सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को 'परसेप्ट टैलेंट मैनेजमेंट' की उस अपील पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें कलकत्ता हाई कोर्ट के उस फ़ैसले को चुनौती दी गई थी, जिसने पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान सौरव गांगुली के पक्ष में ₹14.49 करोड़ के आर्बिट्रल अवॉर्ड को बरकरार रखा था [परसेप्ट टैलेंट मैनेजमेंट लिमिटेड और अन्य बनाम सौरव चंडीदास गांगुली]।
यह विवाद 2003 में गांगुली और परसेप्ट के बीच हुए 'प्लेयर रिप्रेजेंटेशन एग्रीमेंट' (खिलाड़ी प्रतिनिधित्व समझौते) से शुरू हुआ था, जो उनके कमर्शियल और एंडोर्समेंट कामों के मैनेजमेंट से जुड़ा था।
इस मामले की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने की।
सुनवाई के दौरान, जस्टिस बागची ने परसेप्ट की उस कोशिश पर सवाल उठाया जिसमें वे इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) की टीम 'कोलकाता नाइट राइडर्स' से जुड़े गांगुली के कामों को समझौते में बताई गई 'प्रमोशनल एक्टिविटीज़' (प्रचार संबंधी गतिविधियों) की परिभाषा के दायरे में लाने की कोशिश कर रहे थे।
जज ने आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल (मध्यस्थता न्यायाधिकरण) के सामने कंपनी के रुख की ओर इशारा किया।
जस्टिस बागची ने पूछा, "अगर आर्बिट्रेटर के सामने आपने KKR की प्रमोशनल एक्टिविटीज़ का मतलब इस तरह निकाला था, तो हम आपको हमारे सामने आकर यह दलील देने की इजाज़त कैसे दे सकते हैं कि प्रमोशनल एक्टिविटी की परिभाषा को उस कॉन्ट्रैक्ट के हिसाब से देखा जाना चाहिए जो किया गया था?"
यह टिप्पणी तब आई जब 'परसेप्ट' (Percept) की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट नकुल दीवान ने दलील दी कि समझौते में एक व्यापक क्लॉज़ (शर्त) शामिल थी, जिसमें प्रमोशन से जुड़ी सेवाएं—जिनमें क्रिकेट मैचों से जुड़ी सेवाएं भी शामिल थीं—आती थीं।
जस्टिस बागची ने आगे कहा कि गांगुली का KKR के लिए खेलना एक पहलू था, लेकिन उनके विज्ञापन से जुड़े कामों का एक अलग पहलू भी था।
जस्टिस बागची ने कहा, "एक हिस्सा आपका क्रिकेट खेलना है, लेकिन एक और अहम हिस्सा है जिसमें आप विज्ञापन कर रहे हैं।"
सौरव गांगुली और टैलेंट मैनेजमेंट फर्म 'परसेप्ट' के बीच विवाद 2003 का है, जब गांगुली ने कंपनी को अपने कमर्शियल और एंडोर्समेंट डील्स के लिए अपना एक्सक्लूसिव मैनेजर नियुक्त किया था।
इस एग्रीमेंट में गांगुली को कम से कम पेमेंट की गारंटी दी गई थी और उनके कमर्शियल कामों से होने वाली कमाई को शेयर करने की व्यवस्था थी। जब गांगुली को कई महीनों तक भारतीय क्रिकेट टीम से बाहर रखा गया, तो परसेप्ट ने नवंबर 2007 में एग्रीमेंट खत्म कर दिया।
गांगुली ने इस फैसले को चुनौती दी, जिसके बाद आर्बिट्रेशन की कार्यवाही शुरू हुई। 2018 में, तीन सदस्यों वाले आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया और परसेप्ट को निर्देश दिया कि वह उन्हें ₹14.49 करोड़ का भुगतान करे, साथ ही 12% सालाना ब्याज और खर्च के तौर पर ₹50 लाख भी दे।
ट्रिब्यूनल ने परसेप्ट के उस दावे को भी खारिज कर दिया कि इंडियन प्रीमियर लीग में कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए खेलने से गांगुली को जो कमाई हुई, उसे एग्रीमेंट के तहत रेवेन्यू-शेयरिंग व्यवस्था में शामिल किया जाना चाहिए।
इसके बाद, परसेप्ट ने कलकत्ता हाई कोर्ट में इस फैसले को चुनौती दी। जुलाई 2025 में एक सिंगल-जज ने उनकी चुनौती को खारिज कर दिया। फिर कंपनी ने अपील की, लेकिन हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने अप्रैल 2026 में अपील खारिज कर दी।
इसके बाद परसेप्ट ने हाई कोर्ट के फैसले और गांगुली के पक्ष में आए फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
सोमवार की सुनवाई के दौरान, दीवान ने तर्क दिया कि आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल ने इस नतीजे पर पहुंचने से पहले कि KKR के साथ खेलने के कॉन्ट्रैक्ट से गांगुली की कमाई रेवेन्यू-शेयरिंग व्यवस्था के दायरे से बाहर थी, संबंधित कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों और सबूतों पर विचार नहीं किया।
उन्होंने यह भी कहा कि आर्बिट्रेशन एंड कंसिलिएशन एक्ट, 1996 की धारा 34 (जो सीमित आधारों पर आर्बिट्रल फैसले को रद्द करने की अनुमति देती है) के तहत अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करने वाली अदालत सबूतों का दोबारा मूल्यांकन या कॉन्ट्रैक्ट की दोबारा व्याख्या नहीं कर सकती, सिर्फ इसलिए कि वह किसी दूसरी व्याख्या को पसंद करती है।
यह भी कहा गया कि दखल देने का यही सीमित दायरा धारा 37 (जो एक्ट के तहत कुछ आदेशों के खिलाफ अपील की व्यवस्था करती है) के तहत अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करने वाली अदालत पर भी लागू होता है।
दीवान ने आगे हीरो होंडा जैसे ब्रांडों के साथ गांगुली के कमर्शियल समझौतों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अगर हीरो होंडा KKR को स्पॉन्सर करती है और साथ ही गांगुली के पर्सनल अधिकारों के लिए उनके साथ अलग से कॉन्ट्रैक्ट करती है, तो यह बाद वाला अरेंजमेंट परसेप्ट के साथ हुए एग्रीमेंट के दायरे में आएगा।
हालांकि, कोर्ट ने अपील पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया।
परसेप्ट टैलेंट मैनेजमेंट लिमिटेड की ओर से सीनियर एडवोकेट नकुल दीवान पेश हुए।
सौरव गांगुली का प्रतिनिधित्व सीनियर एडवोकेट गौरव बनर्जी ने किया।
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Supreme Court dismisses Percept's appeal against ₹14.49 crore arbitral award to Sourav Ganguly