़ के डिमांड ड्राफ्ट पेश किए, जबकि बाकी ₹85 लाख का भुगतान यादव की प्रॉपर्टी खरीदने के इच्छुक व्यक्ति द्वारा 12 अक्टूबर तक किया जाएगा।
कोर्ट ने अपने आदेश में इस बात का ज़िक्र किया और यह भी कहा कि वह बाकी रकम चुकाने के लिए एक शेड्यूल तय करेगी,
आदेश में कहा गया, "याचिकाकर्ता ने आखिरकार ₹1.15 करोड़ के डिमांड ड्राफ्ट पेश किए हैं, जिन्हें आज ही रजिस्ट्री में जमा किया जाएगा। ₹85 लाख के बारे में, याचिकाकर्ता का कहना है कि उनकी प्रॉपर्टी खरीदने का इच्छुक व्यक्ति कोर्ट में मौजूद है। अनंत प्रकाश यादव कोर्ट में मौजूद हैं और वह ₹85 लाख की रकम चुकाने को तैयार हैं। वह सोमवार को रजिस्ट्री में डिमांड ड्राफ्ट के ज़रिए ₹85 लाख की रकम जमा करने को तैयार हैं। ऐसा करने पर, हम उन्हें रोज़ाना के आधार पर कुछ शर्तों के साथ राहत देंगे।"
कोर्ट राजपाल यादव की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी जो उनकी 2012 की फ़िल्म 'अता पता लापता' के लिए लिए गए लोन से जुड़े लंबे समय से चल रहे चेक बाउंस मामले से संबंधित थी।
यह मामला यादव और उनकी पत्नी को 'मुरली प्रोजेक्ट्स' नाम की एक प्राइवेट कंपनी से मिली ₹5 करोड़ की रकम से जुड़ा है, जो यादव द्वारा बनाई जा रही एक फ़िल्म के सिलसिले में मिली थी।
दोनों पक्षों के बीच चार समझौते हुए क्योंकि फ़िल्म तय समय सीमा के अंदर पूरी नहीं हो सकी थी।
तीसरे समझौते के तहत, यादव ने मुरली प्रोजेक्ट्स को आठ सिक्योरिटी चेक दिए। बाद में तीसरे समझौते की जगह चौथे समझौते ने ले ली, जिसे 21 अप्रैल 2013 का 'सहमति समझौता' (consent agreement) बताया गया। यादव की याचिका के अनुसार, सहमति समझौते में आठ सिक्योरिटी चेक वापस करने और ₹10-10 करोड़ के चार नए चेक जारी करने की बात कही गई थी।
यादव का आरोप है कि मुरली प्रोजेक्ट्स ने आठ सिक्योरिटी चेक वापस नहीं किए और इसके बजाय उनमें से सात चेक बैंक में जमा कर दिए, जो बाउंस हो गए। इसी वजह से यादव और उनकी पत्नी के ख़िलाफ़ आपराधिक शिकायतें दर्ज हुईं।
मई 2024 में, एक सेशंस कोर्ट ने यादव को दोषी ठहराया और छह महीने की जेल की सज़ा सुनाई।
बाद में दिल्ली हाई कोर्ट ने उनकी सज़ा पर रोक लगा दी, जब उनके वकील ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि विवाद सुलझा लिया जाएगा। मामले को दिल्ली हाई कोर्ट मीडिएशन सेंटर (मध्यस्थता केंद्र) भी भेजा गया था।
हालांकि, बाद में हाई कोर्ट ने पाया कि बार-बार भरोसा दिलाने और समझौते के लिए कई बार सुनवाई टलवाने के बावजूद, एक्टर ने वादा किया गया पेमेंट नहीं किया। हाई कोर्ट ने देखा कि यादव ने कोर्ट को भुगतान करने का जो भरोसा दिलाया था, वह रकम जमा नहीं की; इसमें ₹2.5 करोड़ की वह रकम भी शामिल थी जिसे किश्तों में चुकाने की उन्होंने इजाज़त मांगी थी।
फ़रवरी 2026 में, हाई कोर्ट ने यादव को अपने पिछले आदेशों का पालन न करने के कारण जेल अधिकारियों के सामने सरेंडर करने का निर्देश दिया। सरेंडर के लिए और समय मांगने की उनकी याचिका भी खारिज कर दी गई। आख़िरकार यादव ने 5 फ़रवरी को सरेंडर कर दिया और जेल में रहे, जब तक कि हाई कोर्ट ने शिकायतकर्ता के पास ₹1.5 करोड़ जमा करने के बाद उन्हें सज़ा से अंतरिम राहत (interim suspension) नहीं दे दी।
हालांकि, कई बार वादा करने के बाद भी बाकी रकम जमा न कर पाने के कारण कोर्ट ने उन्हें तीन महीने की जेल की सज़ा सुनाई।
अब इस फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।
यादव की याचिका के अनुसार, बाद में हुए सहमति समझौते ने पुराने चेक को अमान्य कर दिया था और इसलिए उन चेक पर आधारित शिकायतें 'नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट' की धारा 138 के तहत सुनवाई के लायक नहीं थीं।
कोर्ट ने 8 सितंबर को उन्हें सरेंडर करने से छूट दी थी, बशर्ते वे 9 सितंबर तक पैसे जमा कर दें।
15 सितंबर को कोर्ट ने उन्हें दो हफ़्ते का और समय दिया और 5 अक्टूबर तक पैसे जमा करने को कहा।
यादव के वकील ने आज कोर्ट को बताया कि उनके पास ₹1.15 करोड़ हैं जो वे देने को तैयार हैं, और यादव की पुश्तैनी संपत्ति का एक खरीदार, जो कोर्ट में मौजूद है, एडवांस के तौर पर ₹85 लाख और देने को तैयार है।
वकील ने कहा, "हमारे पास पहले से ही ₹1.15 करोड़ हैं। हमारे पास पुश्तैनी संपत्ति का खरीदार भी है। बस दिक्कत यह है कि पितृ पक्ष चल रहा है और लोग अभी रजिस्ट्रेशन नहीं करवाना चाहते। खरीदार भी कोर्ट में मौजूद है। वह आगे आकर ₹85 लाख देने को तैयार है ताकि कुल रकम ₹2 करोड़ हो जाए। वह अभी बिक्री के दस्तावेज़ों का रजिस्ट्रेशन नहीं करवाना चाहता। वह चाहता है कि नवरात्रि शुरू हो जाए, जो सोमवार से शुरू हो रही है। लेकिन वह एडवांस में ₹85 लाख देने को तैयार है।"
हालांकि, कोर्ट ने बताया कि देनदारी ₹2 करोड़ से ज़्यादा है।
CJI कांत ने पूछा, "कुल बिक्री मूल्य क्या होगा? क्योंकि देनदारी ₹2 करोड़ से कहीं ज़्यादा है।"
वकील ने जवाब दिया, "संपत्ति की कीमत ₹30 करोड़ से ज़्यादा है।"
CJI कांत ने पूछा, "तो क्या खरीदार के पास भुगतान करने की पर्याप्त क्षमता है?"
यादव के वकील ने कहा, "हाँ।"
शिकायतकर्ता के वकील ने इस प्रस्ताव पर सहमति जताई और यह भी कहा कि अगर अभी ₹2 करोड़ का भुगतान कर दिया जाता है, तो यादव को बाकी रकम चुकाने के लिए तीन महीने का समय दिया जा सकता है।
शिकायतकर्ता के वकील ने जवाब दिया, "अगर वह ₹2 करोड़ देने को तैयार हैं, तो बाकी रकम के लिए तीन महीने का समय दिया जा सकता है। मुझे इसमें भी कोई दिक्कत नहीं है। सोलह साल बीत चुके हैं।"
CJI ने प्रस्ताव दिया, "वह आज आपको ₹1.15 करोड़ देंगे। सोमवार को RTGS के ज़रिए आपके खाते में ₹85 लाख आ जाएंगे। फिर, बाकी रकम के लिए हम एक शेड्यूल तय करेंगे। हम खरीदार से भी एक अंडरटेकिंग (लिखित वादा) लेंगे।"
साथ ही, जस्टिस बागची ने अब तक यादव के बर्ताव पर नाराज़गी जताई और चेतावनी भी दी कि बेंच यादव की सज़ा को तीन महीने से बढ़ाकर दो साल करने पर विचार कर रही है।
हालांकि, बेंच ने कहा कि वह उन्हें यह रियायत सिर्फ़ इसलिए दे रही है ताकि शिकायतकर्ता को उसका बकाया पैसा मिल सके।
जस्टिस बागची ने कहा, "हम इससे संतुष्ट नहीं हैं। यह बर्ताव हमें संतुष्ट नहीं करता... समझ लीजिए कि न तो हम आपकी नेक नीयत से प्रभावित हैं और न ही मामले की मेरिट से। हम शिकायतकर्ता को उचित राहत देने के मकसद से ही यह रियायत दे रहे हैं।"
इस मामले की सुनवाई दो दिन बाद फिर होगी।
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